इंदौर की नौकरी को कहा अलविदा, पोस्ट ग्रेजुएट विवेक गोस्वामी ने 8 एकड़ में उगाईं 12 से 13 तरह की फसलें

इंदौर की नौकरी को कहा अलविदा, पोस्ट ग्रेजुएट विवेक गोस्वामी ने 8 एकड़ में उगाईं 12 से 13 तरह की फसलें


Multi Crop Farming: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के विवेक गोस्वामी ने इंदौर में प्राइवेट जॉब को नमस्ते करते हुए 8 एकड़ अपने खेत में बैगन, मिर्च, धान, अमरूद, कटहल, मूली सहित कुल 12 से 13 प्रकार की फसल और सब्जी लगाए हैं, जिसमें लाखों रुपए की लागत लगी है. ऐसे में इंदौर में दो साल मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करने के बाद अपना कंप्यूटर का करोबार शुरू किया. फिर दूसरे लोगों को खेती करते हुए देखा तो खेती को अपना करियर चुना और आज बहुवर्गीय खेती से एक अलग पहचान बनाई है. विवेक ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बहुवर्गिय खेती का असली राज बताया, देखिए ये रिपोर्ट…

8 एकड़ में 12 से 13 प्रकार की फसलें
विवेक गोस्वामी के खेत में फिलहाल लगभग 12 से 13 प्रकार के पौधे और फसलें लगी हुई है. इनमें दो एकड़ में बैंगन, दो एकड़ में धान, एक एकड़ में सेमी और एक एकड़ में मिर्च की खेती की जा रही ह. इसके अलावा मूली, पत्तागोभी, पालक भाजी और दूसरी हरी सब्जियां भी लगाई गई हैं. खेत में अमरूद और कटहल समेत कई फलदार पौधे भी हैं, जिनसे आने वाले समय में फल मिलने लगेंगे. विवेक के मुताबिक, सभी फसलों को एक साथ नहीं लगाया गया है, बल्कि उनकी जरूरत और उत्पादन अवधि के अनुसार अलग-अलग समय पर रोपाई की गई है. बैंगन और मिर्च की फसल को लगभग चार महीने हो चुके हैं, जबकि सेमी की फसल करीब डेढ़ से दो महीने पुरानी है. मूली और हरी सब्जियों की खेती हाल ही में शुरू की गई है.

एक फसल में नुकसान हुआ तो दूसरी से होगी भरपाई
विवेक गोस्वामी ने बहुवर्गीय खेती अपनाने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि मौसम में बदलाव और दूसरी मौसमी समस्याओं के कारण किसी एक फसल में नुकसान होने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में अगर किसान केवल एक ही फसल पर निर्भर रहता है, तो उसे बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसी जोखिम को कम करने के लिए उन्होंने एक ही खेत में कई प्रकार की फसलें लगाने का फैसला किया. उनका मानना है कि अगर किसी एक फसल से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, तो दूसरी फसलों से होने वाली आमदनी नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकती है. इससे किसान की मूल पूंजी को सुरक्षित रखने में भी सहूलियत मिल सकती है.

सिंचाई के लिए सोलर पंप का इस्तेमाल
खेती में सिंचाई की जरूरत को पूरा करने के लिए विवेक ने अपने खेत में सोलर पंप और सोलर पैनल की व्यवस्था की है. इसके माध्यम से दिन के समय फसलों की सिंचाई की जाती है सौर ऊर्जा का उपयोग खेती में ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने का एक विकल्प है, जिससे किसान अपनी सिंचाई व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बना सकते हैं.

ग्राफ्टेड पौधों से आधुनिक खेती की ओर कदम
विवेक अपने खेत में आधुनिक कृषि तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके खेत में बैंगन, अमरूद और कटहल समेत कुछ पौधे ग्राफ्टेड यानी कलम विधि से तैयार किए गए हैं. कुछ मिर्च के पौधे भी ग्राफ्टेड हैं, जबकि अन्य पौधे सामान्य तरीके से लगाए गए हैं. इस तरह वे पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने खेत में अलग-अलग फसलों का उत्पादन कर रहे हैं.

इंदौर में नौकरी और कारोबार के बाद खेती को बनाया करियर
विवेक गोस्वामी की खेती तक पहुंचने की कहानी भी दिलचस्प है. उन्होंने एमकॉम तक पढ़ाई की और इसके बाद इंदौर की एक मल्टीनेशनल कंपनी टेलीपरफॉर्मेंस में लगभग दो साल नौकरी की नौकरी के बाद उन्होंने कंप्यूटर से जुड़ा अपना कारोबार शुरू किया और करीब 15 साल तक इस क्षेत्र में काम किया. हालांकि, बाद में उनका रुझान खेती की ओर बढ़ने लगा वे पहले टाऊ, मड़िया और धान जैसी फसलों की खेती भी करते थे. धीरे-धीरे खेती में रुचि बढ़ने और यहां के वातावरण को अनुकूल महसूस करने के बाद उन्होंने इसे अपना पूर्णकालिक पेशा बनाने का फैसला किया.

खेती में विविधता ही विवेक का नया प्रयोग
विवेक गोस्वामी का यह प्रयास बताता है कि खेती में केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों को अपनाना जोखिम प्रबंधन का एक विकल्प हो सकता है. हालांकि, बहुवर्गीय खेती की सफलता मिट्टी, मौसम, पानी, बाजार और उत्पादन लागत जैसे कारकों पर भी निर्भर करती है. ऐसे में फसल चयन और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है. अंबिकापुर के विवेक गोस्वामी ने नौकरी और कारोबार से अलग रास्ता चुनते हुए खेती को अपनी पहचान बनाया है. अब उनका आठ एकड़ का खेत अलग-अलग फसलों के जरिए एक ऐसी कृषि पद्धति का उदाहरण बन रहा है, जिसमें विविधता के साथ बेहतर संभावनाएं तलाशने की कोशिश की जा रही है.



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