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Pali Water Conservation Project: पाली जिले में पानी के रिसाव को रोकने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चार बांधों और नहरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा. जल संसाधन विभाग इन विकास कार्यों पर करीब 7.03 करोड़ रुपये खर्च करेगा.
पाली: पाली जिले में बांधों से बहकर व्यर्थ जाने वाले पानी और सीपेज से होने वाले जल नुकसान को रोकने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए जिले के चार बांधों और उनसे जुड़ी नहरों का जीर्णोद्धार करवाया जाएगा. जल संसाधन विभाग की ओर से इन कार्यों पर 702.69 लाख रुपए यानी करीब 7.03 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. हेमावास, बाणियावास, तखतगढ़ और सिंदरू बांध पर होने वाले इन कार्यों का उद्देश्य पानी के रिसाव को कम करना, बांधों की मजबूती बढ़ाना और उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है.
इन कार्यों के तहत कहीं कच्ची नहर को पक्का किया जाएगा, तो कहीं टो-ड्रेन बनाकर सीपेज की समस्या दूर की जाएगी. इसके अलावा बांधों की पाल को मजबूत करने और नहरों की मरम्मत पर भी जोर दिया जाएगा. इससे जल संरक्षण के साथ सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
पाल की चौड़ाई बढ़ेगी, संरचनाएं होंगी मजबूत
परियोजना के तहत तखतगढ़ और सिंदरू बांध की पाल की चौड़ाई को 3 मीटर से बढ़ाकर 4.5 मीटर किया जाएगा. इसके साथ ही पाल पर पीचिंग (पत्थरों का सुदृढ़ीकरण) का कार्य करवाया जाएगा, जिससे बांध की क्षमता और मजबूती में इजाफा हो सके. इसके अलावा बांधों से जुड़ी नहरों की आवश्यक मरम्मत भी की जाएगी, जिससे पानी का प्रवाह सुगम हो सके.
हेमावास की कच्ची नहर होगी पक्की, बाणियावास में बनेगी टो-ड्रेन
हेमावास बांध: पाली शहर के समीप स्थित प्रसिद्ध हेमावास बांध की 3 किलोमीटर लंबी ‘गुलाबपुरा माइनर’ जो वर्तमान में कच्ची है, उसे पूरी तरह पक्का किया जाएगा. इससे मिट्टी द्वारा सोखे जाने वाले पानी की बचत होगी और किसानों को सिंचाई के लिए अंतिम छोर तक पूरा पानी मिल सकेगा.
बाणियावास बांध
यहां सीपेज की गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए 3 किलोमीटर लंबी टो-ड्रेन (To-Drain) का निर्माण किया जाएगा. इसके साथ ही ओवरफ्लो स्लूस गेट की मरम्मत और मिट्टी की पाल को दुरुस्त करने का कार्य प्रस्तावित है. इससे बांध के आसपास के गांवों में रिसाव के कारण होने वाले जलभराव से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी.
टेंडर प्रक्रिया शुरू, जल सुरक्षा पर मुख्य फोकस
जल संसाधन विभाग ने हेमावास और बाणियावास बांध की मरम्मत तथा नहरों के नवीनीकरण से जुड़े कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. जल संसाधन विभाग पाली के अधिशासी अभियंता शंकरलाल राठौड़ की माने तो उनका कहना है कि इन कार्यों का मुख्य लक्ष्य सीपेज और रिसाव से होने वाली जल हानि को न्यूनतम करना है. बांधों और नहरों के सुदृढ़ीकरण से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आने वाले समय में जिले में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पहले से कहीं अधिक बेहतर होगी.”