महंगा खाद नहीं, आलू उबालकर बनाएं ये पावरफुल अनोखा जैविक खाद, सीतामढ़ी के किसान प्रमोद महतो से जानें पूरी विधि

महंगा खाद नहीं, आलू उबालकर बनाएं ये पावरफुल अनोखा जैविक खाद, सीतामढ़ी के किसान प्रमोद महतो से जानें पूरी विधि


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Sitamarhi Agriculture News: बिहार के सीतामढ़ी के किसान प्रमोद महतो ने उबले आलू और फलों से अनोखी जैविक खाद जैव रसायन बनाने का तरीका साझा किया है. यह खाद फसलों की पैदावार और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में बेहद कारगर है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

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सीतामढ़ी: ​कृषि के क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अब किसान जैविक और प्राकृतिक विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इसी कड़ी में बिहार के सीतामढ़ी के किसान प्रमोद महतो ने जैविक खाद बनाने का एक अनोखा और असरदार तरीका साझा किया है. उन्होंने बताया कि उबले हुए आलू और फलों के सही मिश्रण से तैयार की गई खाद को ‘जैव रसायन’ (Bio-enzyme) कहा जाता है. यह जैविक खाद न केवल फसलों को पोषण प्रदान करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने में बेहद कारगर साबित होती है.

​जैव रसायन बनाने का जानें सही प्रक्रिया

​किसान प्रमोद महतो के अनुसार, इस जैविक खाद को तैयार करने के लिए एक विशेष अनुपात का पालन किया जाता है. इसमें 1:3:10 का फॉर्मूला इस्तेमाल होता है, जिसमें 1 किलो गुड़ (मीठा), 3 किलो फल या उबला हुआ आलू और 10 लीटर पानी मिलाया जाता है. आलू से खाद बनाने के लिए सबसे पहले आलू को अच्छी तरह उबाल लिया जाता है. इसके बाद आलू का छिलका हटाकर उसे बारीक पीस कर लिया जाता है. अगर फलों जैसे बेल या सेब का उपयोग कर रहे हैं, तो उन्हें काटकर इस मिश्रण में तैयार किया जाता है. गुड़ को भी पानी में उबालकर ठंडा कर लिया जाता है, जिससे घोल की शेल्फ लाइफ (आयु) बढ़ जाती है और खाद लंबे समय तक खराब नहीं होती है.

जानें ​मुख्य स्टॉक और मिश्रण की तैयारी

​सामग्री तैयार होने के बाद, एक 10 लीटर की बाल्टी या ड्रम में 1 किलो गुड़ का उबला घोल, 3 किलो पीसा हुआ उबला आलू (या फल) और 10 लीटर पानी डालकर अच्छी तरह मिला दिया जाता है. इस मिश्रण को लगभग तीन महीने (90 दिन) के लिए ढककर रख दिया जाता है, जिससे इसमें उपयोगी जीवाणु और एंजाइम तैयार हो जाते हैं. तीन महीने बाद यह मुख्य स्टॉक (मदर लिक्विड) बनकर तैयार हो जाता है. किसान अपने पास लहसुन, खैनी या अन्य फलों के भी अलग-अलग स्टॉक बनाकर रखते हैं.

जानें ​खेतों में उपयोग का सही तरीका

इस ​तैयार मुख्य स्टॉक में से 1 लीटर घोल निकालकर उसे 200 लीटर पानी के बड़े ड्रम में मिलाया जाता है. इसमें फिर से 2 किलो गुड़ मिलाकर 10 दिनों के लिए फर्मेंटेशन के लिए छोड़ दिया जाता है. इसके बाद 10 कट्ठा जमीन के लिए 10 लीटर इस तैयार घोल को सिंचाई के पानी के साथ फसलों में दिया जाता है. जैसे बेल आधारित घोल पोटाश की कमी पूरी करता है, वैसे ही आलू से तैयार जैव रसायन फसलों में प्लांट ग्रोथ हार्मोन्स को बढ़ावा देता है. इससे पौधों का तेजी से विकास होता है, पैदावार में भारी बढ़ोतरी होती है और फसलों को बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.



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