नवरात्रि में 9 कन्याओं संग बालक का पूजन क्यों जरूरी? जानें बटुक भैरव की महिमा
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Navratri Kanya Poojan Niyam: नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान बालक की पूजा करने की भी विशेष परंपरा है. आखिर कन्याओं के साथ बटुक भैरव की आराधना क्यों की जाती है और इसका क्या धार्मिक महत्व है, उज्जैन के आचार्य से जानिए इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं.
उज्जैन. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि छोटी कन्याओं में देवी दुर्गा का स्वरूप विद्यमान होता है, इसलिए 9 कन्याओं को भोजन कराकर उनका पूजन किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कन्या पूजन में एक छोटे बालक की पूजा करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बालक को बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है.
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, मां दुर्गा को जहां शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना गया है, वहीं बटुक भैरव को देवी की शक्ति का रक्षक माना जाता है. यही वजह है कि नवरात्रि में कन्या पूजन के साथ बालक के रूप में बटुक भैरव की पूजा भी की जाती है. धार्मिक परंपरा में शक्तिपीठों के साथ भैरव की उपस्थिति का विशेष महत्व बताया गया है. इसी मान्यता के आधार पर कन्या पूजन में बटुक भैरव का पूजन किया जाता है. श्रद्धालु मां दुर्गा के साथ बटुक भैरव की आराधना कर सुख-समृद्धि, सुरक्षा और देवी की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं.
भैरव के रूप में होता है पूजन
बटुक भैरव को भगवान शिव के भैरव स्वरूप का बाल रूप माना जाता है. नवरात्रि में कन्या पूजन के साथ बालक की पूजा करने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्याएं देवी शक्ति का प्रतीक हैं जबकि बटुक भैरव की आराधना भगवान शिव के स्वरूप से जुड़ी है. इस प्रकार दोनों का पूजन शक्ति और शिव की उपासना को पूर्णता प्रदान करने वाला माना जाता है.
अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन
इस वर्ष अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर और नवमी 19 अक्टूबर को पड़ रही है. कन्या पूजन दोनों ही दिन किया जा सकता है. पूजा में कन्याओं को पैर धोकर, उन्हें भोजन कराकर और उपहार देकर सम्मानित किया जाता है. इसी क्रम में एक बालक की भी विशेष पूजा की जाती है. यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक संदेश भी देती है. स्त्री और पुरुष ऊर्जा का संतुलन, सम्मान और समर्पण का प्रतीक है यह पूजन कन्याओं का सम्मान और बालक रूपी भैरव की आराधना भारतीय संस्कृति की उस गहराई को दर्शाती है, जहां शक्ति और सुरक्षा दोनों को साथ पूजा जाता है.