केरल के गुरुवायूर मंदिर में सबसे अधिक हाथी, भक्तों ने भगवान गुरुवायूरप्पम को किए हैं दान, जानें किस मंदिर में कितने हाथी?

केरल के गुरुवायूर मंदिर में सबसे अधिक हाथी, भक्तों ने भगवान गुरुवायूरप्पम को किए हैं दान, जानें किस मंदिर में कितने हाथी?


Guruvayur Temple Elephants: भारत के कई मंदिरों में भक्त सोना, चांदी और दूसरी कीमती चीजें दान करते हैं, लेकिन केरल के गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर की एक खास परंपरा है. यहां भक्त भगवान गुरुवायूरप्पन को हाथी भी भेंट करते रहे हैं. इन हाथियों को मंदिर के धार्मिक आयोजनों में शामिल किया जाता है और उनके रहने के लिए अलग जगह बनाई गई है. गुरुवायूर मंदिर से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित पुन्नाथुर कोट्टा को हाथियों के इसी ठिकाने के रूप में जाना जाता है.

इसे अनक्कोट्टा यानी हाथियों का किला भी कहते हैं. हालांकि, इतने विशाल जानवरों को रखना सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उनकी खुराक, सेहत और देखभाल से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी भी है.

गुरुवायूर मंदिर में कितने हाथी हैं?

केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायूर मंदिर में हाथियों को दान करने की परंपरा काफी पुरानी है. मंदिर के हाथियों को पुन्नाथुर अनक्कोट्टा में रखा जाता है. पहले यहां हाथियों की संख्या 60 से ज्यादा हुआ करती थी, लेकिन अब यह काफी कम हो गई है.

जुलाई 2026 में केरल हाई कोर्ट से जुड़े मामले की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परिसर में 39 हाथी थे. वहीं, जुलाई 2026 की एक अन्य रिपोर्ट में इनकी संख्या करीब 38 बताई गई. इससे साफ है कि हाथियों की संख्या समय के साथ कम होती रही है.

हाथियों की देखभाल कैसे होती है?

हाथियों की देखभाल में उनकी खुराक, नहाने, साफ-सफाई और सेहत का खास ध्यान रखना पड़ता है. उनके साथ महावत यानी हाथियों की देखभाल और उन्हें संभालने वाले लोग रहते हैं. हाथियों को मंदिर के धार्मिक आयोजनों और त्योहारों में भी शामिल किया जाता है.

हालांकि, इनकी देखभाल को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं. जुलाई 2026 में केरल हाई कोर्ट ने हाथियों की बेहतर देखभाल के लिए कई अंतरिम निर्देश दिए. इनमें सुरक्षित पीने का पानी, सही मात्रा में पौष्टिक भोजन, साफ जगह, नियमित नहाने की व्यवस्था और रहने के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध कराने जैसी बातें शामिल थीं. कोर्ट ने सामान्य परिस्थितियों में लोहे की जंजीरों की जगह सूती रस्सियों जैसे ऑप्शन्स अपनाने के भी निर्देश दिए.

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गुरुवायूर के हाथियों से जुड़ी रोचक बातें

दान करने की खास परंपरा: भक्त भगवान गुरुवायूरप्पन को हाथी भेंट करते रहे हैं. मलयालम में इस परंपरा को ‘नदयिरुथल’ कहा जाता है. हालांकि, अब हाथियों को दान करने और उनके मालिकाना हक से जुड़े नियमों के कारण यह पहले की तरह आसान नहीं है.

गुरुवायूर केसवन की कहानी: मंदिर का हाथी गुरुवायूर केसवन बेहद मशहूर रहा है. वह 1922 से 1976 तक मंदिर की गतिविधियों से जुड़ा रहा. उसकी याद में आज भी श्रद्धालुओं के बीच खास सम्मान देखने को मिलता है.

हाथियों का ऐतिहासिक ठिकाना: पुन्नाथुर कोट्टा पहले एक स्थानीय राजा का महल था. बाद में इसके परिसर को गुरुवायूर मंदिर के हाथियों के रहने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा. इसी वजह से इसे हाथियों का किला भी कहा जाता है.



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