पंचायत चुनाव: चूरू पंचायत चुनाव में राजेंद्र राठौड़ के परिवार की एंट्री, बहू-बेटे ने ठोकी ताल, भरा नामांकन का पर्चा

पंचायत चुनाव: चूरू पंचायत चुनाव में राजेंद्र राठौड़ के परिवार की एंट्री, बहू-बेटे ने ठोकी ताल, भरा नामांकन का पर्चा


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Rajasthan Panchayat Election Rajendra Rathore Family Entry: राजस्थान पंचायत चुनाव में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के परिवार की एंट्री हो गई है. चूरू जिला परिषद सदस्य पद के लिए उनकी बहू कनिका सिंह और बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ ने भाजपा के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है. दोनों ने 21 अक्टूबर को अलग-अलग वार्डों से पर्चा भरा. कनिका सिंह वार्ड संख्या 23 और पराक्रम सिंह वार्ड संख्या 39 से चुनाव लड़ रहे हैं. पराक्रम चूरू भाजपा कार्यकारिणी में महामंत्री हैं. वहीं, कनिका हाल ही में राजस्थान फुटबॉल क्लब की स्थापना को लेकर चर्चा में रही हैं. दोनों के एक साथ चुनाव मैदान में उतरने से चूरू की स्थानीय राजनीति में राठौड़ परिवार की भूमिका चर्चा का विषय बन गई है. जिला परिषद सदस्य पद के लिए कुल 20 नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं.

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राजस्थान पंचायत चुनाव में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के परिवार की हुई एंट्री

चूरू: राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का परिवार भी चुनावी मैदान में उतर आया है. चूरू जिला परिषद सदस्य पद के लिए राजेंद्र राठौड़ की पुत्रवधू कनिका सिंह और उनके बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ ने नामांकन दाखिल किया है. दोनों पति-पत्नी भाजपा के टिकट पर अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रहे हैं. 21 अक्टूबर को दोनों ने अपने नामांकन पत्र जमा किए. इसके बाद चूरू की स्थानीय राजनीति में राठौड़ परिवार की चुनावी भागीदारी चर्चा का विषय बन गई है. जिला परिषद सदस्य पद के लिए वार्ड संख्या 23 से कनिका सिंह और वार्ड संख्या 39 से पराक्रम सिंह राठौड़ ने पर्चा भरा है.

बता दें कि राजेंद्र राठौड़ राजस्थान की राजनीति में प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं. ऐसे में उनके परिवार के दो सदस्यों का एक साथ जिला परिषद चुनाव में उतरना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, चुनाव में दोनों प्रत्याशियों का प्रदर्शन कैसा रहता है, यह आने वाले समय में मतदाताओं के रुख और स्थानीय चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा. इस चुनाव में दोनों की उम्मीदवारी को भाजपा की स्थानीय राजनीति और चूरू जिले के सियासी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

चूरू जिला परिषद के अलग-अलग वार्डों से भरा नामांकन

चूरू जिला परिषद सदस्य पद के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल 20 नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत किए गए. इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल रहे. भाजपा ने वार्ड संख्या 23 से कनिका सिंह और वार्ड संख्या 39 से पराक्रम सिंह राठौड़ को मैदान में उतारा है. दोनों ने 21 अक्टूबर को नामांकन दाखिल कर चुनावी प्रक्रिया में अपनी दावेदारी पेश की. अब चुनाव में दोनों प्रत्याशियों के सामने अपने-अपने वार्ड में मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की चुनौती होगी.

कौन हैं कनिका सिंह राठौड़?

कनिका सिंह मूल रूप से चूरू जिले के सरदारशहर क्षेत्र के हरपालसर गांव की रहने वाली हैं और वर्तमान में जयपुर में रहती हैं. उन्होंने वर्ष 2007 में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी. कनिका सिंह हाल ही में राजस्थान फुटबॉल क्लब की स्थापना को लेकर भी चर्चा में रही हैं. अब उन्होंने राजनीति में चुनावी मैदान में उतरकर जिला परिषद सदस्य पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. कनिका सिंह वार्ड संख्या 23 से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. उनके सामने अपने वार्ड में जनसमर्थन जुटाने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती होगी. उनके चुनाव लड़ने को राठौड़ परिवार की राजनीतिक सक्रियता बढ़ने के तौर पर भी देखा जा रहा है.

भाजपा संगठन में महामंत्री हैं पराक्रम सिंह राठौड़

राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ चूरू भाजपा कार्यकारिणी में महामंत्री के पद पर हैं. वे इससे पहले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चा में आए थे. सितंबर 2026 में उन्होंने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया था. अब वे वार्ड संख्या 39 से भाजपा के टिकट पर जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं. पराक्रम सिंह और उनकी पत्नी कनिका सिंह का एक साथ अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ना चूरू जिले की राजनीति में खास चर्चा का विषय बना हुआ है. पंचायत चुनाव में अब दोनों प्रत्याशियों की नजर अपने-अपने क्षेत्र में समर्थन जुटाने पर होगी. आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और स्थानीय मुद्दों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों प्रत्याशी अपने वार्डों में किस तरह का जनसमर्थन हासिल कर पाते हैं.



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