भरतपुर. पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना पर हुए हमले के मामले में फायरिंग को लेकर अब नया ट्विस्ट आ गया है. अब तक पुलिस जिस घटना में गोली चलने की बात को नकार रही थी, वहां फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की जांच में कारतूस के दो खोल मिलने की जानकारी सामने आई है. ये खोल देसी कट्टे का अनुमान लगाया जा रहा है. इससे हमले के दौरान फायरिंग होने के दावे को बल मिला है. हालांकि, मौके पर गोली किसने चलाई और किस पक्ष की ओर से फायरिंग हुई, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है. जांच के बाद ही वारदात की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
11 अक्टूबर की शाम हुए वारदात के बाद से ही फायरिंग को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे थे. पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश ने हमले के दौरान गोली चलने की बात कही थी, जबकि पुलिस की ओर से अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की जा रही थी. घटनास्थल से दो कारतूस के खोल मिलने की जानकारी सामने आने के बाद जांच की दिशा में यह एक अहम सबूत माना जा रहा है. हालांकि, केवल खोल मिलने से यह तय नहीं हुआ है कि फायरिंग किसने की थी और उसका निशाना कौन था.
CCTV फुटेज से खुल सकती है कड़ियां
मामले की जांच कर रही पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज जुटाने का प्रयास कर रही है. इसके लिए पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है. बताया जा रहा है कि उनके पास मौजूद डीवीआर में घटना से संबंधित रिकॉर्डिंग हो सकती है. यदि फुटेज मिलती है, तो हमले के दौरान मौजूद लोगों की गतिविधियों और वारदात के क्रम को समझने में मदद मिल सकती है. जांच के दौरान घटनास्थल पर किसी दीवार या वाहन पर गोली लगने के निशान नहीं मिले हैं. ऐसे में कारतूस के खोल मिलने के बावजूद फायरिंग की दिशा और उसमें शामिल व्यक्ति की पहचान अभी बाकी है. पुलिस इन तथ्यों को जोड़कर मामले की पड़ताल कर रही है.
दो दिन के पुलिस रिमांड पर पांच आरोपी
मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों भागमल, सोनी, शेरसिंह, बलदेव और कुंवरसिंह को बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट सुविहाय हाफिज सिद्दकी के समक्ष पेश किया गया. पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ और मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने के लिए तीन दिन का रिमांड मांगा था. अदालत ने पांचों आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया. पुलिस ने बुधवार को भी अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी, लेकिन अन्य आरोपी हाथ नहीं लगे.
सोशल मीडिया पोस्ट और सुरक्षाकर्मियों के वीडियो भी जांच के दायरे में
पुलिस अब घटना से पहले सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट और पूर्व विधायक के कुछ सुरक्षाकर्मियों के वीडियो की भी जांच कर रही है. पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से लीज के रास्ते को लेकर सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट साझा की जा रही थीं. सात अक्टूबर को घटना से जुड़े धरना स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने की बात भी सामने आई है. इसके अलावा, पूर्व विधायक के कुछ सुरक्षाकर्मियों के वीडियो के जरिए लोगों को उकसाने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस वायरल वीडियो की पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले माहौल किस तरह बना और विवाद को बढ़ाने में किन लोगों की भूमिका रही.
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