कौन हैं IAS योगेश कुमार? रिटायरमेंट के बाद पहुंचे जेल, लगे पशुधन भर्ती घोटाले के आरोप

कौन हैं IAS योगेश कुमार? रिटायरमेंट के बाद पहुंचे जेल, लगे पशुधन भर्ती घोटाले के आरोप


Retired IAS Yogesh Kumar: देश में सरकारी नौकरी पाने के लिए लाखों युवा दिन-रात मेहनत करते हैं. ऐसे में अगर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप सामने आएं, तो उम्मीदवारों के भरोसे पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उत्तर प्रदेश में साल 2014 में हुई पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती का मामला भी कुछ ऐसा ही है. इस मामले में अब रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान तय नियमों का पालन नहीं किया गया और उम्मीदवारों की आंसर-शीट की जांच में गड़बड़ी की गई.

दरअसल, योगेश कुमार 1980 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं. भर्ती के समय वह पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे. वहीं, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर 1,198 पदों पर हुई भर्ती और उसमें कथित गड़बड़ियों की चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में आइए जानते हैं रिटायर्ड IAS योगेश कुमार कौन हैं, उनके खिलाफ क्या आरोप हैं और यह पूरा मामला क्या है.

कौन हैं रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश कुमार?

योगेश कुमार उत्तर प्रदेश कैडर के 1980 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने राज्य सरकार में कई जिम्मेदारियां संभालीं. वह पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर भी रहे. इसी पद पर रहते हुए साल 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती की गई थी.

इस भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान योगेश कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में आई. जांच एजेंसियों ने भर्ती से जुड़े फैसलों, चयन प्रक्रिया और नियमों के पालन की पड़ताल की. इस दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी.

हालांकि, योगेश कुमार अब IAS सेवा से रिटायर हो चुके हैं. लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी भर्ती से जुड़े इस पुराने मामले में उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं. उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उन्हें लखनऊ के गोमती नगर इलाके से गिरफ्तार किया है. EOW के महानिदेशक जे. एन. सिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि की. एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई.

क्या है साल 2014 का पशुधन भर्ती घोटाला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1,198 पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है. साल 2014 में जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, उस समय यह भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई थी. परीक्षा 2 फरवरी 2014 को आयोजित हुई थी. भर्ती में प्रदेश के 17 मंडलों को शामिल किया गया था.

भर्ती के बाद चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप सामने आए. जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि उम्मीदवारों के चयन में तय नियमों का पालन हुआ था या नहीं. वहीं, जांच में कथित तौर पर कई ऐसी अनियमितताएं सामने आईं, जिनसे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए.

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह था कि उम्मीदवारों की आंसर-शीट (Answer Sheet) की जांच किस तरह की गई और चयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल कैसे किया.

भर्ती प्रक्रिया में कैसे हुई कथित गड़बड़ी?

दरअसल, जांच के दौरान उम्मीदवारों की ओएमआर (OMR) शीट की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठे. ओएमआर शीट वह आंसर-शीट होती है, जिसमें उम्मीदवार सवालों के जवाब के विकल्पों को गोले भरकर चुनते हैं. ऐसी शीट की जांच में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है, क्योंकि इसी के आधार पर उम्मीदवारों के अंक तय होते हैं.

आरोप है कि भर्ती के नियमों के अनुसार अलग-अलग स्तर पर काम करने वाली चयन समितियों की भूमिका को दरकिनार किया गया. OMR शीट की जांच को एक ही जगह केंद्रित कर दिया गया, जबकि प्रक्रिया में तय व्यवस्था के मुताबिक काम किया जाना चाहिए था.

जांच एजेंसियों को आशंका थी कि इस तरह की व्यवस्था से उम्मीदवारों के अंकों में हेरफेर की गुंजाइश पैदा हुई. मामले की जांच के दौरान डॉक्यूमेंट्स और फॉरेंसिक जांच से जुड़ी रिपोर्टों का भी सहारा लिया गया. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.

योगेश कुमार की गिरफ्तारी क्यों हुई?

योगेश कुमार भर्ती के समय पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव थे. इसलिए जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक फैसलों में उनकी क्या भूमिका थी. जांच के दौरान उनके खिलाफ सबूत मिलने की बात सामने आने के बाद कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए गए.

अप्रैल 2023 में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने योगेश कुमार, तत्कालीन पशुपालन मंत्री राजकिशोर सिंह और दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ सबूत मिलने की जानकारी दी थी. इन लोगों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी लेने की प्रक्रिया भी चर्चा में रही थी.

अब EOW ने योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई कई साल से चल रही जांच में एक अहम घटनाक्रम है. हालांकि, गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं है कि उन्हें दोषी साबित कर दिया गया है. उनके खिलाफ लगे आरोपों पर फैसला अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.

पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह का भी आया था नाम

इस मामले में तत्कालीन पशुपालन मंत्री राजकिशोर सिंह का नाम भी सामने आया था. साल 2014 में भर्ती के दौरान वह अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री थे.

अप्रैल 2023 की रिपोर्ट्स में बताया गया था कि जांच के दौरान राजकिशोर सिंह समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भी सबूत मिलने की बात सामने आई थी. उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सरकार से मंजूरी मांगे जाने की जानकारी भी दी गई थी. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके मामले में मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया लंबित रही है.

इससे साफ है कि जांच सिर्फ परीक्षा आयोजित करने या आंसर-शीट की जांच करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रही. एजेंसियों ने उस समय विभाग में जिम्मेदार पदों पर रहे वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की.

दस साल से ज्यादा पुराना है मामला

पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती का मामला साल 2014 में शुरू हुआ था, लेकिन कथित गड़बड़ियों की जांच कई वर्षों तक चलती रही. रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने साल 2018 में अपनी जांच रिपोर्ट और साल 2021 में अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपी थी. इन रिपोर्ट्स में भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों के उल्लंघन की बात सामने आने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने का जिक्र किया गया था.

अब रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश कुमार की गिरफ्तारी ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया है. यह मामला सरकारी भर्ती में पारदर्शिता, अधिकारियों की जवाबदेही और चयन प्रक्रिया में तय नियमों के पालन से जुड़ा है. आगे की कानूनी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि जांच में सामने आए आरोपों पर अदालत क्या निष्कर्ष निकालती है.



Source link