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Balod Rural Women Employment: बालोद के झलमला स्थित NTFP प्रोसेसिंग यूनिट में महिलाओं को बिना लागत लगाए कमाई का अवसर मिल रहा है. महिलाएं इमली का अचार और कैंडी तैयार कर रही हैं. एक किलो अचार बनाने पर 50 रुपये मिलते हैं. रोजाना चार महिलाएं काम कर रही हैं. इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को अतिरिक्त आय मिल रही है और वन उपज का वैल्यू एडिशन हो रहा है.
Balod Rural Women Employment: बालोद जिले के झलमला स्थित NTFP (गैर काष्ठ वन उपज) प्रोसेसिंग यूनिट में ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का नया अवसर मिल रहा है. जंगलों और ग्रामीण अंचलों में मिलने वाली इमली, बेर जैसी वन उपज को खरीदकर उसकी सफाई और वैल्यू एडिशन के जरिए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. खास बात यह है कि यहां काम करने वाली महिलाओं को अपनी ओर से कोई लागत नहीं लगानी पड़ती. वे अपने श्रम के आधार पर कमाई कर रही हैं. इन दिनों यूनिट में महिलाएं इमली का अचार और इमली की कैंडी बनाने में जुटी हुई हैं.
सक्रिय महिला लक्ष्मी उइके ने बताया कि बालोद जिले के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाली इमली एवं बेर को खरीदकर यूनिट में लाया जाता है. इसके बाद वन उपज की अच्छी तरह सफाई की जाती है और खराब इमली को अलग किया जाता है. इमली के अचार को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें सरसों, जीरा, नमक, सरसों तेल और विभिन्न प्रकार के मसाले मिलाए जाते हैं. गृहणी महिलाएं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हुए पूरे अचार को तैयार करती हैं.
इस काम में महिलाओं को उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पाद की मात्रा के हिसाब से भुगतान किया जाता है. एक किलो इमली का अचार तैयार करने पर महिला को 50 रुपये मिलते हैं. फिलहाल यूनिट में रोजाना चार महिलाएं सक्रिय रूप से काम कर रही हैं.
रोजाना तैयार हो रहे अचार और कैंडी
सक्रिय महिला कंचन साहू ने बताया कि इमली का अचार तैयार करने में काफी मेहनत लगती है. सबसे पहले इमली की अच्छी तरह सफाई की जाती है और खराब इमली को अलग किया जाता है. इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत अचार तैयार किया जाता है. महिलाओं के अनुसार, यूनिट में रोजाना लगभग 17 किलो इमली की कैंडी और 28 किलो तक इमली का अचार तैयार किया जा रहा है.
महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का सहारा
NTFP प्रोसेसिंग यूनिट में शुरू हुई यह गतिविधि महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है. बिना पूंजी निवेश किए काम करने और मेहनत के हिसाब से पैसे मिलने से महिलाएं खुश हैं. वन उपज का वैल्यू एडिशन होने से स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो रहा है. इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही स्थानीय वन उत्पादों को नए स्वरूप में बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं.