कभी नारद मुनि तो कभी सुग्रीव, अब राजा दशरथ के किरदार से पहचान बना चुके हैं झामन शर्मा, छू लिया सबका दिल

कभी नारद मुनि तो कभी सुग्रीव, अब राजा दशरथ के किरदार से पहचान बना चुके हैं झामन शर्मा, छू लिया सबका दिल


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Barmer Ramleela News: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जीवनगाथा जब रामलीला के मंच पर साकार होती है, तो कलाकारों का अभिनय दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति करा देता है. बाड़मेर की ऐतिहासिक रामलीला में राजा दशरथ का किरदार निभाने वाले झामन शर्मा भी ऐसे ही कलाकार हैं. जिनका अभिनय दर्शकों के हृदय को छू जाता है.

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बाड़मेर. बाड़मेर की ऐतिहासिक रामलीला में जब झामन शर्मा राजा दशरथ के रूप में पुत्र श्रीराम के वियोग की पीड़ा को मंच पर साकार करते हैं तो दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं. यूनाइटेड इंश्योरेंस इंडिया कंपनी से सेवानिवृत्त झामन शर्मा पिछले 36 वर्षों से इस किरदार को जीवंत कर रहे हैं. उनके लिए रामलीला महज अभिनय नहीं बल्कि प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था, भक्ति और समर्पण की साधना है.

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जीवनगाथा जब रामलीला के मंच पर साकार होती है तो कलाकारों का अभिनय दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति करा देता है. बाड़मेर की ऐतिहासिक रामलीला में राजा दशरथ का किरदार निभाने वाले झामन शर्मा भी ऐसे ही कलाकार हैं जिनका अभिनय दर्शकों के हृदय को छू जाता है. यूनाइटेड इंश्योरेंस इंडिया कंपनी से सेवानिवृत्त झामन शर्मा पिछले 36 वर्षों से लगातार राजा दशरथ के किरदार को जीवंत कर रहे हैं.

1978 में पहली बार बाड़मेर में शुरू हुई रामलीला, 1979 में जुड़े रामलीला से
वर्ष 1978 में मथुरा से आई प्रसिद्ध रामलीला मंडली के मंचन से प्रेरित होकर झामन शर्मा के मन में रामलीला से जुड़ने की इच्छा जगी और वर्ष 1979 में बाड़मेर में स्थानीय स्तर पर रामलीला मंचन की शुरुआत हुई तब से रामकथा और रंगमंच से जुड़े हुए है.1979 में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लेहरचंद जैन थे और अब वर्तमान में प्रदीप कुमार जोशी के हाथों में इसकी बागडोर है. दशरथ के अलावा वे देवर्षि नारद, देवराज इंद्र, वानरराज सुग्रीव, भक्त केवट और लक्ष्मण का किरदार भी निभा चुके हैं.

नारद मुनि से सुग्रीव तक, कई किरदारों में दिखाई अभिनय प्रतिभा
पिछले 36 वर्षों से महाराजा दशरथ के रूप में विशेष पहचान बना चुके झामन शर्मा का अभिनय सफर केवल एक किरदार तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने रामलीला के मंच पर अलग-अलग भूमिकाओं में आकर अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया है. झामन शर्मा पहले देवर्षि नारद, देवराज इंद्र, वानरराज सुग्रीव, भक्त केवट और अनुज लक्ष्मण के किरदारों को उन्होंने मंच पर साकार किया है.

बाड़मेर की जनता का प्यार
राजा दशरथ का किरदार निभा रहे झामन शर्मा बताते है कि मंच पर किसी भी किरदार को जीवंत करने के लिए बड़े साधनों या भौतिक चकाचौंध की जरूरत नहीं होती है. असली ताकत कलाकार की भावना, संवेदना और समर्पण में होती है. जब अंतरात्मा से भक्ति और कला का मिलन होता है तो अभिनय सीधे दर्शकों के हृदय तक पहुंचता है. वे बताते है कि 36 साल से वे राजा दशरथ बन रहे है इसके पीछे बाड़मेर की जनता का प्यार है जो उन्हें हर समय प्रेरित करता है.



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