कुदरत का करिश्मा है बलिया का ये चमत्कारी कुंड, जहां नहाने से दूर होते हैं चर्म रोग, सैकड़ों साल पुराना इतिहास

कुदरत का करिश्मा है बलिया का ये चमत्कारी कुंड, जहां नहाने से दूर होते हैं चर्म रोग, सैकड़ों साल पुराना इतिहास


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कुदरत का करिश्मा है बलिया का ये कुंड, जहां नहाने से दूर होते हैं चर्म रोग

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Ballia News: बलिया जनपद के बांसडीह में स्थित सैकड़ों साल पुराने प्राचीन कुंड और शिव मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं. यहां दूर-दराज से लोग स्नान करने पहुंचते हैं. आइए इस कुंड के बारे में सबकुछ जानते हैं.

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह क्षेत्र में स्थित सैकड़ों साल पुराना प्राचीन कुआं आज भी लोगों के लिए गहरी आस्था और बड़े रहस्यों का केंद्र बना हुआ है. सदियों पुराने इस कुएं को लेकर यह अद्भुत मान्यता है कि इसके पानी से स्नान करने मात्र से जिद्दी से जिद्दी चर्म रोग भी जड़ से खत्म हो जाते हैं. इस रहस्यमयी कुएं की खासियत यह है कि इसमें भरत कुंड समेत देश के कई बड़े और पवित्र तीर्थस्थलों का जल मिलाए जाने की बात कही जाती है. यही वजह है कि यहां केवल आसपास के जिले ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के राज्यों से भी लोग अपनी बीमारियों से मुक्ति पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं.

कुएं के भीतर भगवान शिव की एक अत्यंत प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जो इसकी पवित्रता और धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है. चित्रकूट में स्थित ऐतिहासिक भरत कूप कुंड और वहां बने शिव मंदिर की ख्याति भी दूर-दूर तक फैली हुई है. स्वामी ओम संत महाराज के अनुसार, चित्रकूट के इस भरत कूप की विशेष धार्मिक मान्यता है और पौराणिक कथाओं के आधार पर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से जो पवित्र जल और सामग्रियां लाई गई थीं. उन्हें इसी कूप में प्रवाहित किया गया था, जिसके बाद से इसका महत्व अनंत गुना बढ़ गया.

बिहार और अन्य राज्यों से चले आते हैं श्रद्धालु
इस कुंड के ठीक मध्य में भगवान शंकर की पावन मूर्ति स्थापित है, जो हमेशा आधे पानी में डूबी रहती है. इसके चमत्कारी प्रभाव के कारण उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के अलावा बिहार और अन्य कई राज्यों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं.

बलिया जनपद के बांसडीह बकवा के पतीसा गांव निवासी अखिलानंद पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कुंड सैकड़ों साल पुराना है और इसके समीप ही एक प्राचीन शिव मंदिर भी मौजूद है. उनके अनुसार, इस कुंड में सात समुद्र का जल छोड़ा गया है और यहां विधि-विधान से शिव जी की प्राण प्रतिष्ठा भी की गई है. ग्रामीण इस पवित्र स्थान से जुड़े कई चमत्कारों का आज भी खुलकर जिक्र करते हैं.

चर्म रोगों से हमेशा के लिए छुटकारा
चर्म रोग से मुक्ति की इस अटूट मान्यता के चलते जो भी पीड़ित व्यक्ति इस पावन कुंड में स्नान करता है, उसके शरीर के सारे चर्म रोग धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं. अन्य प्रदेशों से यहां स्नान करने आने वाले कई लोग यह दावा भी करते हैं कि उन्हें इस पानी से चर्म रोगों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यह कुंड लोगों के जन्मकाल से भी पहले का है और इसकी चमत्कारिक मान्यता पूरी तरह सत्य साबित होती है.

सुबह के वक्त किया जाता है स्नान
इस पवित्र कुंड में स्नान करने के लिए वैसे तो कोई विशेष या निश्चित दिन निर्धारित नहीं किया गया है, बल्कि मान्यता के अनुसार किसी भी दिन सुबह के वक्त इसमें स्नान किया जा सकता है. हालांकि रोगों से पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए इस पानी में लगातार 1 से 2 महीने तक स्नान करना पड़ता है. यह प्राचीन स्थल आज भी अपनी इन्हीं अनोखी विशेषताओं और चमत्कारों के बल पर लोगों की गहरी जिज्ञासा और अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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