वो स्पंजी ग्रह जिसके वायुमंडल में छिपे हैं रत्न-अंगूठी, जेम्स वेब ने पहली बार 3D नक्शे से खोला राज

वो स्पंजी ग्रह जिसके वायुमंडल में छिपे हैं रत्न-अंगूठी, जेम्स वेब ने पहली बार 3D नक्शे से खोला राज


James Webb Space Telescope: जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप के डेटा का उपयोग करके, ऐस्ट्रोनॉमर्स ने एक बेहद अजीब, झुलसा देने वाली गर्म दुनिया के वायुमंडल के कुछ खास सीक्रेट रहस्यों से पर्दा उठाया है. इस अजीबोगरीब ग्रह की बनावट किसी मार्शमैलो एक स्पंजी मिठाई जैसी है. हमारी धरती से करीब 1300 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद इस बाहरी ग्रह यानी Exoplanet का नाम WASP-17b है, जिस पर JWST की इंफ्रारेड आंख लगातार नजर बनाए हुए है. इस एक्सो प्लैनेट का मास, बृहस्पति से लगभग 0.8 गुना है, लेकिन यह हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह से लगभग दोगुना चौड़ा है. यही वजह है कि इसे सुपरपफ कैटिगरी में रखा गया है, जिसकी बनावट किसी मार्शमैलो जैसी स्पंजी है. WASP-17b अपने पैरेंट स्टार के इतना करीब है कि यह 4 धरती दिनों से भी कम समय में अपना एक चक्कर पूरा कर लेता है. इस नजदीकी की वजह से इस हॉट जूपिटर यानी तपती हुई बृहस्पति जैसी दुनिया का तापमान आसमान छू रहा है.

इस एक्सोप्लैनेट की एक्सट्रीम कंडीशन को देखते हुए इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि इसका वायुमंडल भी काफी अनोखा है. वैज्ञानिकों की एक टीम ने ‘ट्रांसमिशन स्ट्रिंग्स’ नाम की एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके WASP-17b के वायुमंडल के कोने-कोने का नक्शा तैयार किया. उन्होंने पाया कि इसका वायुमंडल एक अंगूठी की तरह है, जिसमें से प्रमुख रत्न बाहर की ओर उभर रहे हैं.

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की टीम की सदस्य हन्ना वेकफोर्ड ने एक बयान में कहा कि ग्रह बहुत मनमौजी होते हैं, उनका वायुमंडल जटिल और अराजक होता है. ये सारे आंकड़े एक साथ मिलकर 1000 प्रकाश वर्ष से अधिक दूर मौजूद इस विशाल दुनिया की एक बेहद व्यवस्थित और गतिशील तस्वीर पेश करते हैं, जो वाकई बेहद रोमांचक है.

खगोलविदों को WASP-17b इतना पसंद आया कि उन्होंने इस पर अंगूठी ही पहना दी. WASP-17b अपने तारे के इतना करीब है कि यह टाइडल लॉक्ड है यानी इसका एक हिस्सा हमेशा तारे की तरफ रहता है. इसके इस दिन वाले हिस्से पर लगातार सौर रेडिएशन की बौछार होती रहती है. इसके उलट, ग्रह का एक ठंडा रात वाला हिस्सा भी है, जो हमेशा अंतरिक्ष की तरफ ही रहता है.

इस बीच खगोलविदों ने एक ऐसे ठंडे लावा ग्रह की भी खोज की है जो शुरुआती धरती के जैसा दिखता है. जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप खगोलविदों को एलियन मौसम पूर्वानुमानकर्ता बनने में मदद कर रहा है. इस एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल का बेहद व्यापक 3D व्यू तैयार करके रिसर्चर्स ने पाया कि WASP-17b के वायुमंडल का रासायनिक संगठन और तापमान सिद्धांतों और मॉडलिंग के हिसाब से इसके दिन और रात वाले हिस्सों के बीच बदलता रहता है.

यह सब इसलिए संभव हो पाया क्योंकि ‘ट्रांसमिशन स्ट्रिंग्स’ तकनीक ने WASP-17b पर तब नजर रखी जब वह अपने तारे के सामने से गुजर रहा था. इसने अलग-अलग एंगल से ग्रह के वायुमंडल के छोर पर मौजूद रोशनी के कंपोजिशन को कैमरे में कैद किया. यह तरीका पारंपरिक तरीकों से कहीं बेहतर है क्योंकि पारंपरिक मॉडलिंग में सिर्फ पूरे छोर की औसत रोशनी का ही नक्शा बनाया जाता था.

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की लिली एलडरसन ने कहा कि यह मान लेने की बजाय कि आपका वायुमंडल चारों तरफ से एक जैसी रेडियल वाला एक वृत्त है, हमारी यह तकनीक आपको ग्रह के केंद्र से लेकर उसके किनारे तक की अलग-अलग दूरियों को मापने की छूट देती है. हम इसके चारों तरफ घूमने में सक्षम हैं. उन्होंने आगे कहा कि इसलिए अब हम सिर्फ एक रिंग को देखने से आगे बढ़कर यह समझने लगे हैं कि उस रिंग पर ये ‘रत्न’ असल में कहां पर स्थित हैं.

मॉडलिंग से ठीक ऐसे ही एक रत्न का पता चला, जो तब बनता है जब ग्रह की गर्म हवाएं भूमध्य रेखा और WASP-17b के रात वाले हिस्से तक पहुंचती हैं, जिससे ठंडे हिस्से का वायुमंडल फूल जाता है. एलडरसन ने बताया कि सिद्धांत यह भविष्यवाणी करते हैं कि सुबह और शाम के पक्षों के बीच तापमान का भारी अंतर होना चाहिए, और WASP-17b इस ट्रेंड पर बिल्कुल सटीक बैठता है. यानी हमने जो सोचा था, यह बिल्कुल वैसा ही है.

‘ट्रांसमिशन स्ट्रिंग्स’ पद्धति की यह शानदार सफलता नासा के एक्सोप्लैनेट कैटलॉग में दर्ज 6000 से अधिक दुनिया के वायुमंडल की मॉडलिंग की दिशा में एक रोमांचक कदम है. एलडरसन ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि ग्रह वास्तव में 3D वस्तुएं हैं, और जब वे अपने तारे के चक्कर लगाते हैं, तो जैसा हम अनुमान लगाते हैं, ठीक वैसा ही होता है. केवल कंप्यूटर पर कैलकुलेशन करने से आगे बढ़कर इसे असलियत में देखना एक बिल्कुल अलग अनुभव है.



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