मंदिर में पुजारी थे पिता, जानें अनिरुद्धाचार्यजी के कथावाचक बनने का सफर
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Aniruddhacharya Ji Struggle: एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले अनिरुद्धाचार्य महाराज के पिता गांव के मंदिर में पुजारी थे और परिवार के भरण-पोषण के लिए घर-घर जाकर सत्यनारायण भगवान की कथा किया करते थे. पिता के संस्कारों और धार्मिक माहौल के बीच पले-बढ़े अनिरुद्धाचार्य ने भी कथावाचन के मार्ग को अपनाया. अपनी अनूठी शैली और कथा कहने के सरल अंदाज से आज वे देश के जाने-माने और लोकप्रिय कथावाचक बन चुके हैं.
गांव में घर-घर जाकर सुनाते थे सत्यनारायण भगवान की कथा
अनिरुद्धाचार्य ने इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता गांव के मंदिर में पुजारी थे. बचपन में वह खुद गांव में घर-घर जाकर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाया करते थे. जब लोग उनकी कथा की तारीफ करते थे, तो उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनाने की प्रेरणा मिली. उन्होंने बताया कि भागवत कथा का पाठ करने के लिए उन्हें इसे अच्छी तरह सीखने की जरूरत महसूस हुई. इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की और कथा का अध्ययन किया. अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, वह 17 जुलाई 2006 को पहली बार वृंदावन भागवत कथा पढ़ने के लिए आए थे. इसके बाद उन्होंने अपने पिता से स्पष्ट कह दिया कि अब उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का पाठ ही करना है और वह कोई दूसरी शिक्षा नहीं लेना चाहते. इसी संकल्प के साथ उन्होंने कथा वाचन को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया.
कथा से होने वाली कमाई को सेवा में लगाया
अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि शुरुआती दिनों में जब वह कहीं कथा करने जाते थे, तो वहां गरीब कन्याओं के विवाह करवाने में मदद करते थे. धीरे-धीरे जब उनकी कथाओं की संख्या बढ़ने लगी, तो उनकी आमदनी भी बढ़ने लगी. उन्होंने बताया कि एक समय उन्हें महसूस हुआ कि उनकी जरूरत से ज्यादा पैसा उनके पास आ रहा है. ऐसे में उन्होंने इस धन को अपने ऊपर खर्च करने के बजाय जरूरतमंदों की सेवा में लगाने का निर्णय लिया.
अनिरुद्धाचार्य के अनुसार, उन्होंने कथा से मिलने वाले पैसों से जरूरतमंद माताओं की सेवा शुरू की. इसके बाद उन्होंने विचार किया कि किस तरह अधिक से अधिक लोगों की मदद की जा सकती है. इसी सोच के साथ उन्होंने वृंदावन में अखंड रसोई की शुरुआत की.
अनिरुद्धाचार्य ने इंटरव्यू में गौरी गोपाल रसोई की व्यवस्था के बारे में बताते हुए कहा कि वृंदावन में आने वाले हर व्यक्ति के लिए भोजन की व्यवस्था करना जरूरी है. यहां बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद लोग भी आते हैं, जिनके लिए हर दिन भोजन पर 100 रुपये या उससे अधिक खर्च करना आसान नहीं होता.
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए गौरी गोपाल रसोई में लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जाता है. अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, यहां 24 घंटे भोजन की व्यवस्था चलती है और प्रतिदिन करीब 30 हजार लोग भोजन करते हैं. उन्होंने बताया कि कथा से मिलने वाली कमाई को सेवा के कामों में लगाने के विचार से शुरू हुई यह पहल आज बड़े स्तर पर लोगों की मदद कर रही है. अनिरुद्धाचार्य की कहानी उनके अनुसार, सत्यनारायण भगवान की कथा से शुरू हुए सफर, भागवत कथा के प्रति समर्पण और जरूरतमंदों की सेवा के संकल्प को दर्शाती है.