गुरु नानक देव के ज्येष्ठ पुत्र श्री चंद भगवान ने दिखाए कई चमत्कार, उदासीन संप्रदाय में 149 वर्षों से जीवित, जानें मान्यता

गुरु नानक देव के ज्येष्ठ पुत्र श्री चंद भगवान ने दिखाए कई चमत्कार, उदासीन संप्रदाय में 149 वर्षों से जीवित, जानें मान्यता


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Mau News: मऊ में उदासीन संप्रदाय के आचार्य जगतगुरु श्री चंद भगवान के 149 वर्षों के जीवन और चमत्कारों की चर्चा है. गुरु नानक देव के ज्येष्ठ पुत्र श्री चंद भगवान ने कई चमत्कार दिखाए और आज भी समाज उन्हें जीवित आचार्य माना जाता है. वह उदासीन संप्रदाय को केवल दिशा ही नहीं बल्कि मानव समाज के लिए उन्होंने बहुत कल्याणकारी काम किए हैं. अपने एकदम त्यागी रहकर के समाज को उन्होंने दिशा दी है.

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मऊः 149 वर्षों तक उदासीन संप्रदाय का नेतृत्व करने वाले उदासीन आचार्य जगतगुरु श्री श्री चंद्र भगवान की कहानी ही अलग है. यह ऐसे चमत्कारी तपस्वी थे जो देखते ही देखते अदृश्य हो गए, जिन्हें आज भी उदासीन संप्रदाय के लोग इन्हें जीवित मानकर आचार्य मानते हैं और आज भी उन्हीं के निर्देशों का पालन करते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए उदासीन संगत आश्रम के महंत सत्यनाम दास बताते हैं कि उनके गुरु परंपरा में 165 में आचार्य थे. उनके प्रथम गुरु ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनक सनन्दन सनातन सनत कुमार सिंह परंपरा चली और उदासीन आचार्य जगतगुरु श्री चंद भगवान जो गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ पुत्र थे, यहां तक आकर आश्रित्व बदलते रहे और आज भी वह उदासीन संगत समाज के आचार्य के रूप में माने जाते हैं.

विदेशों में भी बनाए मंदिर

देश के साथ-साथ विदेश में भी कई जगह पर उनकी मंदिर स्थापित है. भगवान उदासीन आचार्य श्री चंद के तमाम चमत्कार रहे हैं, वह उदासीन संप्रदाय को केवल दिशा ही नहीं बल्कि मानव समाज के लिए उन्होंने बहुत कल्याणकारी काम किए हैं. अपने एकदम त्यागी रहकर के समाज को उन्होंने दिशा दी है. चमत्कारों में देखा जाए तो सबसे लास्ट जो बड़ा चमत्कार था उनके हिमाचल प्रदेश में रवि नदी के पास चंबा क्षेत्र में और नदी पार करें और एक तरफ पूरा जंगल था तो भगवान नदी के पास पहुंचे और जंगल में जाने के लिए उन्होंने एक नाविक से कहा जब तक नाव अपनी आगे बढ़ा चुका था.

महंत ने अपने जीवन काल में दिखाएं हैं कई चमत्कार

महंत के बताए गए अनुसार के द्वारा नाविक ने तपस्वी श्री चंद भगवान से कहा कि आप तो महंत है आपको नाम की क्या जरूरत है आप तो कहीं से पार कर जाएंगे. फिर उन्होंने अपना चिमटा उठाया और कहा कि मुझे इस नदी को पार कर दो. फिर वह शीला पानी में तैरते हुए नदी को पार करा दी. नदी पार करते ही वह जंगल में अदृश्य हो गए इसलिए उनका कोई पार्थिव शरीर ना मिलने की वजह से आज भी संगत उदासीन समाज उन्हें अपना आचार्य मानती है. उनके आदेशों का पालन करते हुए कार्यों को करती है. जिस शीला से वह तैरते हुए नदी को पर किए थे आज भी संगत उदासीन समाज के लोग उस शीला का पूजा पाठ करते हैं. हालांकि आचार्य पद उनका तभी हटेगा जब वह इस्तीफा दे या उनका शरीर पूरा हो. ना अब तक वह इस्तीफा दिए हैं और ना ही उनका शरीर पूरा हुआ है. इस वजह से आज भी उनके समाज उन्हें अपना आचार्य मानती है.

तपस्या से कुआं से मीठे पानी को है निकाला

हालांकि उनके आम लोगों के बीच में कई चमत्कार पूरे देश में रहे है, चाहे जम्मू कश्मीर हो,चाहे वह गुजरात, द्वारकापुरी, चाहे जगन्नाथ पुरी हो या पंजाब का क्षेत्र हो. वह हर जगह अपना अलग-अलग चमत्कार दिखाए हैं .श्री श्री जगतगुरु चंद्र भगवान 149 वर्षों तक बाल रूप में ही लोगों की जनमानस की सेवा करते रहे हैं. चमत्कार में वह में भगवान अपना धोना लगाए हुए थे तो वहां के नर नारी सब प्रणाम किया और बोले भगवान मेरे पास में मीठा पानी नहीं है महाराज तो भगवान ने सब पर कृपा करके वहां अपने शंकर के द्वारा गार्ड करके मीठा जल उत्पन्न किया जो कुआं आज भी वहां पर है. द्वारका के नीचे पानी का सप्लाई का मुख्य केंद्र है इसका महंत जाकर के दर्शन भी किए हैं और मीठा जल भी ग्रहण किए है. जम्मू कश्मीर में सूखे पेड़ को उन्होंने हरा कर दिया था. ऐसे ऐसे उन्होंने कई चमत्कार की जिसके वजह से संगत उदासीन संप्रदाय के लोगों को अपना आचार्य मानकर आज भी उनका पूजा पाठ करते हैं.



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