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Muskan Sahil Death Penalty: नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को मेरठ कोर्ट ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को मौत की सजा सुनाई. हालांकि दोनों को बरसों इस सजा का इंतजार करना पड़ सकता है. डेथ पेनाल्टी इन इंडिया की एनुअल स्टैटिक्स रिपोर्ट 2025 के मुताबिक मुस्कान और साहिल से पहले ही 574 लोग फांसी के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
मुस्कान रस्तोगी और साहिल ने मिलकर सौरभ (बीच में) की हत्या की थी. दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई.
Blue Drum Murder Case Verdict: मेरठ में नीले ड्रम हत्याकांड में कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई गई है. अब सवाल ये है कि आखिर उन्हें ये सजा दी कब जाएगी. दरअसल भारत में मुस्कान और साहिल से पहले ही तकरीबन 574 लोग फांसी की कतार में हैं. डेथ पेनाल्टी इन इंडिया की एनुअल स्टैटिक्स रिपोर्ट 2025 के मुताबिक 2016 के बाद फांसी का इंतजार कर रहे लोगों की ये सबसे ज्यादा संख्या है. इनमें कई अपराधी ऐसे भी हैं जो बरसों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
मुस्कान और साहिल ने 2025 में मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी. इसके बाद दोनों ने बड़ी हैवानियत के साथ शव के पांच टुकड़े किए थे और उन्हें नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से जमा दिया था. कोर्ट ने 13 महीने में तकरीबन 126 बार मामले को सुना. कोर्ट में 22 गवाहों की मदद से ये साबित हुआ कि हत्या मुस्कान और साहिल ने ही की थी. जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने जब बुधवार को दोनों को सजा सुनाई तो कोर्ट में भारत माता की जय के नारे लगे. वकीलों ने कहा कि यह सजा अपराधियों के लिए एक संदेश है. दोनों को जो सजा सुनाई है, उसके मुताबिक मुस्कान-साहिल को तब तक फंदे पर लटाया जाना है, जब तक उनकी मौत न हो जाए.
फांसी की कतार में कितने अपराधी?
भारत में फांसी सिर्फ रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामलों में दी जाती है. पिछले कुछ समय से ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. हालांकि सिर्फ फांसी की सजा सुनाए जाने से सजा दिए जाने तक एक लंबी प्रक्रिया होती है. ऐसे में मुस्कान ओर साहिल को फांसी की सजा दिए जाने का नंबर कब तक आएगा ये तय नहीं है. मुस्कान और साहिल से पहले भी तकरीबन 574 लोग फांसी का इंतजार कर रहे हैं. यह आंकड़ा डेथ पेनाल्टी इन इंडिया की एनुअल स्टैटिक्स रिपोर्ट 2025 में बताया गया है. स्क्वायर सर्कल क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के अंत तक इतने लोग फांसी की कतार में है. इनमें अब वो मामले भी शामिल हो चुके हैं जिन्हें इस साल फांसी की सजा सुनाई गई है.
पिछले साल सुनाईं गईं थी सबसे ज्यादा फांसी की सजा
डेथ पेनाल्टी इन इंडिया की एनुअल स्टैटिक्स रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में देश की निचली अदालतों ने सबसे ज्यादा 128 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई. रिपोर्ट में ये दावा किया गया कि निचली अदालतों द्वारा मौत की सजा दिए जाने की संख्या बढ़ने और उच्च अदालतों में मामलों के निपटारे में देरी की वजह से मौत की सजा का इंतजार कर रहे कैदियों की संख्या बढ़ती जा रही है. देश में अगर प्रदेश वाइज फांसी का इंतजार करने वालों की बात की जाए तो इसमें उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है. इसके बाद गुजरात और हरियाणा का नंबर आता है.
बरी होने वालों की संख्या भी बहुत
रिपोर्ट में पिछले दस साल में फांसी की सजा पाने वालों को बरी किए जाने का आंकड़ा भी दिया गया है. इसके मुताबिक पिछले दस सालों में देश भर के हाईकोर्टों ने 285 ऐसे लोगों को बरी किया है जिन्हें निचली अदालत की ओर से सजा सुनाई गई थी. इनमें कई ऐसे लोग भी थे जिन्हें औसतन नौ साल से ज्यादा मौत की सजा का इंतजार किया और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दे दी. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस साल में हाईकोर्टों ने फांसी की सजा पाए 842 मामलों की सुनवाई की. इनमें से 70 मामलों में मौत की सजा की पुष्टि की, जबकि 285 को बरी कर दिया. 411 मामले ऐसे रहे, जिनमं मौत की सजा को किसी दूसरी सजा में बदल दिया गया.
मुस्कान-साहिल के पास कई विकल्प
मुस्कान और साहिल के पास भी फांसी की सजा से बचने के कई रास्ते है. दरअसल निचली अदालत द्वारा सुनाए गए फांसी की सजा के किसी भी मामले को हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना पूरा नहीं किया जा सकता. यानी मामला हाईकोर्ट तक जाना ही है. यहां दोबारा साक्ष्यों की जांच होगी. हाईकोर्ट की ओर से पुष्टि होने के बाद फांसी का रासता साफ हो जाएगा. बशर्ते दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील न करे. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से वहां फिर से मामले की सुनवाई होगी. अगर वहां से भी सजा की पुष्टि कर दी जाती है तो फिर दोषियों के पास दयायाचिका ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा.