सागर का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर तैयार! अब सिर्फ शिखर का काम बाकी, नए साल में आ सकते हैं पीएम मोदी

सागर का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर तैयार! अब सिर्फ शिखर का काम बाकी, नए साल में आ सकते हैं पीएम मोदी


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Sant Ravidas Lok: सागर में 100 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे संत रविदास लोक का 97 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. नए साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण कर सकते हैं.

Sant Ravidas Lok: सागर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट संत रविदास मंदिर लगभग आकर ले चुका है. यहां पर 11 एकड़ जगह में 100 करोड़ की लागत से भव्य मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है, जो लगभग 97% पूरा हो चुका है. अब केवल मुख्य मंदिर के शिखर का हिस्सा ही निर्माण के लिए रह गया है. अधिकारियों के मुताबिक, नवंबर महीने में ही इस प्रोजेक्ट का काम हंड्रेड परसेंट हो जाएगा. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी इसके लोकार्पण के लिए एक बार फिर सागर आ सकते हैं. संभावना ऐसी जताई जा रही है कि नया साल 2027 में प्रधानमंत्री इस विशाल मंदिर का लोकार्पण कर सकते हैं.

नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे टर्म के अंतिम समय में 12 अगस्त 2023 को इस मंदिर का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी थी. मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को इसकी जिम्मेदारी सौंप गई 100 करोड़ 73 लाख की लागत से इसका काम किया जा रहा. इसकी समय सीमा अगस्त 2025 थी लेकिन तय समय से यह लगभग 14 महीने देरी से काम चल रहा है.

बंशीपुर पहाड़ का पत्थर का उपयोग
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के एसडीओ विवेक चौबे ने बताया कि यहां पर सोमपुर राजस्थान के 100 कारीगरों के द्वारा दिन रात मेहनत कर मंदिर निर्माण में भूमिका निभाई जा रही है तो यहां पर राजस्थान के ही बंशीपुर पहाड़ का पत्थर का उपयोग किया जा रहा है. इसी पत्थर का उपयोग अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए किया गया है.

बता दें, इस साल संत रविदास की 650वीं जयंती मनाई जा रही है. सागर में संत रविदास से जुड़ी एक-एक चीज को यहां पर किसी न किसी रूप में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए म्यूजियम भक्त निवास रविदास कुंड रविदास गैलरी मुख्य मंदिर सहित अन्य कार्य किए गए. इसके अलावा संत रविदास यानी की भक्ति काल के समय के जो 11 महत्वपूर्ण लोग हुए उनकी की प्रतिमाएं यहां पर रहेंगी.

खास बात यह है कि संत रविदास लोक का निर्माण 2 हजार साल पुरानी नागर शैली में किया जा रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि इस तकनीक से बना परिसर 1000 साल तक अडिग रह सकेगा. क्योंकि 100 करोड़ के मंदिर निर्माण में कहीं पर एक इंच भी लोहा स्टाइल और सीमेंट जैसी चीजों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है. इस मंदिर परिसर में संत रविदास के जीवन और विचारों को प्रामाणिकता के साथ सहेजने के लिए मंदिर की गैलरी और म्यूजियम में शामिल किए जा रहे दोहों, साखियों और पदों की भी जांच हो रही है, जो लोग इस मंदिर का को घूम कर आएंगे. उनसे बाहर दोहा या अन्य चीज से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे जो सही जवाब देगा उनके लिए उपहार भी मिलेंगे.

इस मंदिर का निर्माण बडतुमा में किया जा रहा हैं. यहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार आ चुके हैं और अगर वह लोकार्पण को आते हैं तो इस गांव में साढ़े 3 साल में तीसरा दौरा होगा. इस मंदिर का निर्माण होने से यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं बढ़ गई. मध्य प्रदेश ही नहीं पूरे देश में कितना बड़ा मंदिर बना है, जहां पर सामाजिक समरसता का संदेश मिलेगा. साथ ही देशभक्ति संत रविदास के अनुयाई यहां पर पहुंचेंगे. इसके आसपास अभी से ही कॉलोनी या विकसित होने लगी है. शानदार सड़क कनेक्टिविटी हो गई है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.



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