Nainital Zoo: इंसानों की तरह बाघ और गुलदार भी करते हैं डाइटिंग, जानिए मंगलवार को नैनीताल जू में क्यों रोका जाता है खाना

Nainital Zoo: इंसानों की तरह बाघ और गुलदार भी करते हैं डाइटिंग, जानिए मंगलवार को नैनीताल जू में क्यों रोका जाता है खाना


गौरव जोशी/ नैनीताल: सेहत बनाने और शरीर को फिट रखने के लिए आपने इंसानों को डाइटिंग करते तो खूब देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी बाघ और गुलदार को डाइटिंग करते देखा है? उत्तराखंड के नैनीताल चिड़ियाघर में बाघ और गुलदार की फिटनेस बनाए रखने के लिए उनके खानपान का खास ध्यान रखा जाता है. यहां इन मांसाहारी वन्यजीवों को सप्ताह में एक दिन भोजन नहीं दिया जाता. मंगलवार को इनका डाइटिंग डे होता है. इसके पीछे उद्देश्य उनकी पाचन क्रिया को व्यवस्थित रखना और शरीर में अनावश्यक चर्बी बढ़ने से रोकना है. जंगल में शिकार की तलाश में कई किलोमीटर तक घूमने वाले इन वन्यजीवों की दिनचर्या चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर में बदल जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए इनका डाइट चार्ट तैयार किया जाता है.

नैनीताल चिड़ियाघर के चिकित्सक डॉ. हिमांशु पांगती के मुताबिक, चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर में रहने वाले बाघ और गुलदार को सेंट्रल जू अथॉरिटी के निर्धारित नियमों के आधार पर भोजन दिया जाता है. जंगल में इन मांसाहारी जानवरों को शिकार की तलाश में लगातार सक्रिय रहना पड़ता है. भोजन पाने के लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. इसके उलट चिड़ियाघर में उनका मूवमेंट बाड़े तक सीमित रहता है और उन्हें नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जाता है. ऐसे में उनकी शारीरिक गतिविधियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर भोजन की मात्रा तय की जाती है.

जंगल में शिकार, चिड़ियाघर में तय डाइट

जंगल में बाघ और गुलदार अपनी जरूरत के अनुसार शिकार करते हैं. शिकार की तलाश में घूमने और अपनी प्राकृतिक गतिविधियों के कारण उनका शरीर सक्रिय रहता है. वहीं, चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर में रहने वाले वन्यजीवों को भोजन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता. उन्हें निर्धारित मात्रा में मांस उपलब्ध कराया जाता है. ऐसे में उनकी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए खानपान का संतुलन जरूरी होता है. चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, सप्ताह में पांच दिन इन वन्यजीवों को गोश्त और एक दिन चिकन दिया जाता है. सातवें दिन उन्हें भोजन नहीं दिया जाता. इस व्यवस्था का उद्देश्य उनके पाचन तंत्र को व्यवस्थित रखना और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने की आशंका को कम करना है. हालांकि, वन्यजीवों की खुराक उनकी उम्र, शारीरिक स्थिति और जरूरतों के अनुरूप निर्धारित की जाती है.

बाघ को रोजाना आठ किलो तक मांस

नैनीताल चिड़ियाघर और रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर में रखे गए बाघ और तेंदुओं के लिए उनकी शारीरिक जरूरतों के हिसाब से भोजन की मात्रा तय की गई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक बाघ को रोजाना करीब आठ किलो मांस दिया जाता है. वहीं, बड़े तेंदुए की खुराक लगभग पांच किलो और छोटे तेंदुए को करीब ढाई किलो भोजन दिया जाता है. जू और रेस्क्यू सेंटर में रखे गए इन वन्यजीवों की उम्र करीब दो से 12 वर्ष के बीच बताई गई है. उनकी उम्र और शारीरिक बनावट को ध्यान में रखते हुए खानपान का प्रबंधन किया जाता है. वन्यजीवों की देखभाल में भोजन की मात्रा के साथ उनकी सेहत और दिनचर्या पर भी ध्यान दिया जाता है.

नैनीताल चिड़ियाघर में दो नर एक मादा बाघ और छह तेंदुए

नैनीताल चिड़ियाघर में वर्तमान में तीन बाघ और छह तेंदुए हैं. वहीं, रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर में एक बाघिन और गुलदार रखे गए हैं. इन वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण के करीब रखने, उनकी सेहत बनाए रखने और जरूरत के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है.चिड़ियाघर के चिकित्सक डॉ. हिमांशु पांगती बताते हैं कि वन्यजीवों के खानपान में नियमितता और संतुलन महत्वपूर्ण है. चिड़ियाघर में रहने वाले मांसाहारी जानवरों को जंगल जैसी परिस्थितियां पूरी तरह नहीं मिल पातीं. इसलिए उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भोजन की मात्रा और दिन निर्धारित किए जाते हैं.

जंगल और चिड़ियाघर में अलग-अलग होती है उम्र

नैनीताल जू के रेंजर आनंद लाल ने बताते है जंगल में रहने वाले बाघ और गुलदार को भोजन की तलाश से लेकर दूसरे प्राकृतिक संघर्षों तक कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, चिड़ियाघर में उन्हें नियमित भोजन, देखभाल और जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाता है. इसका असर उनकी औसत उम्र पर भी पड़ सकता है.जंगल में बाघ की औसत उम्र करीब 15 से 16 वर्ष और गुलदार की 14 से 15 वर्ष मानी जाती है. वहीं, चिड़ियाघर में बेहतर देखभाल और नियमित भोजन मिलने से इनकी उम्र 18 से 20 वर्ष तक पहुंच सकती है.

वन्यजीवों की सेहत के लिए जरूरी है संतुलित खानपान

चिड़ियाघर में बाघ और गुलदार की डाइटिंग का उद्देश्य केवल भोजन रोकना नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक जरूरतों के अनुरूप खानपान का प्रबंधन करना है. जंगल में जहां ये वन्यजीव शिकार की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं, वहीं चिड़ियाघर में उनकी गतिविधियां सीमित रहती हैं. ऐसे में निर्धारित डाइट चार्ट के अनुसार भोजन देना उनकी देखभाल का अहम हिस्सा है.

नैनीताल चिड़ियाघर में बाघ और गुलदार की यह दिनचर्या बताती है कि वन्यजीवों की देखभाल में केवल भरपेट भोजन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी उम्र, शारीरिक गतिविधियों और पाचन क्रिया को ध्यान में रखते हुए संतुलित आहार देना भी उतना ही जरूरी है.



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