क्या दतिया में फिर से होंगे उपचुनाव? कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की क्यों बढ़ी चिंता, अब क्या हुआ?


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Ghanshyam Singh: दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट की तरफ से नोटिस जारी किया है. उनकी विधायकी पर बीजेपी नेता दीपक बेलपत्री ने एमपी हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. बीजेपी नेता ने दावा किया है. घनश्याम ने 1991 के एक मामले को चुनावी हलफनामे में नहीं बताया है. अब इस मामले को लेकर कोर्ट में सुनवाई होनी है. लेकिन नोटिस मिलने से घनश्याम की चिंता जरूरी बढ़ गई है.

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दतिया में फिर से होंगे उपचुनाव? कांग्रेस विधायक की क्यों बढ़ी चिंता, क्या हुआZoom

घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट से मिला नोटिस

Ghanshyam Singh: मध्य प्रदेश में अभी जून में दतिया उपचुनाव हुए थे, तब कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने आशुतोष तिवारी को शिकस्त दी थी. अब घनश्याम सिंह की विधायकी पर पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है. क्योंकि बीजेपी नेता दीपक बेलपत्री ने एमपी हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसके बाद दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है.

बीजेपी नेता ने हाईकोर्ट में लगाई है याचिका
बीजेपी नेता दीपक बेलपत्री ने जो याचिका लगाई है. उसमें आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है. अभी चुनावी हलफनामे में FIR का उल्लेख नहीं करने का दावा किया है. उनकी तरफ से बताया गया है कि चुनावी हलफनामे में 1991 में दर्ज FIR का जिक्र नहीं किया गया है. उस समय 22 लोगों पर FIR दर्ज हुई थी. तब राजीव गांधी की हत्या के संबंध में चक्काजाम किया गया था. फिर FIR में घनश्याम सिंह का भी नाम मौजूद था. याचिकाकर्ता का कहना है कि इस प्रकरण की जानकारी चुनावी शपथ पत्र में नहीं दी गई. इसी वजह से घनश्याम सिंह के विधायक चुने जाने को लेकर ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.

सिर्फ नोटिस नहीं करता है आरोपों की पुष्टि
अब 1991 के दिए गए शपथ पत्र में उल्लेख करना आवश्यक था या नहीं. इससे घनश्याम सिंह की विधायकी पर क्या प्रभाव पड़ेगा. यह कोर्ट की सुनवाई में तय होगा. कोर्ट ने उन्हें नोटिस जरूर जारी किया है. यह बात भी माननी होगी कि सिर्फ नोटिस जारी होना आरोपों की पुष्टि नहीं करता है. अगर कोर्ट में फैसला घनश्याम सिंह के हक में नहीं जाता है, तो दतिया में उपचुनाव की संभावना बन सकती है.

नरोत्तम मिश्रा का काट दिया गया था टिकट
साल 2023 में जब दतिया में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने जीत हासिल की थी और उन्होंने बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को शिकस्त दी थी. बाद में एक केस में फंसने की वजह से राजेंद्र भारती की विधायकी चली गई थी. इसके बाद उपचुनाव हुए. जहां जमकर हंगामा कटा था. सभी ये मानकर चल रहे थे कि बीजेपी नरोत्तम मिश्रा को टिकट देगी, लेकिन बीजेपी ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया था.

आशुतोष तिवारी को मिली थी हार
इसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने हाईवे को जाम कर दिया था और बीजेपी के खिलाफ ही जमकर नारेबाजी की थी. बाद में नरोत्तम को दिल्ली और भोपाल तलब किया गया था, तब जाकर मामला शांत हुआ था. लेकिन चुनाव में आशुतोष तिवारी को हार मिली थी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह जीत गए थे. बीजेपी में भीतरघात के आरोप भी लगे थे. अब घनश्याम की विधायकी पर संकट खड़ा हो गया है.



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