सेलिब्रेशन तो बनता है! कोरियन अर्थशास्त्री ने भारत की इकोनॉमी को लेकर क्यों कही ये बात?


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सेलिब्रेशन तो बनता है! कोरियन अर्थशास्त्री ने भारत को लेकर क्यों कही ये बात

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Indian Economy : क्युंघून किम का कहना है कि वैश्विक मंदी और युद्ध के बादलों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसने पूरी दुनिया को चौंकाया है. अर्थव्‍यवस्‍था का इताना बड़ा आकार होने के बाद भी लगातार इस रफ्तार से दौड़ना दुनिया के किसी भी बड़े देश के लिए आसान तो कतई नहीं है.

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किम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का यह नया मुकाम इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान जीडीपी विकास दर 5.8 फीसदी रह गई थी.

नई दिल्‍ली. कोरोना ने हर देश की अर्थव्‍यवस्‍था को ऐसा जख्‍म दिया, जिससे अधिकतर तो अब तक उबर नहीं पाए हैं. लेकिन, महामारी के बाद भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था ने जिस तरह से वी शेप रिकवरी की है, उसने दुनिया के दिग्गज अर्थशास्त्रियों को अचंभित कर दिया है. इंडियन इकोनॉमी के इसी असाधारण प्रदर्शन को देखकर कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIEP) के भारत एवं दक्षिण एशिया मामलों के प्रमुख क्युंघून किम का मानना है कि भारत ने मुश्किल दौर से निकलकर जिस निरंतरता के साथ ऐतिहासिक उछाल दिखाया है, वह न केवल वैश्विक फलक पर एक मिसाल है बल्कि जश्न मनाने का पूरा हक भी देता है. उन्‍होंने कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की गति यूं ही बरकरार रही तो साल 2030 तक यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा.

क्युंघून किम का कहना है कि वैश्विक मंदी और युद्ध के बादलों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसने पूरी दुनिया को चौंकाया है. उन्‍होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), एशियाई विकास बैंक (ADB) और विश्व बैंक जैसी शीर्ष वैश्विक संस्थाएं लगातार भारत के विकास दर अनुमानों को बढ़ाकर इस साल और अगले साल दोनों के लिए 7 फीसदी से ऊपर ले गई हैं.

मंदी के गर्त से निकलकर 7.83% की ऐतिहासिक उड़ान

किम ने कहाकि भारतीय अर्थव्यवस्था का यह नया मुकाम इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान जीडीपी विकास दर 5.8 फीसदी रह गई. इसके ठीक बाद साल 2021 में देश ने 9.7 फीसदी की जोरदार वापसी की और फिर अगले चार वर्षों तक लगातार 7 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर बनाए रखी. वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक आर्थिक विकास दर 7.83 फीसदी दर्ज की गई है. 1960 के बाद से पिछले छह दशकों के आधिकारिक आंकड़ों में पांच वर्षों की अवधि में यह दूसरी सबसे अधिक औसत विकास दर है, जो केवल 2003 से 2007 के 7.89% से मामूली अंतर से पीछे है.

4 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी

क्युंघून किम ने कहा कि 2003 से 2007 के बीच जब ब्रिक (BRIC) देशों में भारत की धमक बढ़ी थी, तब भारत की अर्थव्यवस्था का आकार केवल 1 लाख करोड़ डॉलर के आसपास था. आज भारत की जीडीपी लगभग 4 लाख करोड़ डॉलर के करीब पहुंच चुकी है. इसका सीधा अर्थ यह है कि चार गुना बड़े बेस पर 7 फीसदी से अधिक की समान विकास दर हासिल कर रही है. अर्थव्‍यवस्‍था का इताना बड़ा आकार होने के बाद भी लगातार इस रफ्तार से दौड़ना दुनिया के किसी भी बड़े देश के लिए आसान तो कतई नहीं है.

बार-बार अनुमान बदलने पर मजबूर हुए दुनिया के अर्थशास्त्री

क्युंघून किम के मुताबिक, भारत के तिमाही जीडीपी आंकड़ों ने हर बार आर्थिक जानकारों के तमाम अनुमानों को ध्वस्त कर दिया. उन्‍होंने कहा कि वे खुद र वैश्विक बैंक हर तिमाही रिपोर्ट के बाद अपने विकास दर के अनुमानों में कुछ दशमलव अंक जोड़ने पर विवश हो रहे हैं. लगातार पांच वर्षों तक 7 फीसदी से ऊपर की वृद्धि दर्ज कर भारत ने साबित कर दिया है कि उसकी विकास यात्रा केवल किसी एक क्षेत्र के उछाल पर निर्भर नहीं, बल्कि समग्र ढांचागत मजबूती पर टिकी है.



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