दशहरा पर सोना-चांदी हुआ महंगा, 24K गोल्ड का कितना है रेट, खरीदारी से पहले करें
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20 अक्टूबर को दशहरा के मौके पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली. सोना 0.08% बढ़कर 4,163 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.56% उछलकर 57 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. इस हफ्ते पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये की चाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले का कीमती मेटल्स पर असर पड़ सकता है. वहीं, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद और अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव भी बाजार की दिशा तय करेंगे.
आज 20 अक्टूबर को दशहरा के मौके पर सोने-चांदी का दाम उछल गया है. 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत 1,47,170 रुपये, 22 कैरेट के 10 ग्राम की कीमत 1,34,900 रुपये और 18 कैरेट के 10 ग्राम की कीमत 1,10,380 रुपये दर्ज की गई है. सोने का रेट इंटरनेशनल मार्केट में 0.08 फीसदी चढ़कर 4163 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है. चांदी का दाम 0.56 फीसदी उछलकर 57 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है. सोने-चांदी की खरीदारी करने का मन बना रहे हैं तो उससे पहले लेटेस्ट रेट चेक कर लें.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों पर क्या फैसला लेगा, इस पर बाजार की नजर बनी हुई है. फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने अगले हफ्ते होने वाली बैठक से पहले संकेत दिया है कि ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखा जा सकता है. उनके इस बयान के बाद ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी की संभावना घटकर 20% से नीचे आ गई है. पिछले महीने के अंत में बाजार इस संभावना को करीब 67% तक मान रहा था. ऐसे में सोने-चांदी की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है.
इस हफ्ते पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेज बदलाव देखने को मिला है. इसके अलावा, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़े भी कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाए रहे हैं. मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक, निवेशकों को इस हफ्ते इन सभी कारकों पर नजर रखनी चाहिए.
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कई एनालिस्ट के अनुसार, निवेशक इन दिनों शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, एनर्जी और अन्य कमोडिटी में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं. वहीं, बॉन्ड पर मिलने वाला ज्यादा ब्याज सोने जैसे निवेश विकल्पों को कम आकर्षक बना रहा है, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता. हालांकि, डॉलर पर निर्भरता कम होने की चिंता, सरकारों पर बढ़ता कर्ज और सरकारी खर्च को संभालने की चुनौती अब भी बड़े संस्थागत निवेशकों को सोने में निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित कर रही है.
Kitco की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लूमबर्ग के आंकड़ों में शामिल सोने की होल्डिंग अक्टूबर को इस साल के सबसे ऊंचे स्तर 101.3 मिलियन ट्रॉय औंस पर पहुंच गई. यह 20 जुलाई के 96.2 मिलियन ट्रॉय औंस के निचले स्तर से 5.3% ज्यादा है. साल की शुरुआत के मुकाबले भी इसमें करीब 2% की बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद से सोने की होल्डिंग 101 मिलियन ट्रॉय औंस से ऊपर बनी हुई है, जबकि सोने की कीमत 4,100 से 4,200 डॉलर प्रति औंस के बीच रही है. यह जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है.
कजाकिस्तान का सेंट्रल बैंक इस साल के अंत तक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 78% से घटाकर 75% करने की योजना बना रहा है. बैंक के पास फिलहाल 386 टन सोना है. इस साल के पहले आठ महीनों में उसने करीब 36 टन सोना खरीदा था और अगस्त तक वह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा सेंट्रल बैंक खरीदार था. विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका के सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा ब्याज मिलने से डॉलर में निवेश आकर्षक हो रहा है. इसलिए कजाकिस्तान का बैंक सोने की हिस्सेदारी घटाकर डॉलर से जुड़े निवेश बढ़ाना चाहता है. इसके लिए वह सोने के कुछ डील करेगा और कुछ सोना बेचेगा, ताकि उसका पूरा निवेश एक ही संपत्ति पर निर्भर न रहे.
Kitco की रिपोर्ट के अनुसार, हेरियस के विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले हफ्ते महंगाई के अनुमान से ज्यादा आंकड़े आने के बाद चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया. चांदी का भाव 60 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे गिर गया और कुछ समय के लिए 55 डॉलर के आसपास पहुंच गया, जो जुलाई के निचले स्तर के करीब है.
महंगाई बढ़ने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें फिर बढ़ाने की आशंका बढ़ गई थी. इससे अमेरिकी बॉन्ड पर ब्याज और डॉलर की कीमत में तेजी आई, जिसका असर चांदी पर पड़ा. हालांकि, अब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 30% से नीचे आ गई है. अमेरिकी बॉन्ड पर ब्याज और डॉलर भी अपने हाल के ऊंचे स्तर से नीचे आए हैं, जिससे चांदी पर दबाव कुछ कम हुआ है.