Navratri Day 8 Mahagauri Puja And Tulsi Pujan: नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है. मां महागौरी को पवित्रता, शांति और निर्मलता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भक्त मां की पूजा करके सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां महागौरी का व्रत करके पूजा अर्चना करने से कुंडली में छाया ग्रह राहु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और शुक्र ग्रह का शुभ फल भी प्राप्त होता है. पारंपरिक मान्यताओं में मां महागौरी का संबंध पवित्र तुलसी से जोड़ा जाता है. तुलसी को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है और आयुर्वेद में भी इसका खास स्थान है. आइए जानते हैं महागौरी से जुड़ी तुलसी की इस दिन पूजा अर्चना करने का क्या महत्व है और इस पवित्र औषधि के चमत्कारी गुण…
महागौरी के साथ तुलसी पूजन
नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी का व्रत रखकर पूजा अर्चना करने का विधान है. इस दिन महागौरी के साथ तुलसी की पूजा करने की भी परंपरा है. तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और इस महागौरी के साथ तुलसी का पूजन करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है और कुंडली में मौजूद ग्रह दोष से भी राहत मिलती है. तुलसी की सेवा और माता महागौरी की आराधना, दोनों ही श्रद्धा, शुद्धता और भक्ति का भाव जगाती हैं.
नवरात्रि 2026 महाअष्टमी
आश्विन मास की अष्टमी तिथि की शुरुआत – 18 अक्टूबर, सुबह 8 बजकर 28 मिनट से
आश्विन मास की अष्टमी तिथि की समापन – 19 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक
उदिया तिथि के आधार पर महाअष्टमी की पूजा 19 अक्टूबर दिन सोमवार को की जाएगी. नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. साथ ही इस शुभ दिन पर कुछ घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है. हालांकि जिन घरों में अष्टमी की कुलदेवी पूजा या तंत्र-मंत्र व साधना की जाती है, वे 18 अक्टूबर की रात को ही अष्टमी तिथि की पूजा करेंगे.
आयुर्वेद में तुलसी का महत्व
तुलसी को घर-घर में पूजा जाता है, लेकिन इसके गुण सिर्फ धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं हैं. आयुर्वेद में तुलसी को सुरसा, विष्णुप्रिया और तुवरी जैसे नामों से भी जाना जाता है. इसकी पत्तियों में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिन पर स्वास्थ्य संबंधी लाभों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन भी किए गए हैं.
सर्दी-खांसी में मददगार: तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सर्दी, खांसी और गले की परेशानी में किया जाता है. हालांकि, गंभीर संक्रमण या सांस लेने में परेशानी होने पर केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.
इम्युनिटी के लिए उपयोगी: तुलसी एक प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर है. यह वायरल, बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन से शरीर की रक्षा करती है.
तनाव कम करने में सहायक: तुलसी में ‘एडेप्टोजेनिक’ गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को नियंत्रित करते हैं और मन को शांत रखते हैं.
रक्त शोधन व हृदय स्वास्थ्य: तुलसी रक्त को शुद्ध करती है, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करती है और हृदय की कार्यक्षमता में सुधार लाती है.
पाचन में मदद: पारंपरिक चिकित्सा में तुलसी का इस्तेमाल पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता है. हालांकि, गैस और अपच की समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए.
ध्यान रखें: तुलसी का औषधीय उपयोग करने से पहले रजिस्टर्ड आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लें. गर्भवती महिलाएं, नियमित दवाएं लेने वाले लोग और किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति विशेष सावधानी बरतें.