150 Year Old Jaipur Hair Salon Story

150 Year Old Jaipur Hair Salon Story


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150 Year Old Jaipur Hair Salon Story जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित 150 साल पुरानी ‘एक्सपर्ट हेयर ड्रेसर’ दुकान को 70 वर्षीय चंद्रशेखर आज भी विरासत की तरह चला रहे हैं. कभी 1 पैसे से भी कम में शेविंग देने वाली यह दुकान आज जर्जर खंडर में बदल चुकी है. आधुनिक फैशन के दौर में यहां केवल 2-4 ग्राहक ही आते हैं और परिवार में इसे बेचने को लेकर विवाद भी चल रहा है. इसके बावजूद चंद्रशेखर अपने दादा और पिता की इस ऐतिहासिक निशानी को बचाए रखने की उम्मीद में रोज दुकान का शटर खोलते हैं और कटिंग-शेविंग का काम करते हैं.

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जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक चारदीवारी बाजार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों ने अपनी पुरानी दुकानों और व्यापार को पूर्वजों की अनमोल विरासत की तरह संभाल कर रखा है. चाहे छोटा सा केबिन हो या विशाल शोरूम, लोगों ने दशकों पुरानी पहचान को आज भी जीवित रखा है. जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित गोपालजी के रास्ते में एक ऐसी ही दुकान है जिसका नाम ‘एक्सपर्ट हेयर ड्रेसर’ है. करीब 150 साल पुरानी यह सैलून की दुकान जयपुर की सबसे पुरानी हेयर सैलून दुकानों में से एक मानी जाती है. इस दुकान में प्रवेश करते ही वर्षों पुरानी यादें अपने आप ताजा हो जाती हैं.

‘लोकल-18’ से खास बातचीत करते हुए दुकान के 70 वर्षीय मालिक चंद्रशेखर ने बताया कि जब उनका जन्म भी नहीं हुआ था, तब उनके दादा रामसहाय ने इस दुकान की शुरुआत की थी. उस दौर में यह दुकान केवल 1 रुपये प्रति महीने के किराए पर ली गई थी. उस समय यहां लोगों की कटिंग और शेविंग 1 पैसे से भी कम कीमत में की जाती थी. लंबे समय तक किराए पर काम करने के बाद उनके दादाजी ने इस दुकान को खुद खरीद लिया. उनके निधन के बाद यह दुकान चंद्रशेखर के पिता बाल मुकुंद के पास आई और उन्होंने कई दशकों तक इस काम को आगे बढ़ाया.

जर्जर दीवारें, टूट चुका फर्नीचर फिर भी काम के प्रति अटूट निष्ठा
बदलते दौर और आधुनिक चमक-धमक वाले सैलून के आ जाने के कारण आज इस ऐतिहासिक दुकान की स्थिति काफी खराब हो चुकी है. दुकान की दीवारें जर्जर अवस्था में पहुंच गई हैं और पुराना लकड़ी का फर्नीचर भी टूट चुका है. भले ही आज आधुनिक सैलून के सामने यह दुकान वीरान नजर आती है, लेकिन एक समय था जब जयपुर की नामचीन हस्तियां यहां शेविंग और कटिंग कराने के लिए लाइन लगाकर खड़ी रहती थीं. आज दुकान में रोजाना केवल 2 से 4 ग्राहक ही आते हैं, फिर भी चंद्रशेखर हर सुबह पूरी निष्ठा और खुशी के साथ दुकान का शटर उठाते हैं.

पारिवारिक विवाद और विरासत को बचाने का अंतिम प्रयास
चंद्रशेखर बताते हैं कि आज के दौर में नई पीढ़ी इस पारंपरिक काम में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. परिवार के अन्य सदस्य इस दुकान को केवल एक संपत्ति के रूप में देखते हैं. दुकान से अधिक आमदनी न होने के कारण इसे बेचने को लेकर भाइयों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है. परिवार वाले चाहते हैं कि घाटे में चल रही इस दुकान को बेच दिया जाए, लेकिन चंद्रशेखर इसे अपने दादा और पिता की अंतिम निशानी मानते हैं. वह इस दुकान को आने वाली पीढ़ी के लिए एक विरासत के रूप में बचाए रखना चाहते हैं और इसी उम्मीद में रोज दुकान खोलते हैं.



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