Kartik Snan Kab Se Hai 2026: हिंदू कैलेंडर का कार्तिक माह स्नान, दान, पूजा, दीपदान आदि के लिए महत्वपूर्ण होता है. कार्तिक को दामोदर मास भी कहते हैं. कार्तिक मास भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रिय महीना है. इस माह में नदी या तीर्थ स्नान, तुलसी पूजा और दीपदान करना शुभ फलदायी होता है. पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, जो लोग कार्तिक माह में स्नान करता है, उसके कई जन्मों के पाप भी मिट जाते हैं, भगवान विष्णु की कृपा से वह व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर लेता है.
कार्तिक स्नान 2026 प्रारंभ तारीख
कार्तिक स्नान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानि इस माह के पहले ही दिन से शुरू हो जाता है. इस साल कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि 26 अक्टूबर दिन सोमवार को सुबह 9 बजकर 41 मिनट से शुरू हो रही है और 27 अक्टूबर दिन मंगलवार को सुबह 7 बजकर 1 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर कार्तिक माह की शुरूआत 27 अक्टूबर से होगी. 27 अक्टूबर से कार्तिक स्नान शुरू होगा.
कार्तिक का पहला स्नान 2026 मुहूर्त
कार्तिक माह का पहला स्नान ब्रह्म मुहूर्त से प्रारंभ होगा. शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त को स्नान के लिए सबसे उत्तम समय बताया गया है. उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:47 ए एम से 05:38 ए एम तक है. जो इस समय स्नान न कर पाएं, वे सूर्योदय 06:29 ए एम के बाद भी स्नान कर सकते हैं. उस दिन सिद्धि योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक है. इस योग में किया गया स्नान और दान आपके लिए पुण्य फलदायी होगा.
कार्तिक स्नान का समापन कब होगा?
कार्तिक माह में स्नान का समापन पूर्णिमा के दिन होता है. कार्तिक पूर्णिमा को स्नान के बाद दान करते हैं. पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि किए जाते हैं. पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर को रात में 11 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और 24 नवंबर को रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि की गणना के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर दिन मंगलवार को है. ऐसे में कार्तिक स्नान का समापन 24 नवंबर 2026 को होगा.
कार्तिक स्नान का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में भगवान विष्णु का निवास जल में होता है. इस वजह से लोग नदी, तलाब या तीर्थ स्थानों में जाकर स्नान करते हैं. इससे उनको भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, पाप मिटते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. जो लोग तीर्थ या नदी स्नान न कर पाएं, वे घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें.
कार्तिक में तुलसी पूजा और दीपदान
कार्तिक माह में तुलसी विवाह का आयोजन होता है, जिसमें भगवान शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराते हैं. तुलसी के पत्ते में गंगा नदी, पुष्कर तीर्थ और वासुदेव आदि देवताओं का वास होता है.
जो लोग स्नान करके भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करते हैं, उनको हरि कृपा प्राप्त होती है. वहीं कार्तिक माह में प्रतिदिन तुलसी की पूजा और दीपदान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं.