GST on Pharma : दवा कंपनियों को सरकार ने दी बूस्टर डोज, सैंपल और एक्सपायर दवाओं पर मिलेगा टैक्स रिफंड


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GST on Pharma : जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक फार्मा कंपनियों को बड़ी राहत दी गई है. परिषद ने कहा है कि फार्मा कंपनियां अगले वित्तवर्ष से सैंपल और एक्सपायरी डेट के बाद नष्ट किए गए उत्पादों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकेंगे. इससे कंपनियों को अपनी लागत घटाने में मदद मिलेगी. हालांकि, एक्सपायर प्रोडक्ट पर तभी आईटीसी का फायदा मिलेगा जब इन उत्पादों को कानून के तहत नष्ट किया जाना अनिवार्य होगा.

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दवा कंपनियों को बूस्टर डोज, सैंपल और एक्सपायर दवाओं पर मिलेगा टैक्स रिफंड Zoom

जीएसटी परिषद ने फार्मा कंपनियों को टैक्स पर बड़ी राहत दी है.

नई दिल्ली. 8 अक्टूबर को हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक पूरी तरह कंपनियों और कारोबारियों के लिए थी. जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों को तमाम राहत देने के साथ फार्मा कंपनियों के लिए भी बड़ी राहत का फैसला किया है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने परिषद की बैठक के बाद बताया कि अगले वित्तवर्ष यानी 2027-28 से फार्मा कंपनियों को उनके सैंपल और एक्सपायर दवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करने का मौका दिया जाएगा. इसका मतलब है कि फार्मा कंपनियां खराब हुए प्रोडक्ट और डॉक्टर्स को फ्री में बांटे जाने वाले सैंपल पर भी जीएसटी क्लेम कर सकेंगे.

जीएसटी परिषद ने कहा है कि मुफ्त नमूनों और उपयोग की अवधि समाप्त होने पर नष्ट किए गए या बट्टे खाते में डाले गए सामान पर जीएसटी के तहत आईटीसी लिया जा सकेगा. परिषद ने दवा उद्योग के लिए आईटीसी को युक्तिसंगत बनाने और टैक्स रिफंड व्यवस्था में सुधार के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी. इन बदलावों से उद्योग के विनिर्माण, नकदी की उपलब्धता और निर्यात को समर्थन मिलने की उम्मीद है. जीएसटी कानून और नियमों में ये बदलाव वित्तवर्ष 2027-28 से प्रभावी होंगे. दवा उद्योग में डॉक्टरों को मुफ्त सैंपल देना, एक्सपायरी डेट वाले भंडार का प्रबंधन करना और नियामकीय जरूरतों के तहत सामान का निपटान करना नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है.

किस तरह के प्रोडक्ट पर मिलेगी छूट
जीएसटी परिषद ने साफ कहा है कि नष्ट किए गए सामान पर आईटीसी की सुविधा उन्हीं मामलों में मिलेगी, जहां कानून के तहत सामान को नष्ट करना अनिवार्य है. ईवाई इंडिया के पार्टनर और जीवन-विज्ञान एवं स्वास्थ्य सेवा कर प्रमुख आशीष जैन ने कहा कि इन प्रस्तावों से दवा फॉर्मूलेशन, टीके, जैविक उत्पाद, जांच संबंधी उत्पाद और उपभोक्ता स्वास्थ्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को विशेष लाभ होगा. इन कारोबारों में उत्पादों के नमूने देना, अवधि समाप्त होने वाले भंडार का प्रबंधन करना और विनिर्माण में बड़े निवेश करना आम बात है.

कैसे मिलेगा उद्योग को फायदा
डेलॉयट इंडिया में अप्रत्यक्ष कर प्रमुख महेश जयसिंह ने कहा कि परिषद के फैसले से भारतीय दवा उद्योग को जीएसटी के मोर्चे पर दोहरा प्रोत्साहन मिला है. एक्सपायरी डेट के बाद दवाओं को नष्ट करने या बट्टे खाते में डालने पर आईटीसी की सुविधा से भंडार पर टैक्स का बोझ कम होगा. रिफंड की गणना में इनपुट सेवाओं एवं पूंजीगत वस्तुओं को शामिल करने से उद्योग की प्रमुख चुनौती दूर होंगी. ईवाई इंडिया के अप्रत्यक्ष कर, उपभोक्ता और स्वास्थ्य विज्ञान संबंधी मामलों के पार्टनर सुरेश नायर ने कहा कि इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं पर जमा आईटीसी के रिफंड का प्रस्ताव विनिर्माण इकाइयों, उत्पादन उपकरणों और निर्यात केंद्रित गतिविधियों में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए काफी मददगार साबित होगा.



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