SIR: दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे डीके शिवकुमार, उधर बेंगलुरु में छात्रों और पत्रकारों पर बरसा पुलिस का डंडा


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दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे DK, लेकिन बेंगलुरु में छात्रों पर बरसा डंडा

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Bengaluru SIR Protest: दिल्ली में लोकतंत्र और अधिकारों की दुहाई, तो बेंगलुरु में छात्रों और पत्रकारों पर खाकी की सख्ती. कर्नाटक सरकार का यह दोहरा रुख खुलकर सामने आ गया. एक तरफ राज्य के शीर्ष नेता राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर पुलिसिया दमन और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के विरोध मार्च की अगुवाई कर रहे थे. वहीं उनकी अपनी ही जमीन पर पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को घसीटकर हिरासत में ले लिया.

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दिल्ली में एसआईआर के खिलाफ मार्च में राहुल गांधी के साथ डीके शिवकुमार.

बेंगलुरु. कर्नाटक की सत्ता के दो अलग-अलग चेहरे 12 अक्टूबर को खुलकर सामने आ गए. एक तरफ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खरगे दिल्ली की सड़कों पर उतरकर एसआईआर और पुलिसिया दमन के खिलाफ विपक्षी मार्च की अगुवाई कर रहे थे. दूसरी तरफ उनकी अपनी ही राजधानी बेंगलुरु में खाकी का बेखौफ रूप देखने को मिला. बेंगलुरु पुलिस ने न केवल चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दर्जनों छात्रों को घसीटकर हिरासत में ले लिया, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम को कैमरे में कैद कर रहे फोटो पत्रकारों के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की.

यह पूरा ड्रामा फ्रीडम पार्क से महज एक किलोमीटर दूर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के ठीक सामने स्थित एसजेपी कॉलेज के बाहर हुआ. छात्र और कार्यकर्ता वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) को तुरंत रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सीईओ दफ्तर की तरफ कूच कर रहे थे.

चश्मदीदों के मुताबिक, वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने अचानक प्रदर्शनकारियों को घेर लिया. इस दौरान कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों के कैमरे छीनने की कोशिश हुई और पत्रकारों पर हमला बोला गया. अपने ही राज्य में प्रेस और छात्रों पर हुए इस पुलिसिया एक्शन ने कांग्रेस सरकार के दोहरे मापदंडों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.



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