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Kota Students Plight Ground Report: मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए देशभर से कोटा आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अब सड़क की बदहाल स्थिति से भी जूझना पड़ रहा है. लैंडमार्क सिटी में जगह-जगह गंदगी, टूटी सड़कें, गड्ढे, धूल और ट्रैफिक जाम उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या प्रभावित कर रहे हैं. विद्यार्थियों के अनुसार, कोचिंग से हॉस्टल या पीजी लौटते समय जाम में समय बर्बाद होता है, जबकि उड़ती धूल से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की आशंका बनी रहती है. कोचिंग की छुट्टी के समय भीड़ बढ़ने से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है. स्टूडेंट्स ने संबंधित विभागों से सड़क की मरम्मत, नियमित सफाई और ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधारने की मांग की है. उन्होंने कारों के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाने, सड़क किनारे पेड़ लगाने और धूल नियंत्रित करने के लिए वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने का सुझाव भी दिया है.
कोटा. देशभर से हजारों स्टूडेंट्स मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने के लिए कोटा आते हैं. यहां उनका पूरा फोकस पढ़ाई, टेस्ट सीरीज और डेली स्टडी रूटीन पर रहता है. लेकिन कोचिंग तक पहुंचने के रास्ते ही अब उनकी परेशानी बढ़ा रहे हैं. लैंडमार्क सिटी में कई जगह गंदगी का अंबार लगा रहता है. वहीं दूसरी ओर टूटी सड़कें, गड्ढे, उड़ती धूल और ट्रैफिक जाम स्टूडेंट्स की डेली लाइफ को प्रभावित कर रहे हैं. कोचिंग की छुट्टी के समय सड़क पर भीड़ बढ़ने से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है. स्टूडेंट्स का कहना है कि कोचिंग जाने और वापस हॉस्टल या पीजी लौटने के दौरान उन्हें रोजाना धूल और जाम का सामना करना पड़ता है. इससे न केवल उनका समय खराब होता है, लेकिन हेल्थ और स्टडी रूटीन पर भी असर पड़ता है.
गड्ढों से गिरने का डर, ट्रैफिक मैनेजमेंट भी जरूरी
स्टूडेंट हर्षित ने बताया कि कोचिंग टाइम पर सड़क पर वाहनों और स्टूडेंट्स की भीड़ बढ़ जाती है. ऐसे में धूल के साथ एक्सीडेंट का खतरा भी बना रहता है. उन्होंने कहा कि कोचिंग की छुट्टी के समय ट्रैफिक रूट में बदलाव किया जाना चाहिए. कारों के लिए दूसरा रास्ता होना चाहिए, जिससे भीड़ कम हो सकती है और स्टूडेंट्स को राहत मिल सकती है. खराब सड़क पर स्कूटी चलाना मुश्किल हो जाता है. गड्ढों के कारण गिरने का डर बना रहता है. स्टूडेंट्स ने सड़क किनारे अधिक पेड़ लगाने और संज्ञान बिल्डिंग के बाहर लैंडमार्क रोड पर वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने का सुझाव भी दिया, ताकि उड़ती धूल को कंट्रोल किया जा सके.
स्टूडेंट्स बोले- पढ़ाई के लिए आए हैं, धूल खाने नहीं
स्टूडेंट राम ने बताया कि वह रोजाना इसी रास्ते से कोचिंग के लिए जाते हैं. टूटी सड़क, धूल और ट्रैफिक जाम के कारण स्टूडेंट्स को परेशानी होती है. उन्होंने मांग की कि सड़क को जल्द दुरुस्त किया जाए और ट्रैफिक मैनेजमेंट में सुधार किया जाए. स्टूडेंट्स का कहना है कि कोटा में उनका डेली रूटीन पहले से ही काफी बिजी रहता है. सुबह कोचिंग, दिनभर क्लास और टेस्ट की तैयारी के बाद हॉस्टल या पीजी लौटते समय सड़क पर जाम और धूल का सामना करना पड़ता है. ऐसे में कोचिंग एरिया में बेहतर रोड कनेक्टिविटी, क्लीन एनवायरनमेंट और स्मूद ट्रैफिक जरूरी है. स्टूडेंट्स की मांग है कि संबंधित विभाग जल्द एक्शन लेकर सड़क की मरम्मत, रेगुलर क्लीनिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की व्यवस्था सुधारें, ताकि कोटा आने वाले स्टूडेंट्स को बेहतर स्टडी एनवायरनमेंट मिल सके.