Why Saudi Arabia Warning System Failed: महंगे-महंगे डिफेंस सिस्टम बने कचरा रियाद हमले से पहले अलर्ट तक नहीं 4 दिन में ही दग गए अमेरिकी पटाखे?


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Why Saudi Arabia Warning System Failed: सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर जब हमले हो रहे थे, तो आखिर लोगों को पहले से वॉर्निंग क्यों नहीं मिली? ये सवाल सभी के दिमाग में खटक रहा है. चलिए जानते हैं कि आखिर इस खामोशी के पीछे की वजह क्या थी और क्या वाकई सऊदी अरब हूतियों से लड़ने में अपनी ताकत खो रहा है?

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महंगे-महंगे डिफेंस सिस्टम बने कचरा, रियाद हमले से पहले अलर्ट तक नहीं? Zoom

क्यों सऊदी अरब के डिफेंस सिस्टम हुए फेल. (रॉयटर्स)

Saudi Arabia-Houthi Conflict: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में लगातार हो रहे हमलों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि हमले के वक्त अलर्ट क्यों नहीं जारी किया गया? जिस देश ने लोगों को मिसाइल हमलों से सावधान करने के लिए मोबाइल अलर्ट सिस्टम शुरू किया था, उसी देश में हवाई अड्डे पर हमलों से पहले सार्वजनिक चेतावनी जारी नहीं की गई. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब के अलर्ट सिस्टम में आई इस खामोशी ने चिंता और बढ़ा दी है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए. पिछले एक सप्ताह में रियाद पर 4 हमले होने की बात भी सामने आई है. हालांकि सऊदी अधिकारियों ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि इन हमलों से पहले लोगों के मोबाइल फोन पर चेतावनी संदेश क्यों नहीं भेजे गए. जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें साफ देखा जा सकता है कि लोगों को बिल्कुल अंदाजा नहीं था, जब एयरपोर्ट पर मिसाइलें गिरीं. ऐसे में सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ना जायज है.

आखिर क्यों बंद हुए मोबाइल अलर्ट?

सऊदी अरब ने मई में नेशनल इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम शुरू की थी. इसका उद्देश्य संभावित खतरे की जानकारी मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाना था, ताकि वे समय रहते सतर्क हो सकें. अब रॉयटर्स के मुताबिक रियाद एयरपोर्ट पर हमलों से पहले यह व्यवस्था सार्वजनिक चेतावनी जारी नहीं कर रही थी. सऊदी नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण के एक्स अकाउंट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आखिरी सार्वजनिक अलर्ट 29 सितंबर को दक्षिणी प्रांत नजरान के लिए जारी किया गया था. इतना ही नहीं  दो अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि एक पश्चिमी देश की सरकार ने भी सऊदी अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया था. इसके जवाब में कहा गया कि अलर्ट लोगों की दिनचर्या में बाधा डाल रहे थे और कुछ लोगों ने रात में फोन पर चेतावनी मिलने की शिकायत की थी.

कैसे खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे लोग?

अमेरिका में रहने वाले सऊदी एक्सपर्ट सुल्तान अलामेर के मुताबिक रियाद सैन्य कार्रवाई करने के साथ-साथ लोगों और विदेशी निवेशकों को भरोसा भी दिलाना चाहता है कि देश सुरक्षित है. सऊदी अरब के पूर्व अमेरिकी राजदूत माइकल रैटनी ने भी चेताया कि हमलों के अलर्ट रोकने से चिंता कम होने के बजाय बढ़ सकती है. लोगों को खतरे की जानकारी नहीं मिलेगी, तो वे अपनी सुरक्षा के लिए समय पर कदम कैसे उठाएंगे?

युद्ध शुरू भी नहीं हुआ और मिसाइलें खत्म?

सऊदी एक्सपर्ट अली शिहाबी के मुताबिक देश का विशाल क्षेत्र और तेल प्रतिष्ठानों, पाइपलाइनों तथा हवाई अड्डों जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों की बड़ी संख्या सुरक्षा को कठिन बनाती है. उनके मुताबिक हर जगह एक साथ सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त पैट्रियट सिस्टम, मिसाइल इंटरसेप्टर और एयर डिफेंस बैटरियां उपलब्ध नहीं हैं. यही वजह है कि सऊदी अब दूसरे देशों से मदद मांग रहा है.



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