लेना है तो ले नहीं तो दफा हो’, 10 रुपये के फटे नोट पर कस्टमर ने मारा तमाचा, डिलीवरी बॉय ने रोते हुए पिया जहर, मौत

लेना है तो ले नहीं तो दफा हो’, 10 रुपये के फटे नोट पर कस्टमर ने मारा तमाचा, डिलीवरी बॉय ने रोते हुए पिया जहर, मौत


नई दिल्ली: कभी-कभी छोटी-सी बात पर इंसान इतना गुस्सा हो जाता है कि उसे सही और गलत का फर्क ही याद नहीं रहता. कुछ रुपये का नुकसान हो या किसी बात पर असहमति, क्या इसके लिए किसी के साथ मारपीट करना सही है?

पूर्वी दिल्ली में एक फटे हुए नोट को लेकर हुआ विवाद कुछ ऐसे ही सवाल खड़े करता है. सामान पहुंचाने गए 24 साल के समीर हुसैन ने जब फटा नोट लेने से इनकार किया, तो आरोप है कि दो लोगों ने उनके साथ मारपीट की. बाद में समीर ने जहरीला पदार्थ खा लिया और 20 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई. इस घटना ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर छोटी-छोटी बातों पर हमारा गुस्सा इतना हावी क्यों हो जाता है?

अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को इस घटना की जानकारी दी. पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोप भी जोड़ दिया है. पुलिस के अनुसार, समीर पर 4 अक्टूबर की रात पूर्वी विनोद नगर के दो निवासियों ने कथित तौर पर हमला किया था. समीर ने फटा हुआ नोट स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद दोनों ने उनके साथ मारपीट की.

आखिर छोटी-सी बात पर इतना गुस्सा क्यों?

रोजमर्रा की जिंदगी में पैसों को लेकर बहस होना कोई नई बात नहीं है. कभी दुकानदार और ग्राहक के बीच कहासुनी हो जाती है, तो कभी लेन-देन को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है. लेकिन किसी बात पर सहमत न होने का मतलब यह नहीं कि सामने वाले के साथ बदसलूकी या मारपीट की जाए. गुस्से में लिया गया एक गलत फैसला किसी दूसरे इंसान को गहरी चोट पहुंचा सकता है. समीर के मामले में भी फटे नोट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक युवक की मौत से जुड़ गया है. हालांकि, इस घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों की जांच होना जरूरी है.

दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. उनकी पहचान राकेश उर्फ बंटी (30) और रामपाल सिंह (65) के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, 4 अक्टूबर को रात 11 बजकर 3 मिनट पर इस घटना के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को फोन आया था. समीर ने पुलिस को बताया था कि फटे नोट को लेकर उन पर हमला किया गया है.

इसके बाद देर रात समीर की चिकित्सकीय-कानूनी रिपोर्ट (एमएलसी) तैयार की गई और उसी दिन कल्याणपुरी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई. बाद में समीर ने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने घटना के बारे में अपना पक्ष बताया था.

अस्पताल में भर्ती हुए समीर, 20 अक्टूबर को हुई मौत

पुलिस को बाद में सूचना मिली कि समीर ने जहरीला पदार्थ खा लिया है. उन्हें 5 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 20 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई. एक 24 साल के युवक की मौत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है. हालांकि, समीर के इस कदम के पीछे की परिस्थितियों और घटना से उसके संबंध को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है.

समीर की मौत के बाद पुलिस ने प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 जोड़ दी, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है. इस घटना से एक अहम सवाल भी सामने आता है: क्या किसी छोटी-सी बात पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए हम सामने वाले की इज्जत, हालात और भावनाओं का ख्याल रखना भूल जाते हैं? असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे हिंसा में बदल देना किसी भी तरह से सही नहीं है.



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