बेटे को सेना में नौकरी मिलने पर मुस्लिम दंपति ने की भगवान गणेश की पूजा
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Parvathipuram Manyam News: आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले में सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल देखने को मिली है. सालूर शहर के रहने वाले मुस्लिम दंपति मोहम्मद अब्दुल हक और उनकी पत्नी सलमा ने बेटे को सेना में नौकरी मिलने की मन्नत पूरी होने पर विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की. उनके बेटे ने पांचवें प्रयास में सेना भर्ती में सफलता हासिल की थी, जिसके बाद परिवार ने पंडाल सजाकर गणपति बप्पा की आराधना की. यह घटना आपसी भाईचारे और आस्था का एक बेहतरीन उदाहरण है.
आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले से भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. जिले के सालूर शहर के वड्डी स्ट्रीट इलाके में रहने वाले एक मुस्लिम दंपति ने जाति और धर्म के पारंपरिक बंधनों से ऊपर उठकर भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की है. मोहम्मद अब्दुल हक और उनकी पत्नी मोहम्मद सलमा ने अपने घर के पास बकायदा गणेश उत्सव के दौरान भव्य पंडाल सजाया और पूरे विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की आराधना की. इस मुस्लिम परिवार के इस अनोखे कदम की वजह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके बेटे के भविष्य को लेकर मांगी गई एक मन्नत थी, जो आखिरकार पूरी हो गई.
मोहम्मद अब्दुल हक ने मीडिया से बात करते हुए अपने बेटे के संघर्ष और आस्था की पूरी कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि उनके बेटे का बचपन से ही एकमात्र सपना भारतीय सेना (Indian Army) में शामिल होकर देश की सेवा करना था. इसके लिए उसने लगातार चार बार सेना भर्ती के लिए शारीरिक (Physical) और लिखित परीक्षाएं दीं, लेकिन हर बार किसी न किसी कारणवश उसका चयन अंतिम चयन सूची (Merit List) में आने से चूक जाता था. लगातार चार प्रयासों में नाकामी मिलने के कारण बेटा अंदर से काफी निराश और हताश हो चुका था. इसके बाद जब पांचवीं बार सेना भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई, तो मोहल्ले के उसके हमउम्र साथियों और दोस्तों ने उसे हिम्मत बंधाई और ढांढस बंधाया.
भगवान गणेश के आशीर्वाद से पांचवें प्रयास में मिली सफलता
दोस्तों की सलाह और प्रेरणा पर अमल करते हुए युवक ने इस बार सच्चे मन और पूरी आस्था के साथ भगवान गणेश से मन्नत मांगी कि यदि इस बार उसका चयन भारतीय सेना में हो जाता है, तो वह पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ गणपति बप्पा की पूजा कराएगा. चमत्कारिक रूप से भगवान गणेश के आशीर्वाद और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर पांचवें प्रयास में उसका चयन आखिरकार भारतीय सेना में हो गया. चयन के तुरंत बाद उसे आवश्यक प्रशिक्षण (Training) के लिए भेज दिया गया. अपनी रवानगी से पहले बेटे ने अपने पिता से कहा कि उसने गणपति बप्पा से जो मन्नत मांगी थी, उसे अब परिवार को मिलकर पूरा करना है.
माता-पिता ने पूरी की मन्नत, खुद बैठकर कराई प्रथम पूजा
बेटे की इस हार्दिक इच्छा और मन्नत का पूरा मान रखते हुए मोहम्मद अब्दुल हक और उनकी पत्नी सलमा ने बिना किसी झिझक के इलाके में गणेश जी की सुंदर प्रतिमा स्थापित करवाई. इस मुस्लिम दंपति ने खुद पूजा स्थल पर बैठकर प्रथम पूजा की सभी रस्में संपन्न कराईं और उत्सव के दौरान वसंत पूजा के अनुष्ठान भी पूरी श्रद्धा व पवित्रता के साथ निभाए.
‘आस्था और भक्ति के बीच धर्म कभी रुकावट नहीं बन सकता’
मोहम्मद अब्दुल हक का मानना है कि सच्ची आस्था और भक्ति के बीच कभी भी धर्म या संप्रदाय रुकावट नहीं बन सकता. वे इससे पहले भी स्थानीय कनक महालक्ष्मी मंदिर के आयोजनों और धार्मिक कार्यक्रमों में कई बार बढ़-चढ़कर भाग ले चुके हैं. उनके लिए इंसानी जुड़ाव, आपसी प्रेम और सच्ची भक्ति हर तरह के सामाजिक भेदभाव से कहीं ऊपर है. उनकी इस अनूठी पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है और यह घटना आपसी भाईचारे की मिसाल बन गई है.