Ayushmann Khurrana Life Lessons: कई बार जिंदगी में सफलता पाने के लिए सिर्फ टैलेंट काफी नहीं होता. सही मौके का इंतजार करना, नाकामी से सीखना और अपने फैसलों पर भरोसा रखना भी जरूरी है. आयुष्मान खुराना की कहानी इन बातों को समझने का अच्छा उदाहरण है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रेडियो जॉकी के तौर पर की, टीवी पर होस्ट बने और फिर फिल्मों में अपनी पहचान बनाई.
उनकी पहली फिल्म ‘विकी डोनर’ ने उन्हें रातोंरात चर्चा में ला दिया, लेकिन इसके बाद उनकी कुछ फिल्में उम्मीद के मुताबिक नहीं चलीं. फिर भी उन्होंने अलग कहानियों को चुनना नहीं छोड़ा. उनके सफर से करियर, मेहनत और जिंदगी को लेकर 7 जरूरी बातें सीखी जा सकती हैं.
आयुष्मान खुराना की जिंदगी से सीखने वाली 7 बातें
1. रिजेक्शन मिलने पर खुद को कम न समझें
आयुष्मान खुराना का करियर शुरू से आसान नहीं था. उन्होंने 2023 में नवभारत टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें कई रियलिटी शोज में रिजेक्शन मिला. उन्होंने इन नाकामियों को अपनी राह का अंत मानने के बजाय आगे बढ़ने की वजह बनाया. साल 2004 में उन्होंने एमटीवी के रियलिटी शो ‘रोडीज’ का दूसरा सीजन जीता.
उनके सफर से सीख मिलती है कि किसी जगह मौका न मिलना आपकी काबिलियत का आखिरी फैसला नहीं है. नौकरी का इंटरव्यू हो, परीक्षा हो या कोई नया काम, एक नाकामी के बाद खुद को संभालना और अपनी तैयारी बेहतर करना जरूरी है.
2. करियर की शुरुआत छोटी हो, तो भी सीखना बंद न करें
फिल्मों में आने से पहले आयुष्मान रेडियो जॉकी और टीवी होस्ट के तौर पर काम कर चुके थे. उन्होंने रेडियो पर लोगों से बात करना, कैमरे के सामने सहज रहना और दर्शकों से जुड़ना सीखा. इसके बाद उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा.
उनका सफर बताता है कि हर काम आपको कुछ न कुछ सिखाता है. हो सकता है कि आपकी पहली नौकरी आपके सपनों जैसी न हो, लेकिन वहां मिले अनुभव आगे काम आ सकते हैं. शुरुआत कहां से हुई, इससे ज्यादा जरूरी है कि आप वहां से क्या सीखते हैं.
3. अलग रास्ता चुनने से डरें नहीं
साल 2012 में आयुष्मान ने फिल्म ‘विकी डोनर’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. फिल्म का विषय स्पर्म डोनेशन था, जिस पर उस समय आम फिल्मों में कम बात होती थी. आयुष्मान ने ऐसे विषय पर बनी फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई और अपने पहले ही फिल्मी काम से अलग पहचान बनाई. इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी मिला.
इससे सीख मिलती है कि हर बार भीड़ के पीछे चलना जरूरी नहीं है. अगर किसी काम के पीछे सोच और तैयारी है, तो नया रास्ता अपनाने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, अलग करने के लिए अलग होना ही काफी नहीं, काम की गुणवत्ता भी जरूरी है.
4. सफलता मिलने के बाद भी जमीन से जुड़े रहें
पहली फिल्म की कामयाबी के बाद आयुष्मान की अगली कुछ फिल्में, जैसे ‘नौटंकी साला’, ‘बेवकूफियां’ और ‘हवाईजादा’, बॉक्स ऑफिस पर वैसी सफलता हासिल नहीं कर सकीं. इसके बाद 2015 में आई ‘दम लगा के हईशा’ ने उनके करियर को फिर मजबूती दी.
यह सफर याद दिलाता है कि एक सफलता का मतलब यह नहीं कि आगे हर कदम आसान होगा. अच्छा नतीजा मिलने पर अपनी मेहनत जारी रखें और मुश्किल समय में अपनी कमियों को पहचानें. सफलता और नाकामी, दोनों को सीखने का मौका समझना ज्यादा फायदेमंद है.
5. अपनी कमियों को छिपाने के बजाय उन्हें समझें
आयुष्मान की फिल्म ‘बाला’ (2019) में बाल झड़ने और गंजेपन को लेकर लोगों की चिंता दिखाई गई. वहीं ‘दम लगा के हईशा’ में उन्होंने ऐसे युवक का किरदार निभाया, जो अपनी पत्नी के वजन को लेकर असहज रहता है. इन फिल्मों की कहानियां लोगों की उन परेशानियों को सामने लाती हैं, जिन पर बात करने से अक्सर लोग बचते हैं.
इन कहानियों से सीख मिलती है कि अपनी कमियों या असुरक्षाओं को स्वीकार करना खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम हो सकता है. दूसरों की राय के डर से खुद को कमतर न समझें. अपनी पहचान को सिर्फ लुक्स, कमियों या लोगों की टिप्पणियों तक सीमित न रखें.
6. लगातार सीखते रहें और अपनी स्किल्स बढ़ाएं
आयुष्मान सिर्फ एक्टर ही नहीं, सिंगर भी हैं. उनकी फिल्म ‘विकी डोनर’ का गाना ‘पानी दा रंग’ काफी लोकप्रिय हुआ और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड भी मिला. एक्टिंग के साथ संगीत में उनकी दिलचस्पी ने उनके करियर को एक अलग पहचान दी.
उनकी जिंदगी से यह सीख मिलती है कि अपनी एक स्किल पर निर्भर रहने के बजाय नई चीजें सीखना फायदेमंद हो सकता है. नौकरी में नई तकनीक सीखना, लिखने के साथ बोलने की कला सुधारना या अपने काम से जुड़ी दूसरी स्किल्स विकसित करना आगे बढ़ने में मदद कर सकता है.
7. अपने काम से जरूरी मुद्दों पर बात करें
आयुष्मान की कई फिल्मों ने मनोरंजन के साथ सामाजिक मुद्दों को भी उठाया है. ‘आर्टिकल 15’ में जातिगत भेदभाव, ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ में समलैंगिक रिश्तों और ‘बधाई हो’ में परिवार से जुड़े एक संवेदनशील विषय को दिखाया गया. इन फिल्मों ने आम जिंदगी से जुड़े उन मुद्दों पर चर्चा की, जिन पर समाज में अलग-अलग राय देखने को मिलती है.
इससे सीख मिलती है कि अपने काम के जरिए दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने की कोशिश की जा सकती है. जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति फिल्म बनाए या किसी बड़े मंच पर पहुंचे. शिक्षक अपने पढ़ाने के तरीके से, पत्रकार अपनी रिपोर्टिंग से और ऑफिस में काम करने वाला व्यक्ति अपने व्यवहार से भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है.
आयुष्मान खुराना की जिंदगी से क्या सीख मिलती है?
आयुष्मान खुराना का सफर बताता है कि करियर में आगे बढ़ने के लिए टैलेंट के साथ धैर्य, सीखने की इच्छा और सही फैसले लेना भी जरूरी है. रिजेक्शन के बाद दोबारा कोशिश करना, असफलता से सीखना और नए रास्ते अपनाना उनकी यात्रा के अहम पहलू हैं. उनकी जिंदगी से मिलने वाली ये 7 सीख काम, पढ़ाई और निजी जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती हैं.