Abhijeet Dipke News: AISA की नेहा बोरा हुईं रिहा मगर अभिजीत दीपके का होगा आशुतोष-सौरव वाला हाल, क्या वजह?

Abhijeet Dipke News: AISA की नेहा बोरा हुईं रिहा मगर अभिजीत दीपके का होगा आशुतोष-सौरव वाला हाल, क्या वजह?


Abhijeet Dipke News: दिल्ली में तिरंगा मार्च के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा हो गई हैं, लेकिन CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अब भी गिरफ्तारी के बाद कानूनी शिकंजे में हैं. दिलचस्प बात यह है कि दीपके को पिछली बार आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ हिरासत में लिया गया था और बॉन्ड भरवाकर छोड़ दिया गया था. लेकिन कुछ ही दिनों बाद आशुतोष और सौरव तिहाड़ जेल पहुंच गए. अब दीपके को SEM अदालत में पेश किया जाना है. ऐसे में सवाल है- क्या उन्हें भी पहले रिहाई और फिर गिरफ्तारी के बाद जेल जाने का सामना करना पड़ेगा, या इस बार उन्हें राहत मिल जाएगी?

अभिजीत दीपके की मुसीबत बढ़ती दिख रही है. तिरंगा मार्च करके सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके भयंकर तरीके से फंस चुके हैं. दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रिवेंटिव अरेस्ट कर लिया है. उनके ऊपर तिहाड़ जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है. एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ही दिल्ली पुलिस ने दीपके को हिरासत में लिया था. अभिजीत दीपके पर सेंट्रल पार्क में शांति भंग करने का आरोप है. दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है. वैसे हिरासत में तो नेहा बोरा को भी लिया गया था. मगर दिल्ली पुलिस ने आज यानी शनिवार तड़के नेहा बोरा को आजाद कर दिया. अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर नेहा को रिहाई मिल गई, मगर अभिजीत दिपको को हिरासत से क्यों नहीं छोड़ा गया?

नेहा बोरा रिहा, मगर दिपके अरेस्ट क्यों?

घटनाक्रम पर गौर करें तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का सौरव दास और आशुतोष रांका वाला हाल हो सकता है. सीजेपी ने शुक्रवार को तिरंगा मार्च किया. इस दौरान अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा शनिवार सुबह रिहा हो गईं. लेकिन दीपके अब भी पुलिस की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. उन्हें प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया है. उन्हें आज यानी शनिवार को सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाना है. दिल्ली पुलिस उसी तरह की दलील पेश करेगी, जो सौरव दास और आशुतोष रांका के वक्त दी थी. इससे दीपके पर जेल जाने का खतरा बढ़ गया है. यहां बताना जरूरी है कि सौरव और आशुतोष पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं.

पहले बॉन्ड भरकर छूटे, फिर तिहाड़ पहुंचे आशुतोष-सौरव

अभिजीत दीपके के मामले में आशुतोष रांका और सौरव दास का घटनाक्रम बेहद अहम है. 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने मुंबई से दिल्ली पहुंचे दीपके, आशुतोष और सौरव को हिरासत में लिया था. तीनों को एहतियाती कार्रवाई के तहत विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. इसके बाद उन्हें शांति बनाए रखने की शर्त पर बॉन्ड भरकर रिहा कर दिया गया था.

लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं चली. 13 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास अपने साथियों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे. पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल नहीं रहने के बावजूद उन्होंने वहां प्रवेश किया, बैरिकेडिंग पार की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली. इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने आशुतोष और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया. यानी पहले बॉन्ड पर रिहाई मिली, लेकिन बाद की कार्रवाई में दोनों जेल पहुंच गए.

दीपके पर जेल जाने का खतरा क्यों?

अभिजीत दीपके के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनके साथ भी ऐसा हो सकता है? फिलहाल उन्हें पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. उन्हें शुक्रवार शाम तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था. दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की है. ये धाराएं शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा की मांग और संज्ञेय अपराध को रोकने के उद्देश्य से एहतियाती कार्रवाई से जुड़ी हैं. जबकि नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया. दीपके के मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की है और उन्हें SEM अदालत में पेश किया जाना है. अब आगे का फैसला कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर करेगा.

किस धारा में एक्शन
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 का इस्तेमाल एहतियातन कार्रवाई के लिए किया जाता है. धारा 126 के तहत मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के लिए मुचलका या बॉन्ड भरवाते हैं, जबकि धारा 170 पुलिस को शांति भंग या संभावित अपराध को रोकने के लिए एहतियातन गिरफ्तार करने का अधिकार देती है.

आशुतोष-सौरव वाला होगा दीपके का हाल?

यहां आशुतोष और सौरव का मामला इसलिए अहम है, क्योंकि उनकी पिछली रिहाई उन्हें बाद की गिरफ्तारी से नहीं बचा सकी. दीपके का मामला भी कुछ ऐसा ही है. सौरव और आशुतोष की तरह उन्हें भी पहले रिहाई मिली थी. सौरव और आशुतोष ने जब बॉन्ड का उल्लंघन किया तो उन्हें जेल जाना पड़ गया. दीपके ने भी लास्ट टाइम बॉन्ड भरा था. पुलिस के मुताबिक, उन्होंने भी इसका उल्लंघन किया है. ऐसे में दीपके को भी उसी तरह जेल भेजा जा सकता है. हालांकि, ऐसा अभी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता. इसके लिए अदालत के आदेश और उनके मामले में पुलिस की ओर से रखे गए आधार को देखना होगा.

तिरंगा मार्च के बाद बढ़ा विवाद

सीजेपी ने शुक्रवार को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया था. संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करना चाहता था. इसी दौरान पुलिस ने दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिया. सीजेपी ने दीपके को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए थे. संगठन का कहना है कि वह तिरंगा लेकर विरोध प्रदर्शन करने निकले थे. दूसरी ओर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई कानून-व्यवस्था और एहतियाती प्रावधानों से जुड़ी है.

किस पर टिकी निगाहें?

अब सबकी नजर SEM अदालत में अभिजीत दीपके की पेशी पर है. क्या उन्हें बॉन्ड भरकर रिहाई मिल जाएगी, या आशुतोष रांका और सौरव दास की तरह जेल जाना पड़ेगा? फिलहाल इसका जवाब अदालत के आदेश के बाद ही मिलेगा. इतना जरूर है कि नेहा बोरा की रिहाई के बावजूद CJP के संस्थापक की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को और अहम बना दिया है.



Source link