झांसी की कल्पना ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मदद न मिलने पर खोली कपड़ों की दुकान, बन रहीं आत्मनिर्भर

झांसी की कल्पना ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मदद न मिलने पर खोली कपड़ों की दुकान, बन रहीं आत्मनिर्भर


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Jhansi News: कल्पना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर काम करना चाहती थीं. इस मिशन का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें अपनी आजीविका चलाने के अवसर देना है. कल्पना भी इसी माध्यम से अपने काम को आगे बढ़ाना चाहती थीं. लेकिन किसी कारण से वह स्वयं सहायता समूह के जरिए अपना कारोबार आगे नहीं बढ़ा सकीं. इसके बाद उन्हें समूह के माध्यम से कपड़ा देने से मना कर दिया गया

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झांसी: कल्पना ने एक मुश्किल परिस्थिति को अपना कारोबार शुरू करने की वजह बना लिया. जिस कपड़े को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा उसी से जुड़े काम में उन्होंने अपना भविष्य तलाशना शुरू किया. दूसरों से मदद मिलने का इंतजार करने के बजाय कल्पना ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया और कपड़ों की दुकान खोलकर अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश शुरू की.

कल्पना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर काम करना चाहती थीं. इस मिशन का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें अपनी आजीविका चलाने के अवसर देना है. कल्पना भी इसी माध्यम से अपने काम को आगे बढ़ाना चाहती थीं. लेकिन किसी कारण से वह स्वयं सहायता समूह के जरिए अपना कारोबार आगे नहीं बढ़ा सकीं. इसके बाद उन्हें समूह के माध्यम से कपड़ा देने से मना कर दिया गया.

शुरू किया खुद का कपड़े का कारोबार

कपड़ा उपलब्ध नहीं होने से उनके सामने काम जारी रखने की समस्या खड़ी हो गई. कारोबार के लिए जरूरी सामान ही नहीं मिलता तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में कल्पना ने अपनी कोशिश बंद करने के बजाय दूसरा रास्ता चुना. उन्होंने तय किया कि वह अपने काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगी और खुद ही कारोबार शुरू करेंगी. इसी फैसले के साथ उन्होंने कपड़ों की दुकान शुरू की. एक दुकान चलाने के लिए केवल सामान जुटाना ही काफी नहीं होता. ग्राहकों की जरूरत समझना उनकी पसंद के कपड़े रखना और कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना भी जरूरी होता है. कल्पना के लिए भी यह एक नई शुरुआत थी जिसमें उन्हें अपनी मेहनत और समझ के दम पर आगे बढ़ना था.

कारोबार से बनेगी खुद की पहचान

कपड़ा नहीं मिलने की परेशानी ने उनके सामने रास्ता जरूर मुश्किल किया लेकिन उन्होंने इसे अपने काम को रोकने की वजह नहीं बनने दिया. उन्होंने अपनी जरूरत को समझा और उसी के अनुसार आगे बढ़ने का फैसला लिया. अब कपड़ों की दुकान उनके लिए अपना काम करने और खुद की पहचान बनाने का एक जरिया है. कल्पना की इस पहल में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश साफ नजर आती है. उनकी कहानी यह बताती है कि जब किसी एक रास्ते से आगे बढ़ना संभव न हो तो दूसरे विकल्प तलाशना जरूरी होता है. हालांकि कारोबार की वास्तविक स्थिति और उससे होने वाली कमाई के बारे में जानकारी मिलने पर ही यह साफ हो सकेगा कि उनकी आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है.

फिलहाल कल्पना ने अपने लिए एक नई शुरुआत की है. कपड़ा उपलब्ध नहीं होने से शुरू हुई परेशानी के बीच उन्होंने अपना कारोबार खड़ा करने का फैसला लिया. उनका यह कदम बताता है कि मुश्किल आने पर रास्ता बदलना हार मानना नहीं है बल्कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए नई दिशा तलाशना भी है.



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