10 रुपये किलो भाव पर भी नहीं होता घाटा, किसान ने बताया बैंगन की खेती का मंत्र
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Brinjal Cultivation: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में किसान प्रभुनाथ कश्यप आधुनिक तकनीकों और मल्चिंग विधि से बैंगन की खेती कर रहे हैं. लागत निकलने के बाद उन्हें इस फसल से अच्छी कमाई की उम्मीद है.
Baingan Ki Kheti: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक किसान आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके बैंगन की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. किसान प्रभुनाथ कश्यप मल्चिंग विधि और ग्राफ्टेड पौधों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत निकल चुकी है और उन्हें आगे बंपर कमाई की उम्मीद है. लोकल 18 की टीम ने बस्तर के किसान प्रभुनाथ कश्यप से बातचीत की. प्रभुनाथ कश्यप एक एकड़ जमीन पर 312 वैरायटी के बैंगन की हाईटेक खेती कर रहे हैं. खेत की दो से तीन बार जुताई करने के बाद रोटावेटर चलाया गया और नर्सरी में तैयार पौधों को रोपा गया. पौधे से पौधे की दूरी चार फीट और बेड से बेड की दूरी पांच फीट रखी गई है.
खाद और देखभाल
इस खेती में डीएपी, पोटाश, सुपर फॉस्फेट और गोबर की खाद का प्रयोग किया गया है. फसल में सबसे ज्यादा फल और तने में छेदक कीट का प्रकोप होता है, जिससे बचाव के लिए कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है. किसान का कहना है कि ग्राफ्टेड पौधों का उपयोग करने से बीमारियों का प्रकोप कम होता है और उत्पादन बहुत अच्छा होता है.
लागत और मुनाफा
प्रभुनाथ कश्यप ने बैंगन की खेती में लगभग 50 से 70 हजार रुपये तक खर्च किए हैं और बिक्री से पूरी लागत रिकवर कर चुके हैं. फसल सात महीने में फल देना शुरू कर देती है और तीन से चार महीने तक फल देती है. बाजार में अभी बैंगन का भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो चल रहा है.
किसान का मानना है कि बैंगन का थोक भाव 10 रुपये किलो रहने पर भी घाटा नहीं होता है क्योंकि इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. लागत निकलने के बाद उन्हें इस फसल से डेढ़ से दो लाख या कुल दो से ढाई लाख रुपये तक की कमाई होने की उम्मीद है.