मुस्कान की बेटी को गोद लेना क्या इतना आसान? अनाथ बच्चों के अडॉप्शन का नियम-कानून क्या है? ये फैजान कौन

मुस्कान की बेटी को गोद लेना क्या इतना आसान? अनाथ बच्चों के अडॉप्शन का नियम-कानून क्या है? ये फैजान कौन


Child Adoption Rules in India: मेरठ के नीले ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जिला अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. सौरभ राजपूत हत्याकांड में यह फैसला आया है. मुस्कान की दो बेटियां हैं. बड़ी बेटी की उम्र 7 साल की है, जो अपने ननिहाल में है. वहीं छोटी बेटी का जन्म जेल में ही हुआ. उसे परिवार अपनाने को तैयार नहीं है. पिता की हत्या हो चुकी है, जिसके आरोप में मां और उसके प्रेमी को सजा मिल गई है. अब ऐसे में छोटी बेटी के फ्यूचर को लेकर सवाल है. इसी बीच एक शख्स की एंट्री हुई है, जिसने बच्चे को गोद लेने का इरादा जाहिर किया है. ऐसा करने वाला फैजान अंसारी कौन है? और भारत में किसी बच्चे को गोद लेने का क्या कानून है?

भारत में किसी बच्चे को गोद लेने के लिए सिर्फ परिवार की सहमति या आपसी समझौता काफी नहीं है. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. अगर बच्चे के माता-पिता की मौत हो गई हो, वे लापता हों, बच्चे को छोड़ चुके हों या जेल में बंद हों तो उसकी देखभाल और गोद लेने से जुड़े नियम अलग-अलग कंडीशन के आधार पर लागू हो सकते हैं. यहां सबसे अहम बात यह है कि माता-पिता के जेल में होने का मतलब यह नहीं है कि बच्चा अपने आप गोद लेने के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध हो जाता है.

भारत में गोद लेने की प्रक्रिया खास तौर से किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) ऐक्ट, 2015 और अडॉप्शन रेगुलेशन, 2022 के तहत संचालित होती है. इसके अलावा हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम यानी कि अडॉप्शन ऐंड मेंटनेंस ऐक्ट 1956 के तहत भी कुछ परिस्थितियों में गोद लेने की व्यवस्था है. आइए समझते हैं कि कानून क्या कहता है और अलग-अलग परिस्थितियों में बच्चे की जिम्मेदारी किसे मिल सकती है.

भारत में बच्चा गोद लेने का कानून क्या है?

भारत में बच्चों को गोद लेने के लिए दो प्रमुख कानूनी इंतजाम हैं.

  1. किशोर न्याय ऐक्ट, 2015: यह अनाथ, छोड़े हुए बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लेने की व्यवस्था करता है. इस कानून के तहत रिश्तेदार भी बच्चे को गोद ले सकते हैं. रिश्तेदारों की तरफ से गोद लेने की प्रक्रिया धर्म से स्वतंत्र होकर अपनाई जा सकती है.
  2. हिंदू दत्तक और भरण-पोषण ऐक्ट, 1956: यह हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख सहित कानून के दायरे में आने वाले लोगों के बीच अडॉप्शन को नियंत्रित करता है. इसमें बच्चे को गोद देने, गोद लेने वाले व्यक्ति की पात्रता और अन्य शर्तों के प्रावधान हैं.

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 56 गोद लेने की व्यवस्था से संबंधित है, जबकि धारा 61 के तहत जिला मजिस्ट्रेट गोद लेने का आदेश जारी करने से पहले बच्चे के कल्याण और अन्य जरूरी पहलुओं पर विचार करता है.

अनाथ या छोड़े हुए बच्चों पर क्या नियम?
कोई बच्चा अगर अनाथ या लावारिस है या उसे बाल कल्याण समिति (CWC) की तरफ से कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित कर दिया गया है, तो उसे केवल CARA के आधिकारिक पोर्टल CARINGS के माध्यम से ही गोद लिया जा सकता है.

  • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: बच्चे को गोद लेने के इच्छुक माता-पिता को CARA की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है.
  • डॉक्युमेंट और होम स्टडी: इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं की तरफ से घर का सर्वे किया जाता है और कानूनी पात्रता की जांच होती है.
  • डीएम का आदेश: नए संशोधनों के अनुसार अब अदालत के चक्कर काटने की बजाय जिला मजिस्ट्रेट की तरफ से गोद लेने का अंतिम आदेश जारी किया जाता है, जिसके बाद बच्चा कानूनी रूप से नए माता-पिता का हो जाता है.

