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Wheatgrass Juice Benefits: गेहूं के ज्वारे यानी वीटग्रास का नियमित सेवन शरीर को नई ऊर्जा देने और बीमारियों से बचाने में बेहद प्रभावी है. इसे घर पर कम खर्च में उगाकर ताजा रस तैयार किया जा सकता है.
हैदराबाद: बदलती जीवनशैली, प्रदूषण और काम के तनाव के चलते आज खान-पान से ज्यादा लोग दवाओं पर निर्भर होते जा रहे हैं. ब्लड प्रेशर, शुगर, जोड़ों के दर्द और पाचन से जुड़ी समस्याएं आम हो चुकी हैं. ऐसे में प्रकृति से जुड़ी पारंपरिक आदतें सेहत सुधारने में मददगार साबित हो सकती हैं. प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एम. ए. आरिफ खान के अनुसार, गेहूं के ज्वारे यानी वीटग्रास का नियमित सेवन शरीर को नई ऊर्जा देने और बीमारियों से बचाने में बेहद प्रभावी है.
गेहूं के ज्वारे के रस को ग्रीन ब्लड यानी हरा खून भी कहा जाता है. इसमें प्रचुर मात्रा में क्लोरोफिल, आयरन, मैग्नीशियम और आवश्यक विटामिन्स पाए जाते हैं. यह शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. खासकर महिलाओं में एनीमिया की शिकायत दूर करने और बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द व पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में यह काफी उपयोगी माना जाता है.
इनमें पोषक तत्व सबसे अधिक होते
डॉ. खान के मुताबिक, इसे घर में बहुत कम खर्च पर उगाया जा सकता है. इसके लिए एक प्लास्टिक ट्रे में वर्मीकम्पोस्ट, कोकोपीट और थोड़ी मिट्टी की परत बिछाई जाती है. लगभग 200 ग्राम गेहूं रातभर पानी में भिगोकर ट्रे में फैला दें और रोजाना हल्का पानी छिड़कें. सात दिनों के भीतर पौधे 10 सेंटीमीटर तक बढ़ जाते हैं. सात से बारह दिनों के बीच की पत्तियां रस निकालने के लिए सबसे उपयुक्त होती हैं क्योंकि इस दौरान इनमें पोषक तत्व सबसे अधिक होते हैं.
जूस पीने के बाद कम से कम 20 मिनट तक चाय या नाश्ता न करें
ताजी कटी पत्तियों को थोड़े पानी के साथ पीसकर छान लें. रोजाना सुबह खाली पेट करीब 30 मिलीलीटर ताजा रस घूंट-घूंट कर पीना चाहिए. ध्यान रहे कि जूस पीने के बाद कम से कम 20 मिनट तक चाय या नाश्ता न करें. इसे स्टोर करने के बजाय ताजा बनाकर पीना ही सबसे फायदेमंद होता है.
चोट पर लगाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता
वीटग्रास की खासियत यह है कि इसमें कोई भी हिस्सा व्यर्थ नहीं जाता. घास काटने के बाद बचा हुआ निचला हिस्सा दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करता है, जिससे दूध की गुणवत्ता बढ़ती है. बची हुई जड़ों और मिट्टी से दोबारा बेहतरीन जैविक खाद बनाई जा सकती है. इसके अलावा, रस निकालने के बाद बचे गूदे में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जिसे मसूड़ों की सफाई या हल्की चोट पर लगाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.