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Guna News: गुना से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सभी का दिल व्यथित कर दिया है. जहां एक महिला की मौत के बाद मकान मालिक ने उसका शव घर में नहीं आने दिया. इसके बाद महिला के परिजनों ने अंतिम संस्कार से पहले विशेष श्रृंगार और रस्में अस्पताल के परिसर में पूरी कीं. फिर सभी ने नम ने आंखों से महिला को विदाई दी. लेकिन इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या समाज में इंसानियत इस हद तक गिर चुकी है कि वह एक बेटी को मरने के बाद छत भी नहीं दे सकता है.
मकान मालिक ने शव को घर में आने से रोका
Guna News: गुना में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर दिया है. 31 साल की पूजा रजक की कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ते हुए मौत हो गई. वह मूल रूप से बदरवास के रहने वाली थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से गुना के घोसीपुरा क्षेत्र में किराए के मकान में अपने रह थी. इस मकान में वह माता-पिता के साथ पिछले चार साल से रह रही थीं. मौत के बाद जब परिजन उसकी पार्थिव देह को किराए के कमरे पर ले जाने लगे, तो मकान मालिक ने यह कहकर साफ इंकार कर दिया कि उनके घर में धार्मिक कार्यक्रम चल रहा है, इसलिए शव को अंदर नहीं लाया जा सकता. बताया जा रहा है कि मकान मालिक ने नवरात्रि की वजह से शव को अंदर नहीं आने दिया.
जिला अस्पताल के परिसर में हुई सारी रस्में
परिस्थितियों की लाचारी और मकान मालिक की इस दो टूक के चलते पूजा के परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया. हिंदू परंपरा के अनुसार विवाहित महिला (सुहागन) की मौत होने पर अंतिम संस्कार से पहले उसका विशेष श्रृंगार और पारंपरिक रस्में घर पर ही पूरी की जाती हैं. लेकिन किराए के घर में जगह न मिलने के कारण मजबूर परिजनों को यह सारी रस्में जिला अस्पताल परिसर में ही पूरी करनी पड़ीं. अस्पताल परिसर में ही मृतिका का सुहागन के रूप में श्रृंगार किया गया, जिसके बाद नम आंखों से पार्थिव देह को सीधे मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया.
कैंसर ने कारण पति ने था घर से निकाला
मृतिका पूजा की निजी जिंदगी भी भारी संघर्षों से भरी हुई थी. उसकी शादी इंदौर में राकेश लश्करी के साथ हुई थी. जब पूजा को कैंसर जैसी भयानक बीमारी ने घेरा, तो पति ने उसे प्रताडि़त कर घर से भगा दिया था. जिसके खिलाफ परिजनों ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी. मौत की सूचना मिलने पर इंदौर से पति और उसकी दूसरी पत्नी भी मौके पर पहुंच गए थे. अस्पताल परिसर में सुहागन के श्रृंगार और आवश्यक रस्मों को पूरा करने के बाद पूजा को विदाई दी गई. पूजा की दो बेटियों और एक बेटा का रो-रोकर बुरा हाल है.
अस्पताल के बाहर खुले परिसर में हुई अंतिम रस्में
गरीबी और बेबसी के इस आलम में जब परिवार के पास अंतिम संस्कार और रस्मों के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा, तब मानवता आगे आई. आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस परिवार की मदद के लिए जाने-माने समाजसेवी प्रमोद भार्गव और गौ सेवक राम सिंह रजक आगे आए. उन्होंने न सिर्फ परिवार को ढांढस बंधाया, बल्कि अंतिम संस्कार की व्यवस्थाओं में पूरी मदद की.