Law Admission 2026: वकालत की पढ़ाई में लड़कियों का दबदबा, 5 साल में LLB में लड़कों से ज्यादा एडमिशन

Law Admission 2026: वकालत की पढ़ाई में लड़कियों का दबदबा, 5 साल में LLB में लड़कों से ज्यादा एडमिशन


Law Admission 2026: कभी वकालत को पुरुषों के दबदबे वाला पेशा माना जाता था, लेकिन अब कानून की पढ़ाई में लड़कियों की बढ़ती दिलचस्पी एक नई तस्वीर पेश कर रही है. महाराष्ट्र के लॉ कॉलेजों में इस साल हुए एडमिशन के आंकड़े भी यही कहानी बता रहे हैं. राज्य में पांच साल के एलएलबी कोर्स में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है. इस कोर्स में दाखिला लेने वाले कुल विद्यार्थियों में करीब 56 फीसदी छात्राएं हैं. खास बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार पांच वर्षीय लॉ कोर्स में छात्राओं के एडमिशन में 17.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वहीं तीन साल के एलएलबी कोर्स में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने एडमिशन लिया है. आखिर लड़कियों में कानून की पढ़ाई का क्रेज क्यों बढ़ रहा है और इसके पीछे क्या वजह है? आइए आंकड़ों से समझते हैं.

LLB कोर्स में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ा

महाराष्ट्र में इस साल पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में कुल 11,461 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है. इनमें लड़कियों की संख्या 6,397 है जबकि लड़कों की संख्या 5,063 है.इस तरह पांच साल के लॉ कोर्स में कुल एडमिशन का 55.8 फीसदी हिस्सा लड़कियों का है. वहीं लड़कों की हिस्सेदारी 44.18 फीसदी है.इन आंकड़ों से साफ है कि पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक हो गई है.यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कानून की पढ़ाई के जरिए युवा वकालत, जूडिसियरी और कानूनी क्षेत्र में अपना करियर बनाने की तैयारी करते हैं.

एक साल में 947 बढ़ गई छात्राओं की संख्या

महाराष्ट्र में पांच साल के लॉ कोर्स में लड़कियों के एडमिशन में पिछले साल के मुकाबले अच्छी बढ़ोतरी हुई है.पिछले साल इस कोर्स में कुल 5,450 छात्राओं ने दाखिला लिया था. इस साल यह संख्या बढ़कर 6,397 हो गई है यानी एक साल में पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में एडमिशन लेने वाली लड़कियों की संख्या 947 बढ़ गई है.प्रतिशत के हिसाब से देखें तो छात्राओं के एडमिशन में 17.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.यह बढ़ोतरी बताती है कि महाराष्ट्र में ज्यादा लड़कियां अब 12वीं के बाद कानून की पढ़ाई को करियर के विकल्प के रूप में चुन रही हैं.

पांच साल के लॉ कोर्स में कितनी सीटें थीं?

महाराष्ट्र में इस साल पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स के लिए कुल 13,454 सीटें उपलब्ध थीं.इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस (EWS) के उम्मीदवारों और जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल थीं.इन सीटों के मुकाबले कुल 11,461 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया. इस तरह पांच वर्षीय लॉ कोर्स में उपलब्ध सीटों का करीब 85.2 फीसदी हिस्सा भर गया.इस कोर्स में कुल एडमिशन के मामले में लड़कियां आगे रहीं.

LLB कोर्स में भी एडमिशन की भारी मांग

महाराष्ट्र में केवल पांच वर्षीय एलएलबी ही नहीं, बल्कि तीन साल के लॉ कोर्स की भी काफी मांग दिखाई दे रही है.इस साल राज्य में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स के लिए कुल 23,468 सीटें उपलब्ध थीं.इनमें से 22,536 सीटों पर विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है यानी तीन साल के एलएलबी कोर्स की करीब 96 फीसदी सीटें भर गई हैं. इस कोर्स में सिर्फ 932 सीटें खाली रह गईं.ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कानून की पढ़ाई को लेकर विद्यार्थियों की दिलचस्पी बनी हुई है.

LLB में कितनी महिलाओं ने लिया एडमिशन?

महाराष्ट्र में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स में इस साल कुल 8,346 महिलाओं ने एडमिशन लिया है.यह संख्या इस कोर्स में हुए कुल दाखिलों का 37.04 फीसदी है हालांकि तीन साल के एलएलबी कोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी पांच साल के कोर्स के मुकाबले कम है.पांच वर्षीय एलएलबी में जहां 55.8 फीसदी एडमिशन लड़कियों के हैं वहीं तीन वर्षीय एलएलबी में महिलाओं की हिस्सेदारी 37.04 फीसदी है.इस तरह दोनों कोर्स के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई देता है.

दोनों LLB कोर्स मिलाकर 14,743 महिलाओं ने लिया दाखिला

महाराष्ट्र में इस साल तीन वर्षीय और पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में एडमिशन लेने वाली महिलाओं की कुल संख्या 14,743 है.इनमें पांच साल के कोर्स में 6,397 और तीन साल के कोर्स में 8,346 महिलाओं ने एडमिशन लिया है.यह संख्या राज्य में कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी को दिखाती है.खास तौर पर पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में लड़कियों का बहुमत इस बदलाव को और महत्वपूर्ण बनाता है.

लड़कियां क्यों चुन रही हैं वकालत की पढ़ाई?

महाराष्ट्र में लॉ कोर्स में छात्राओं की बढ़ती संख्या के पीछे करियर और आर्थिक सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है.रिजवी कॉलेज के प्रिंसिपल साजन पाटिल के मुताबिक महाराष्ट्र में कानून की पढ़ाई के लिए महिलाओं के एडमिशन में आई तेज बढ़ोतरी एक बड़े सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करती है.उनका कहना है कि महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने, करियर में स्थिरता हासिल करने और समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए कानून की पढ़ाई को महत्व दे रही हैं यानी कानून की डिग्री को अब केवल वकालत करने तक सीमित नहीं देखा जा रहा है. छात्राएं इसे अपने करियर और भविष्य को बेहतर बनाने के एक रास्ते के रूप में भी देख रही हैं.



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