देवभूमि के 24 शक्तिपीठ: नवरात्र पर करें कुमाऊं और गढ़वाल के इन 24 प्रसिद्ध देवी मंदिरों के दर्शन, पूरी होगी मनोकामना

देवभूमि के 24 शक्तिपीठ: नवरात्र पर करें कुमाऊं और गढ़वाल के इन 24 प्रसिद्ध देवी मंदिरों के दर्शन, पूरी होगी मनोकामना


हल्द्वानी: देवभूमि उत्तराखंड का हर कोना आध्यात्मिक ऊर्जा और अलौकिक आस्था से ओत-प्रोत है. हिमालय की शांत वादियों में बसी मां भगवती की शक्ति यहां के कण-कण में महसूस होती है. नवरात्र के पावन पर्व पर तो इन शक्तिपीठों की छटा और दिव्यता देखते ही बनती है. यदि आप भी इस पावन अवसर पर मां के दर्शन का संकल्प ले रहे हैं, तो आइए जानते हैं कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में स्थित मां भगवती के उन 24 प्रमुख सिद्ध शक्ति केंद्रों के बारे में, जहां मां साक्षात रूप में विराजमान हैं,

कुमाऊं मंडल के 12 प्रमुख देवी मंदिर

हाटकालिका मंदिर, गंगोलीहाट
माता भगवती महाकालिका का यह दरबार दिव्य चमत्कारों से भरा पड़ा है. कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रद्धापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के पुष्प अर्पित करता है, उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं विपदाएं दूर हो जाती हैं.

पूर्णागिरी मंदिर, टनकपुर
प्रसिद्ध सिद्धपीठों में से एक मां पूर्णागिरी का यह मंदिर टनकपुर से लगभग 21 किमी की दूरी पर स्थित है. नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं.

वाराही मंदिर, देवीधुरा
चंपावत जिले के देवीधुरा में मां वाराही देवी के मंदिर के प्रांगण में हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को ‘बग्वाल’ खेली जाती है.

गर्जिया देवी मंदिर, गर्जिया (नैनीताल)
गर्जिया देवी मंदिर माता पार्वती के प्रमुख मंदिरों में से एक है. यह मंदिर भक्तों की श्रद्धा एवं विश्वास के साथ खूबसूरत वातावरण, शांति एवं रमणीयता के लिए जाना जाता है.

कोटगाड़ी (कोकिला) देवी मंदिर, पिथौरागढ़
थल से 9 किमी की दूरी पर स्थित कोटगाड़ी देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. इस मंदिर की मान्यता ‘अंतिम दिव्य अदालत’ के रूप में है, जहां वंचित भक्त भगवान से अपनी इच्छाओं को पूरा करने की प्रार्थना करने आते हैं.

नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा
कुमाऊं क्षेत्र के पवित्र स्थलों में से एक नंदा देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है. इसका इतिहास 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है. कुमाऊंनी शिल्पविद्या शैली से निर्मित यह मंदिर चंद वंश की ईष्ट देवी को समर्पित है.

दूनागिरी मंदिर, द्वाराहाट
मां दूनागिरी मंदिर द्वाराहाट से करीब 14 किमी की दूरी पर स्थित है. इस भव्य मंदिर में मां दूनागिरी वैष्णवी रूप में पूजी जाती हैं.

कसार देवी मंदिर, अल्मोड़ा
अल्मोड़ा में कसार पर्वत पर स्थित कसार देवी मंदिर अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र है. कहा जाता है कि इस शक्तिपीठ में मां दुर्गा साक्षात् प्रकट हुई थीं.

कोट भ्रामरी मंदिर, बागेश्वर
कोट भ्रामरी मंदिर को भ्रामरी देवी मंदिर और कोट माई नाम से भी जाना जाता है. यह बैजनाथ से 3 किमी की दूरी पर डंगोली के समीप स्थित है.

