रावण के पुतला दहन पर रोक लगाने के लिए किसने दी याचिका? बोला- ‘नौ ग्रहों को वश में करने वाले का अपमान क्यों…’

रावण के पुतला दहन पर रोक लगाने के लिए किसने दी याचिका? बोला- ‘नौ ग्रहों को वश में करने वाले का अपमान क्यों…’


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Haridwar News: हरिद्वार के एक अधिवक्ता ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर कर रावण दहन की परंपरा पर रोक लगाने की मांग की है. याचिका में रावण को प्रकांड विद्वान और शिवभक्त बताया गया है.

हरिद्वार: विजयदशमी यानी दशहरे के पर्व से ठीक पहले धर्मनगरी हरिद्वार में एक अनोखे मामले ने नई कानूनी और सामाजिक बहस छेड़ दी है. हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर देहात से शहरी क्षेत्र तक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले फूंके जाते हैं. कई दशकों से चल रही इस परंपरा के खिलाफ हरिद्वार के एक अधिवक्ता ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है.

याचिकाकर्ता के अनुसार, रावण एक प्रकांड विद्वान, शिवभक्त, 52 विद्याओं के ज्ञाता और लंकाधिपति थे, जिनके अधीन नौ ग्रह भी थे. ऐसे महाविद्वान, तपस्वी और बलशाली का पुतला दहन करना मानवाधिकारों के खिलाफ है. दशहरे से ऐन पहले उठी इस मांग ने सबको चौंका दिया है.

विद्वान व्यक्ति का सम्मान होना बेहद जरूरी
इस बारे में जब हमने हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि समाज में विद्वान व्यक्ति का सम्मान होना बेहद जरूरी है. रावण भी एक विद्वान व्यक्ति थे. उन्होंने कहा कि रावण ने भले ही राक्षस कुल में जन्म लिया हो, लेकिन वे महान विद्वान, वेद-पुराणों के ज्ञाता और भगवान शिव के सबसे बड़े भक्त थे. शिव तांडव स्तोत्र की रचना भी रावण ने की थी.

लंकाधिपति रावण नारी का सम्मान करते थे, जिसका प्रमाण है कि जब रावण माता सीता को लेकर आए थे तो उन्होंने सीता को अपने महल के पास रखा था, लेकिन कभी छुआ नहीं था. अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने कहा कि रावण इतने विद्वान थे कि जब भगवान राम के हवन किया था, तो रावण को भी आचार्य के रूप में आमंत्रित किया गया था. ऐसे ज्ञानी, बलशाली का हर साल पुतला दहन करना गलत है.

उच्च न्यायालय का करेंगे रूख
अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने आगे जानकारी दी कि इस गलत परम्परा के आधार पर उन्होंने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है. इस याचिका में राज्य शासन के कई प्रमुख सचिवों और उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाया गया है, ताकि पुतला दहन की इस परंपरा पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जा सके. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में रावण के ज्ञान, नीतियों और नारी सम्मान को पढ़ाया जाना चाहिए. अरुण भदौरिया ने आगे कहा कि यदि मानवाधिकार आयोग इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाता है तो वह इस परंपरा पर रोक लगवाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेंगे.



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