German Diplomat Picks up Gobar in Village: अरे गमछा डालिए पहले किसान के बोलते ही सानी-भूसा करने लगे जर्मन बाबू हाथों से उठा लिया भैंस का गोबर


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German Diplomat Picks up Gobar in Village: आप क्या कल्पना कर सकते हैं कि कोई विदेशी शख्स गांव में जाकर पशुओं का चारा काटे और नंगे हाथों से गोबर उठा ले? कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब जर्मनी के डिप्लोमेट अपना सूट-बूट उतारकर गाय-भैंस का चारा-पानी करने लगे.

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किसान के बोलते ही सानी-भूसा करने लगे जर्मन बाबू, हाथों से उठाया भैंस का गोबरZoom

जर्मनी के डिप्लोमेट ने गांव में जाकर किया काम. (क्रेडिट- germanyinindia/Instagram )

German Diplomat Experiencing Village Life: भारत के गांवों में खेती-किसानी की जिंदगी कैसी होती है, इसका अनुभव करने के लिए जर्मनी के एक डिप्लोमेट  खेतों में पहुंच गए. यहां उन्होंने गायों को चारा खिलाया, हाथ से चलने वाली मशीन से चारा काटा और बिना दस्ताने पहने अपने हाथों से गोबर भी उठाया. जर्मन दूतावास की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किया गया उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. लोग उनके इस अंदाज की तारीफ कर रहे हैं.

इस वीडियो में जर्मन दूतावास में राजनीतिक मामलों के प्रमुख और मंत्री एडवाइजर मारियस ओसवाल्ड नजर आ रहे हैं. वह भारतीय किसान प्रमोद शर्मा के साथ गांव पहुंचे, जहां उन्हें खेती और पशुओं की देखभाल से जुड़े रोजमर्रा के काम करने का मौका मिला.

जर्मन बाबू का ठेठ देसी अंदाज

वीडियो की शुरुआत Deutsch Goes Desi- Episode 1 नाम से होती है. इसमें प्रमोद शर्मा राजनयिक को गांव की जिंदगी से रूबरू कराते हैं. किसान कहते हैं कि जहां कई भारतीय नए हुनर सीखने और रोजगार के लिए जर्मनी जाते हैं, वहीं मारियस भारत में गांव की जिंदगी समझने आए हैं. सूटबूट पहने मारियस गर्मी से परेशान दिखाई देते हैं. इस पर किसान उन्हें कोट उतारकर गले में गमछा डालने की सलाह देते हैं, जिससे पसीना पोछा जा सके. इसके बाद दोनों पशुओं के बाड़े की ओर जाते हैं और वो पशुओं का चारा काटकर उसे खिलाने में लग जाते हैं.

जर्मनी के डिप्लोमेट ने गांव में जाकर किया काम. (क्रेडिट- germanyinindia/Instagram )

गायों को खिलाया चारा, फिर उठाया गोबर

मारियस किसान के साथ चारा तैयार करते हैं और हाथ से चलने वाली चारा काटने की मशीन भी चलाते हैं. इसके बाद वह गायों को चारा खिलाते हैं. इसके बाद आता है मुश्किल काम- गोबर उठाने का. मारियस पूछते हैं कि क्या यह गंदा काम नहीं है? इस पर किसान समझाते हैं कि ग्रामीण परिवारों में पशु घर का हिस्सा होते हैं और उनकी देखभाल करना रोज का काम है. फिर जर्मन डिप्लोमेट अपने हाथों से गोबर उठाते हैं. हालांकि वे मानते हैं कि खेती-किसानी का जीवन आसान नहीं है.

वायरल हो गया वीडियो 

जर्मन दूतावास ने वीडियो के साथ लिखा कि बहुत कम राजनयिकों ने काम के दौरान मारियस की तरह अपने हाथ गंदे किए होंगे. दूतावास ने यह भी कहा कि अगर भारतीयों को जर्मनी में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है, तो जर्मन लोगों को भी भारत में आकर यहां की जिंदगी समझनी चाहिए. वीडियो पर लोगों ने उनकी खूब तारीफ की. किसी ने इसे स्थानीय संस्कृति को समझने की अच्छी पहल बताया, तो किसी ने उनके साहस और सीखने की इच्छा की सराहना की.



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