Surat migrant workers Gaon Chalo Andolan। Why UP Bihar workers leaving Surat। सूरत छोड़कर गांव क्यों लौट रहे UP-बिहार के 10 लाख मजदूर? स्टेशन पर भीड़


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सूरत छोड़कर गांव क्यों लौट रहे UP-बिहार के 10 लाख मजदूर? स्टेशन पर भारी भीड़

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Surat Migrant Workers Gaon Chalo Andolan: गुजरात के सूरत में यूपी और बिहार के लाखों मजदूरों ने ‘गांव चलो आंदोलन’ शुरू कर दिया है. 12-12 घंटे काम कराने के बावजूद वीकली ऑफ न मिलना, छुट्टियां मांगने पर सैलरी काटना और नौकरी से निकालने जैसी प्रताड़ना से तंग आकर मजदूर अपने गांवों की तरफ लौट रहे हैं. लेबर यूनियन भी मजदूरों के समर्थन में उतर आई है. यदि स्थितियां नहीं सुधरीं तो सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भारी संकट आ सकता है.

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सूरत छोड़कर गांव क्यों लौट रहे UP-बिहार के 10 लाख मजदूर? स्टेशन पर भारी भीड़Zoom

सूरत से मजदूर पलायन कर रहे हैं. (Instagram)

गुजरात के डायमंड और कपड़ा हब सूरत में इस वक्त कुछ ऐसा हो रहा है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. यूपी और बिहार के लाखों मजदूर अचानक सूरत छोड़कर अपने-अपने गांव लौटने लगे हैं. सूरत रेलवे स्टेशन पर मजदूरों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है और प्लेटफॉर्म्स पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई हैं. आखिर सूरत की चमक-धमक को छोड़कर ये लोग गांव लौटने पर मजबूर क्यों हो रहे हैं? आइए जानते हैं इस ‘गांव चलो आंदोलन’ के पीछे की पूरी सच्चाई.

हफ्तों की कड़ी मेहनत, न छुट्टी और न सम्मान
सूरत में काम करने वाले मजदूरों का आरोप है कि यहां फैक्ट्रियों में उनका जबरदस्त मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है. 12-12 घंटे की कठिन शिफ्ट करने के बाद भी न तो उन्हें समय पर पूरी सैलरी मिलती है और न ही हफ्ते में एक दिन की वीकली ऑफ. मजदूरों का कहना है कि महीने के पूरे 30 दिन लगातार काम करने का दबाव बनाया जाता है. अगर कोई वर्कर थकान या बीमारी की वजह से छुट्टी मांगता है तो सीधे उसकी सैलरी काट ली जाती है या उसे नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है.

‘गुलाम बनने से अच्छा है गांव में खेती करें’

स्टेशन पर घर लौटने का इंतजार कर रहे मजदूरों का गुस्सा और दर्द साफ नजर आया:

• सैलरी रोककर नौकरी से निकाला: अयोध्या के मजदूर प्रेमचंद्र और अन्य वर्करों ने बताया कि जब उन्होंने हफ्ते में एक रविवार की छुट्टी मांगी तो पहले तो मालिक दिलासा देते हैं लेकिन बाद में अपनी बात से मुकर जाते हैं. कई वर्करों को सिर्फ हफ्ते में एक छुट्टी मांगने पर नौकरी से निकाल दिया गया और उनकी रुकी हुई सैलरी भी नहीं दी गई.

• रेत में खीरा उगा लेंगे, पर अब नहीं सहेंगे अत्याचार: प्रयागराज के बृजेश निषाद का कहना है कि वे सूरत में 4-5 महीने से काम कर रहे थे, पर छुट्टी मांगने पर सैलरी काट ली जाती थी. उन्होंने भावुक होकर कहा, “सूरत में गुलाम बनने से तो अच्छा है कि हम गांव जाकर खेती कर लें या रेत में खीरा उगाकर गुजारा कर लें!”
• 26 दिन काम करेंगे, 30 दिन नहीं: मजदूर शिववंदन कुमार ने गुस्से में कहा कि मालिक 30 दिन काम का प्रेशर डालते हैं. जब हमने 26 दिन ड्यूटी की बात कही तो हमें सीधे गेट से बाहर निकाल दिया गया. अब जब सेठों को हमारी जरूरत होगी और वे बुलाएंगे, तभी आएंगे, लेकिन 30 दिन काम कभी नहीं करेंगे.

लेबर यूनियन का सपोर्ट
मजदूरों के इस बड़े पलायन को देखते हुए लेबर यूनियन भी उनकी मदद के लिए मैदान में उतर आई है. लेबर यूनियन के प्रतिनिधि अजय डी. दुबे ने बताया कि ‘गांव चलो आंदोलन’ के तहत लाखों मजदूर वापस लौट रहे हैं. यूनियन की टीम रेलवे स्टेशन पर मजदूरों को पानी और बिस्किट मुहैया करा रही है और फैक्ट्री मालिकों के इस रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध जता रही है. सूरत की एम्ब्रॉयडरी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की रीढ़ यही मजदूर हैं. अगर फैक्ट्री मालिकों ने मजदूरों की हफ्ते में एक छुट्टी और सम्मानजनक व्यवहार की वाजिब मांगों को जल्द नहीं माना तो आने वाले दिनों में कारीगरों की भारी कमी के कारण सूरत की ये चमकती हुई इंडस्ट्री बड़े संकट में फंस सकती है.





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