भूतों को खुश करने के लिए बिहार में यहां चढ़ता है खून और मदिरा? बिखरी रहती हैं पशु-पक्षियों की लाशें, नजारा देख कांप उठेंगे आप

भूतों को खुश करने के लिए बिहार में यहां चढ़ता है खून और मदिरा? बिखरी रहती हैं पशु-पक्षियों की लाशें, नजारा देख कांप उठेंगे आप


रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में एक ऐसा धार्मिक स्थल है. जहां की मान्यताएं और परंपराएं लोगों को हैरान कर देती हैं. नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. कोई अपनी परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर आता है, तो कोई परिवार की सुख-शांति के लिए पूजा-अर्चना करता है. इस स्थान पर भूत-प्रेत से जुड़ी मान्यताओं, तांत्रिक क्रियाकलापों और पशु-पक्षियों की बलि की परंपरा के कारण मेले का माहौल आम धार्मिक आयोजनों से काफी अलग नजर आता है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं रोहतास जिले के संझौली प्रखंड अंतर्गत रौनी गांव स्थित घिन्हू बरहम बाबा स्थान की. जहां हर साल लगने वाला भूतों का मेला स्थानीय आस्था और परंपराओं के कारण चर्चा में रहता है.

सदियों पुरानी मान्यताओं से जुड़ा है स्थल

यहां के स्थानीय लोगों के अनुसार, घिन्हू बरहम बाबा स्थान पर पूजा-अर्चना की परंपरा कई सदियों से चली आ रही है. इस स्थान को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. खासकर वह लोग यहां पहुंचते हैं, जो खुद को भूत-प्रेत की बाधा से परेशान मानते हैं या जीवन में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के दरबार में पूजा-अर्चना करने और मन्नत मांगने से उनकी परेशानियां दूर होती हैं. इसी विश्वास के चलते नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दराज के गांवों और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.

बलि की परंपरा से जुड़ी हैं मान्यताएं

घिन्हू बरहम बाबा स्थान की पहचान पशु-पक्षियों की बलि से जुड़ी परंपराओं के कारण भी है. मेले के दौरान परिसर और आसपास के कुछ हिस्सों में बलि के बाद पशु-पक्षियों के अवशेष दिखाई देते हैं. इसे देखकर पहली बार यहां पहुंचने वाले लोग हैरान रह जाते हैं. स्थानीय मान्यताओं में खून और मदिरा को कुछ अनुष्ठानों से जोड़कर देखा जाता है. इसी वजह से इस स्थान को लेकर लोगों के बीच रहस्य और कौतूहल बना रहता है. हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं और अनुष्ठानों को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग धारणाएं हैं.

यहां रोते हुए आते हैं श्रद्धालु

यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मानें तो वे अपनी परेशानियों से छुटकारा पाने की उम्मीद लेकर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं. किसी को परिवार में चल रही समस्याओं से मुक्ति की आस होती है, तो कोई मानसिक बेचैनी और कथित प्रेत बाधा से राहत पाने की कामना करता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के माध्यम से उन्हें शांति मिलती है. इसी आस्था के कारण मेले में लोगों की भीड़ जुटती है और पूरे दिन धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं.

15 साल से जुड़े हैं पुजारी विनोद राम

पुजारी विनोद राम के अनुसार, घिन्हू बरहम बाबा की कृपा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है. उन्होंने बताया कि कई लोग अपनी परेशानियों से व्याकुल होकर यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना के बाद राहत मिलने का अनुभव बताते हैं. विनोद राम के मुताबिक वह स्वयं पिछले 15 वर्षों से इस स्थान से जुड़े हुए हैं. यहां पूजा-पाठ के माध्यम से रूठे हुए देवी-देवताओं को मनाने और श्रद्धालुओं की समस्याओं के समाधान की कामना की जाती है. उनका कहना है कि लोग विश्वास के साथ यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं बाबा के सामने रखते हैं.

नवरात्रि में बदल जाता है गांव का माहौल

नवरात्रि का समय आते ही रौनी गांव स्थित इस धार्मिक स्थल पर चहल-पहल बढ़ जाती है. सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है. मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और विभिन्न अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहता है. कोई परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचता है, तो कोई अपनी मन्नत पूरी होने की उम्मीद में यहां आता है. आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा दूर-दराज से आने वाले लोगों के कारण मेले में काफी भीड़ देखने को मिलती है.

आस्था, परंपरा और रहस्य का अनोखा संगम

घिन्हू बरहम बाबा स्थान केवल एक धार्मिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय लोकविश्वास और पुरानी परंपराओं से जुड़ा स्थल भी है. यहां लगने वाला मेला एक ओर लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है, तो दूसरी ओर बलि और कथित तांत्रिक अनुष्ठानों से जुड़े दृश्य लोगों के बीच जिज्ञासा पैदा करते हैं. पशु-पक्षियों के अवशेष और भूत-प्रेत से जुड़ी मान्यताएं इस मेले को अलग पहचान देती हैं. यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान रौनी गांव का यह स्थल आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना रहता है.



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