चैती (बाल सुंदरी) मंदिर, काशीपुर
माता चैती (बाल सुंदरी) मंदिर काशीपुर में स्थित है. यहां चैती मेला के नाम से चैत्र मास में प्रसिद्ध मेला लगता है. आदिशक्ति की बाल रूप में पूजा होने के कारण इसे बाल सुंदरी मंदिर कहा जाता है.

नैना देवी मंदिर, नैनीताल
नैना देवी मंदिर नैनीताल में नैनी झील के उत्तरी किनारे पर स्थित है. यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है. मंदिर में दो नेत्र हैं जो नैना देवी को दर्शाते हैं. यह मंदिर आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में स्थापित किया था.

अखिलतारणी मंदिर, लोहाघाट (चंपावत)
अखिलतारणी मंदिर को उप शक्तिपीठ माना जाता है जो घने हरे देवदार वनों के बीच में स्थित है. मान्यता के अनुसार यहां पांडवों ने घटोत्कच का सिर पाने के लिए मां भगवती की प्रार्थना की थी.

गढ़वाल मंडल के 12 प्रमुख देवी मंदिर

धारी देवी मंदिर, श्रीनगर
अलकनंदा नदी के तट पर स्थित धारी देवी मंदिर प्राचीन सिद्धपीठ है. धारी देवी को उत्तराखंड की रक्षक देवी के रूप में जाना जाता है.

हरियाली देवी मंदिर, जसोली (रुद्रप्रयाग)
यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है. प्रसिद्ध सिद्धपीठों में से एक इस मंदिर की देवी को सीता माता, बाला देवी और वैष्णो देवी के नाम से भी जाना जाता है.

कालिंका माता मंदिर, बीरोंखाल (पौड़ी गढ़वाल)
पौड़ी जिले में स्थित कालिंका माता मंदिर को मां काली का स्वरूप माना जाता है. यहां हर 3 साल में सर्दियों के मौसम में प्रसिद्ध मेला लगता है.

नंदा देवी मंदिर, कुरुड़ (चमोली)
कुरुड़ में नंदा देवी का मंदिर गांव के शीर्ष पर देवसारी तोक पर स्थित है. कुरुड़ नंदा को राजराजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है.

माया देवी मंदिर, हरिद्वार
माया देवी हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी हैं. माया देवी को शक्ति का अवतार माना जाता है. माया देवी के नाम पर ही हरिद्वार को पहले मायापुरी के नाम से जाना जाता था.

कालीमठ मंदिर, रुद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित कालीमठ मंदिर को महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के सिद्धपीठ के रूप में जाना जाता है. इस स्थान का वर्णन दुर्गा सप्तशती में भी है.

ज्वालपा देवी मंदिर, सतपुली
यह मंदिर नयार (नबालिका) नदी के तट पर स्थित है. नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन होता है.

नागणी देवी मंदिर, उत्तरकाशी
यह मंदिर बालखिला पर्वत पर स्थित है. नवरात्र के दिनों में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

चन्द्रबदनी मंदिर, देवप्रयाग
यह शक्तिपीठ चंद्रकूट पर्वत के ऊपर स्थित 52 शक्तिपीठों और माता सती के पवित्र स्थलों में से एक है.

सुरकंडा देवी मंदिर, कद्दूखाल (टिहरी)
सुरकंडा देवी मंदिर टिहरी क्षेत्र के सुरकूट पर्वत पर स्थित है. यह मंदिर प्रसिद्ध 52 शक्तिपीठों में से एक है.

कुंजापुरी देवी मंदिर, नरेंद्र नगर
ऋषिकेश से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित कुंजापुरी देवी मंदिर देवी सती को समर्पित है. मान्यता है कि यहां माता सती के शरीर का ऊपरी भाग गिरा था.

चंडी देवी मंदिर, हरिद्वार
देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल चंडी देवी मंदिर नील पर्वत के शिखर पर स्थित है. यह मंदिर प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है. मान्यता है कि इस मंदिर की मूर्ति को आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में स्थापित किया था.



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