कौन हैं माता हासी देवी? जिनका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जारी किया 200 रुपए का स्मारक सिक्का

कौन हैं माता हासी देवी? जिनका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जारी किया 200 रुपए का स्मारक सिक्का


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Mata Hasi Devi: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने माता हासी देवी के सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का और खास डाक टिकट भी जारी किया है. उनकी 200वीं जयंती पर उन्हें सम्मान दिया गया है. वह सिंधी समाज की प्रमुख संत थीं और हमेशा से ही समाज के कल्याण के लिए काम किया. उन्होंने शदाणी दरबार के पीठाधीश्वर के रूप में करीब 57 साल तक सेवा की.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जारी किया 200 रुपए का स्मारक सिक्का

Mata Hasi Devi: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ के दो दिनों के दौरे पर पहुंची हैं. वह बस्तर दशहरा में भी शामिल होंगी. इससे पहले राष्ट्रपति ने लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में माता हासी देवी के सम्मान में दो सौ रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया. अधिकारियों ने बताया कि इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद रहे.

सिंधी विभूति के सम्मान में जारी हुआ सिक्का
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर उन्हें सम्मान में भारत सरकार ने दो सौ रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया गया है. अफसरों की तरफ से बताया गया है कि सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी किया जाना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका था. यह देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों के लिए गर्व का विषय है.

सिक्के के एक तरफ माता हासी देवी और दूसरी अशोक स्तंभ का सिंह का मौजूद
स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग यूनिट के माध्यम से बुक करा सकेंगे. भारत सरकार द्वारा जारी इस खास सिक्के पर पूज्य माता हासी देवी जी की छवि अंकित है. सिक्के के एक ओर अशोक स्तंभ का सिंह और 200 रुपए को दिखाया गया है. इस स्मारक सिक्के के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है.

कौन हैं माता हासी देवी?
माता हासी देवी का जन्म 1826 में सिंध राज्य में हुआ था. वह सिंधी समाज की महान विभूति थी. वह रायपुर में मौजूद शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश थीं. बताया जाता है कि वह 26 साल की उम्र में शदाणी दरबार की पहली महिला पीठाधीश्वर बनीं. उनका मन हमेशा से ही भक्ति और सेवा में लगता था. हिंदी, संस्कृत और संगीत की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने काफी काम किया. वह लाखों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रही हैं. उन्होंने अन्न भंडार से काफी लोगों को मदद की थी. बाद में उन्होंने 30 अप्रैल 1909 को अपनी देह त्याग दी थी.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिनों के बस्तर के दौरे पर हैं. वह रायपुर के इंडोर स्टेडियम में नुआखाई त्योहार के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रमों में शामिल होंगी. इसके अलावा बस्तर जिले के मुरिया दरबार में भी शामिल होंगी.

(भाषा इनपुट के साथ)



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