अगर बच्चे के माता-पिता जेल में कैद हों तो क्या नियम हैं?

किसी बच्चे के माता-पिता जीवित हैं लेकिन वे किसी आपराधिक मामले में जेल में सजा काट रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में बच्चे को सीधे तौर पर कोई भी गोद नहीं ले सकता है. इसके लिए कानून में खास प्रावधान हैं.

  • सरेंडर या कस्टडी के नियम: जेल में बंद माता-पिता अगर अपनी मर्जी से बच्चे की परवरिश करने में असमर्थ हैं और वे अपनी मर्जी से बच्चे को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने सरेंडर करना चाहते हैं, तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है. कानून के मुताबिक माता-पिता को काउंसलिंग के बाद सोचने के लिए तय समय यानी कानूनी तौर पर कूलिंग पीरियड दिया जाता है.
  • चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट्स: अगर माता-पिता जेल में हैं और बच्चे की देखभाल करने वाला कोई अन्य पारिवारिक सदस्य नहीं है, तो जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) उस बच्चे को अपने संरक्षण में लेती है.
  • कानूनी घोषणा: यदि माता-पिता जेल से बच्चे की देखभाल करने या मिलने से पूरी तरह असमर्थ रहते हैं और कानूनन बच्चे को त्याग दिया गया माना जाता है, तो CWC की तरफ से जांच के बाद बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जा सकता है. इसके बाद ही CARA के माध्यम से वैध माता-पिता को बच्चा सौंपा जाता है.
  • रिश्तेदारों की तरफ से गोद लेना: अगर माता-पिता जेल में हैं और परिवार का कोई करीबी रिश्तेदार जैसे चाचा-चाची, दादा-दादी या नाना-नानी उस बच्चे को गोद लेना चाहता है तो हिंदू कानून (HAMA) या कानूनी गार्जियन के प्रावधानों के तहत माता-पिता की सहमति या जेल प्राधिकारियों के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया से बाल कल्याण समिति और अदालत की अनुमति से यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.

बच्चा गोद लेने की पूरी प्रक्रिया क्या है?

अगर कोई व्यक्ति कानूनी रूप से बच्चा गोद लेना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया अपनानी चाहिए.

  1. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: सामान्य दत्तक ग्रहण के इच्छुक लोगों को CARA के ऑनलाइन पोर्टल CARINGS पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. पोर्टल का पता है: https://carings.wcd.gov.in/
  2. डॉक्युमेंट की जांच: आवेदक को निर्धारित दस्तावेज जमा करने होते हैं. इनमें पहचान, निवास, वैवाहिक स्थिति, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज शामिल हो सकते हैं.
  3. होम स्टडी रिपोर्ट: संबंधित व्यवस्था के माध्यम से यह आंकलन किया जाता है कि आवेदक बच्चे को सुरक्षित और जरूरी पारिवारिक माहौल दे पाएगा या नहीं.
  4. बच्चे का चयन और मिलान: कानूनी रूप से गोद दिए जाने योग्य घोषित बच्चे के मामले में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बच्चे और संभावित दत्तक माता-पिता का मिलान किया जाता है. बच्चे के हित को प्राथमिकता दी जाती है.
  5. कानूनी आदेश: अडॉप्शन के लिए निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट संबंधित कानून के तहत आदेश जारी करता है. किशोर न्याय अधिनियम की धारा 61 के अनुसार,अडॉप्शन की कार्यवाही सामान्य तौर पर आवेदन दाखिल होने की तारीख से दो महीने के अंदर निपटाई जानी चाहिए.

कौन हैं फैजान?
फैजान अंसारी मुंबई में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और ब्रांड प्रमोटर हैं, जो अक्सर बॉलीवुड से जुड़ी खबरों, सेलिब्रिटी पर बयानों और चर्चित मामलों पर अपनी रिएक्शन देकर चर्चा में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने मेरठ जिला अदालत में एक याचिका दायर कर हत्या की दोषी मुस्कान की 10 महीने की बेटी की परवरिश, शिक्षा और उसके पालन-पोषण का सारा खर्च उठाने की इच्छा जताई है.



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