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Jaipur Bhaitaratiya Bhairu Temple: जयपुर ग्रामीण के कालवाड़ में स्थित भैतरतीय भैरू मंदिर 72 मूर्तियों की अनोखी विशेषता के लिए प्रसिद्ध है. सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. सावन और भादवा के महीनों में यहां विशेष यात्राएं आती हैं और भक्तों का तांता लगा रहता है. यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था और प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का एक प्रमुख केंद्र है, जहां परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगी जाती हैं.
जयपुर: जयपुर ग्रामीण के कालवाड़ क्षेत्र में स्थित भैतरतीय भैरू मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां एक ही स्थान पर कुल 72 मूर्तियां विराजमान हैं. स्थानीय परंपरा और मान्यताओं के अनुसार, मूर्तियों की इसी संख्या के आधार पर इस पवित्र स्थल का नाम भैतरतीय भैरू मंदिर पड़ा है. अपनी इसी खास विशेषता और चमत्कारी स्वरूप के चलते यहां स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी रोजाना भारी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.
मंदिर के पुजारी रामकिशोर भोपा ने जानकारी देते हुए बताया कि भैतरतीय भैरू मंदिर सैकड़ों साल पुराना प्राचीन धार्मिक स्थल है. शुरुआती समय में यहां एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था, लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे बाबा भैरूनाथ के प्रति लोगों की श्रद्धा और आस्था बढ़ती गई, वैसे-वैसे इस स्थान का जीर्णोद्वार करवाया गया. जीर्णोद्वार के बाद इस मंदिर को एक भव्य और विशाल रूप दिया गया. आज यह मंदिर केवल कालवाड़ और उसके आसपास के गांवों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपनी भव्यता और दिव्यता के कारण प्रदेशभर में एक प्रसिद्ध आस्था का धाम बन चुका है.
सावन और भादवा मास में उमड़ती है विशेष भीड़
भैतरतीय भैरू मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन और भादवा के पवित्र महीनों में यहां का धार्मिक माहौल पूरी तरह से अलग और अलौकिक होता है. इन दोनों महीनों में राजस्थान के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में पदयात्राएं और धार्मिक जत्थे मंदिर पहुंचते हैं. यात्राओं के दौरान श्रद्धालु बाबा भैरूनाथ के जयकारे लगाते हुए मंदिर में प्रवेश करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. इन विशेष दिनों में मंदिर परिसर में भक्तों की भारी चहल-पहल और उत्साह का माहौल देखने को मिलता है, जहां लोग समूहों में आकर अपनी मन्नतें मांगते हैं.
72 मूर्तियों की अनोखी और दुर्लभ पहचान
इस मंदिर की सबसे विशिष्ट पहचान यहां स्थापित 72 मूर्तियां हैं, जो इसे क्षेत्र के अन्य तमाम मंदिरों से बिल्कुल अलग और अनूठा बनाती हैं. एक ही प्रांगण में इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियों का होना शोधकर्ताओं और धार्मिक पर्यटकों के लिए भी कौतुक का विषय रहता है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस दुर्लभ विशेषता के दर्शन करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ भैरूजी के समक्ष नतमस्तक होकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं.
सांस्कृतिक जुड़ाव और धार्मिक महत्व
कालवाड़ क्षेत्र में स्थित भैतरतीय भैरू मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थल मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्षों पुरानी लोक संस्कृति और गहरी धार्मिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है. स्थानीय निवासियों के लिए यह मंदिर उनके सुख-दुख का साथी और सामाजिक एकता का बड़ा माध्यम है. अपनी अनूठी पहचान, 72 मूर्तियों के रहस्य और भक्तों की अटूट निष्ठा के बल पर यह मंदिर आज मेवाड़ और ढूंढाड़ अंचल की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती से संजोए हुए है.