World Students’ Day 2026 : साइंटिस्ट और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 15 अक्टूबर को जयंती होती है. जिसे भारत वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे के तौर पर सेलिब्रेट करता है. हालांकि यूएन ने वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे 17 अक्टूबर को घोषित किया है. लेकिन आज डॉ. कलाम की 95वीं जयंती है. इस मौके पर हम जानेंगे उनकी स्टूडेंट्स लाइफ के दिलचस्प किस्से. जिसमें झलकता है उनका संघर्ष, जिज्ञासु प्रवृति और सीखने की गहरी ललक.
तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में जन्मे कलाम के लिए शिक्षा सिर्फ स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं रही. वह जीवन भर पक्षियों से लेकर बच्चों तक से हमेशा सीखते रहे. आइए जानते हैं ‘मिसाइल मैन’ की स्टूडेंट लाइफ के कुछ किस्से.
1. स्कूली पढ़ाई के साथ बांटे अखबार
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक गरीब परिवार में जन्मे थे. ऐसे में उन्होंने रामेश्वरम में बचपन में अपने चचेरे भाई के साथ अखबार भी बांटने का काम करते थे. इससे उन्हें कम उम्र में ही काम और जिम्मेदारी का अनुभव मिला.
2. गणित के टीचर ने पूरे स्कूल के सामने की थी तारीफ
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्कूल में एक दिन गलती से उस कक्षा में चले गए, जहां उनके गणित के टीचर रामकृष्ण अय्यर दूसरे बच्चों को पढ़ा रहे थे. शिक्षक ने अनुशासनहीनता के लिए उन्हें सबसे सामने दंड दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. कुछ महीनों बाद कलाम ने जब गणित में पूरे मार्क्स हासिल किए, तो उसी टीचर ने स्कूल की मॉर्निंग असेंबली में उनकी प्रशंसा की. उन्होंने भविष्यवाणी की कि यह विद्यार्थी अपने स्कूल और शिक्षकों का नाम रोशन करेगा. डॉ. कलाम इस वाकये का जिक्र अपनी आत्मकथा Wings of Fire में किया है.
3. पक्षियों को उड़ते देख जागी उड़ान की जिज्ञासा
डॉ. कलाम को बचपन से ही आकाश में उड़ते पक्षियों को देखना बहुत पसंद था. उनकी आत्मकक्षा में शिक्षक शिवसुब्रमण्यम अय्यर का जिक्र मिलता है जिन्होंने विद्यार्थियों को पक्षियों के उड़ने की प्रक्रिया समझाई.
उन्होंने पक्षियों के उड़ने के तरीके के बारे में सिर्फ कक्षा में जानकारी नहीं दी. बल्कि वह बच्चों को लेकर समुद्र किनारे गए. जहां कलाम के मन में उड़ान और एयरोनॉटिक्स में गहरी दिलचस्पी हुई. जिसने आगे चलकर उन्हें मिसाइल मैन बना दिया.
4. धर्म के आधार पर अलग बैठाने का विरोध
कलाम के स्कूल के दिनों में एक नए शिक्षक ने उन्हें, जो मुस्लिम परिवार से थे, हिंदू पुजारी के बेटे रामनाथ शास्त्री से अलग बैठने को कहा. दोनों बचपन से साथ बैठते थे और अच्छे मित्र थे. रामनाथ शास्त्री के पिता लक्ष्मण शास्त्री, जो रामेश्वरम मंदिर के प्रमुख पुजारी थे, को जब इस घटना का पता चला तो उन्होंने शिक्षक को बुलाकर इस भेदभाव का विरोध किया. शिक्षक को अपना व्यवहार सुधारने के लिए कहा गया.यह घटना भी कलाम की आत्मकथा में दर्ज है.
5. प्रोजेक्ट पूरा न होने पर स्कॉलरशिप छिनने का डर
डॉ. कलाम जब मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से इंजीनियरिंग पढ़ रहे थे, तो एक बार उनकी स्कॉलरशिप खतरे में पड़ गई थी. उन्हें प्रोजेक्ट वर्क में एक विमान के डिजाइन से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम करना था. उनके हिस्से आई थी विमान की एयरोडायनॉमिक्स डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी. प्रोजेक्ट की प्रगति से संस्थान के डायरेक्टर और उनके डिजाइन टीचर प्रोफेसर श्रीनिवासन संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने कलाम को चेतावनी दी कि अगर सोमवार तक डिजाइन का ड्रॉइंग पूरा नहीं हुआ, तो स्कॉलरशिप रोक दी जाएगी.
डॉ. कलाम के लिए स्कॉलरशिप लाइफलाइन की तरह थी. उन्होंने पूरी मेहनत से काम किया और तय समय सीमा के भीतर डिजाइन तैयार हो गई. उनके इस काम से प्रभावित होकर प्रोफेसर ने प्रशंसा की. यह प्रसंग भी Wings of Fire में दर्ज है.
6. तमिल में लिखा प्लेन बनाने पर लेख
MIT चेन्नई में पढ़ाई के दौरान कलाम ने तमिल भाषा में Let Us Make Our Own Aircraft शीर्षक से एक लेख लिखा था. जो तमिल भाषा में साइंस और टेक्नोलॉजी पर लिखने में उनकी दिलचस्पी दिखाता है. कलाम ने यह लेख MIT के तमिल साहित्यिक संगठन की निबंध प्रतियोगिता के लिए लिखा था. उनकी रचना को प्रथम पुरस्कार मिला, जो लोकप्रिय तमिल साप्ताहिक Ananda Vikatan के संपादक ‘देवन’ ने प्रदान किया.