गोंडा का खैरा भवानी मंदिर, जहां नवरात्रि में मुंडन संस्कार के लिए आते है लोग
Last Updated:
Khaira Bhawani Mandir Gonda: यूपी के गोंडा में स्थित प्राचीन खैरा भवानी मंदिर नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. यहां माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ बच्चों का मुंडन संस्कार कराने के लिए भी बड़ी संख्या में परिवार पहुंचते हैं. खास बात यह है कि गोंडा के अलावा बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती से भी लोग अपने बच्चों का मुंडन कराने माता के दरबार में आते हैं. मान्यता है कि यहां मुंडन संस्कार कराने से बच्चों को माता का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि यहां खैर के पेड़ में माता प्रकट हुई थीं, जिसके बाद इसका नाम खैरा भवानी पड़ा. आखिर नवरात्रि में इस मंदिर में मुंडन संस्कार कराने की परंपरा क्यों खास मानी जाती है और क्या है इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता? जानिए.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित खैरा भवानी मंदिर में नवरात्रि के दौरान माता के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस दौरान मंदिर में बच्चों का मुंडन कराने वाले परिवार भी नजर आते हैं. गोंडा के अलावा बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती से भी लोग अपने बच्चों को लेकर यहां आते हैं. इसके पीछे माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था और वर्षों से चली आ रही परंपरा जुड़ी हुई है.
मंदिर में बच्चों का मुंडन कराना कई परिवार शुभ मानते हैं. उनकी मान्यता है कि माता के दरबार में यह संस्कार कराने से बच्चे को माता का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में मुंडन संस्कार कराया जाता है. खैरा भवानी मंदिर के व्यवस्थापक रवि गिरी ने लोकल 18 से बातचीत में मंदिर की इस परंपरा और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में बताया.
नवरात्रि के नौ दिनों तक होता है मुंडन संस्कार
मंदिर के व्यवस्थापक रवि गिरी के मुताबिक, नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मंदिर में मुंडन संस्कार कराया जाता है. हिंदू धर्म में मुंडन बच्चे के प्रमुख संस्कारों में से एक माना जाता है. इसमें जन्म के बाद पहली बार बच्चे के बाल उतरवाए जाते हैं. खैरा भवानी मंदिर में भी लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है. परिवार अपनी धार्मिक मान्यताओं और पूर्वजों से चली आ रही परंपरा के अनुसार बच्चों का मुंडन कराने यहां पहुंचते हैं.
माता का आशीर्वाद मिलने की है मान्यता
खैरा भवानी मंदिर में मुंडन कराने के पीछे श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. मान्यता है कि माता के दरबार में बच्चे का मुंडन कराने से उसे माता का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इसी विश्वास के चलते कई परिवार बच्चे के जन्म के बाद मुंडन के लिए इस मंदिर को चुनते हैं. कुछ परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. ऐसे में माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ बच्चों का मुंडन कराना भी उनके लिए खास महत्व रखता है.
त्रेता युग से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
मंदिर के व्यवस्थापक रवि गिरी के अनुसार, खैरा भवानी मंदिर को त्रेता युग से जुड़ा हुआ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यहां खैर के पेड़ में माता प्रकट हुई थीं. इसी वजह से मंदिर का नाम खैरा भवानी पड़ा. समय के साथ यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.
गोंडा के साथ तीन जिलों से भी पहुंचते हैं परिवार
नवरात्रि के दौरान खैरा भवानी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. लोग माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ बच्चों का मुंडन संस्कार कराने भी पहुंचते हैं. गोंडा के अलावा बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती के परिवार भी यहां आते हैं. इस तरह मंदिर में मुंडन कराने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं और परिवारों के विश्वास से जुड़ी हुई है. श्रद्धालु अपने बच्चों के अच्छे भविष्य और सुखी जीवन की कामना के साथ माता के दरबार में पहुंचते हैं.