लेह जाने के लिए खुला एक और रोड, सफर में दिखेंगे ऐसे जादुई नजारे कि जिंदगी भर नहीं भूलेंगे

लेह जाने के लिए खुला एक और रोड, सफर में दिखेंगे ऐसे जादुई नजारे कि जिंदगी भर नहीं भूलेंगे


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Nimmu-Padum-Darcha Road : निमू-पदुम-दरचा रोड एक ओर जांस्कर घाटी को लेह के पास स्थित निमू से और दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ेगी. इससे घाटी के निवासियों को बाहर आने-जाने में बहुत सहूलियत होगी. यह रोड हिमाचल प्रदेश की ओर से लद्दाख पहुंचने के लिए सेना को एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराएगी.

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यह सड़क स्थानीय लोगों और सेना के लिए भी खूब फायदेमंद है. (Photo : @narendramodi/X)

नई दिल्‍ली. लेह-लद्दाख जाने के लिए अब एक और रास्‍ता खुल गया है. 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा (NPD) रोड शानदार वादियों, खुले नीले आसमान और बर्फ से ढकी चोटियों का दीदार कराते हुए आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाएगा. श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाईवे के बाद यह तीसरा रोड है, जिसका इस्‍तेमाल यात्री लेह जाने के लिए कर सकते हैं.

अब तक लद्दाख जाने के लिए लोग श्रीनगर-लेह या मनाली-लेह हाईवे का रुख करते थे, लेकिन यह नया मार्ग आपको सीधे जांस्कर घाटी के दिल से होकर ले जाएगा. यह रोड हिमाचल प्रदेश के दरचा से शुरू होकर पदुम के रास्ते लेह के पास निमू तक पहुंचता है. रास्ते में मिलने वाली गहरी घाटियां, बलखाती नदियां और पारंपरिक लद्दाखी गांव सफर को किसी सपने जैसा बना देते हैं.

शिंकुन ला दर्रे का रोमांच

इस सड़क की सबसे बड़ी खासियत है बादलों को छूता शिंकुन ला दर्रा, जो समुद्र तल से 16,558 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इस दर्रे को पार करते वक्त चारों ओर फैली बर्फ की सफेद चादर और बर्फीली हवाएं रोंगटे खड़े कर देने वाला रोमांच पैदा करती हैं. सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा बनाई गई यह सड़क मौजूदा दोनों हाईवे की तुलना में छोटी है, जिससे मुसाफिर कम समय में लेह-लद्दाख पहुंच सकेंगे.

सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह ऊंचा दर्रा बंद न हो, इसके लिए शिंकुन ला के नीचे करीब 15,800 फीट की ऊंचाई पर 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई जा रही है. इस टनल के तैयार होने के बाद खराब मौसम या बर्फ के तूफानों के बीच भी सफर नहीं रुकेगा, जिससे सैलानी साल भर लद्दाख के विहंगम नजारों का दीदार कर सकेंगे.

सेना को भी फायदा

यह सड़क स्थानीय लोगों और सेना के लिए भी खूब फायदेमंद है. जांस्कर घाटी के निवासियों को अब इलाज, पढ़ाई और व्यापार के लिए महीनों तक दुनिया से कटे नहीं रहना पड़ेगा. स्थानीय कृषि उत्पाद आसानी से बड़े बाजारों तक पहुंचेंगे. साथ ही, हिमाचल की ओर से सेना को लद्दाख सीमा तक रसद, हथियार और जवानों को तेजी से पहुंचाने के लिए एक सुरक्षित और वैकल्पिक लाइफलाइन मिल गई है.



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