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Jio IPO: दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक भारत के सबसे बड़े आईपीओ में पैसा लगाने को बेकरार हैं. इनकी ओर से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की डिमांड की जा चुकी है. कई बड़े फैमिली हाउस भी इस आईपीओ में पैसा लगाएंगे.
जियो आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा.
नई दिल्ली. रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ (IPO) एंकर निवेशकों के लिए 19 अक्टूबर और रिटेल निवेशकों के लिए 21 अक्टूबर को खुलेगा. इस इश्यू को लेकर वैश्विक और घरेलू वित्तीय गलियारों में खूब उत्साह देखा जा रहा है. जियो आईपीओ में निवेश को अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन वेल्थ फंड्स और दिग्गज एसेट मैनेजमेंट कंपनियां आतुर हैं. इनकी ओर से अब तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की डिमांड की जा चुकी है.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ में निवेश को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), एसबीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंडने तो दिलचस्पी दिखाई ही है. साथ ही फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स (Fidelity Investments), कैपिटल ग्रुप (Capital Group), ब्लैकरॉक (BlackRock) सॉवरेन वेल्थ फंड GIC, नॉर्वे का Norges Bank Investment Management, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) भी भारत के इस सबसे बड़े आईपीओ में पैसा लगाने की ख्वाहिश रखते हैं. कई वैश्विक निवेशकों और बड़े फैमिली ऑफिस ने भी इस आईपीओ में बड़ी रकम लगाने की इच्छा जताई है.
टेलीकॉम ऑपरेटर से डिजिटल महाशक्ति की ओर
वैश्विक फंड्स की इस असाधारण मांग के पीछे जियो प्लेटफॉर्म्स का एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम बनना है. जानकारों के अनुसार, जियो ने शुरुआत भले ही एक पारंपरिक टेलीकॉम ऑपरेटर के तौर पर की थी, लेकिन आज यह मोबाइल कनेक्टिविटी, हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल एंटरटेनमेंट और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस तक फैल चुकी है. निवेशकों का मानना है कि कंपनी आने वाले वर्षों में मजबूत और टिकाऊ फ्री कैश फ्लो पैदा करने की क्षमता रखती है.
अनलॉक होगी सही वैल्यू
वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी के रूप में काम कर रहे जियो की लिस्टिंग से कंपनी के वास्तविक बाजार मूल्य का सही मूल्यांकन सामने आएगा. प्रारंभिक चरण में ही 2.5 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड मांग इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वैश्विक फंड्स का कंपनी पर पूरा भरोसा है.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)