B Pharma vs D Pharma Difference: बीफार्मा और डीफार्मा में क्या अंतर है? 12वीं के बाद किस कोर्स से मिलेगी बंपर सैलरी?


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B Pharma vs D Pharma Difference: बायोलॉजी से 12वीं करने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स मेडिकल फील्ड में करियर का सपना देखते हैं. हर किसी को एमबीबीएस में एडमिशन नहीं मिल पाता है. ऐसे में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स बीफार्मा या डीफार्मा की पढ़ाई करते हैं. क्या आप बीफार्मा और डीफार्मा के बीच अंतर जानते हैं? जानिए किस कोर्स के लिए क्या योग्यता चाहिए और करियर के लिए कौन सा विकल्प बेस्ट रहेगा.

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बीफार्मा और डीफार्मा में क्या अंतर है? किस कोर्स से मिलेगी बंपर सैलरी?Zoom

B Pharma vs D Pharma Difference: बीफार्मा और डीफार्मा कोर्स के बीच ड्यूरेशन का भी अंतर है (फोटो- एआई)

नई दिल्ली (B Pharma vs D Pharma Difference). 12वीं कक्षा के बाद मेडिकल या हेल्थकेयर के क्षेत्र में करियर बनाना हो तो दिमाग में फार्मेसी का ख्याल जरूर आता है. डॉक्टर चाहे जितनी अच्छी दवा लिख दे, लेकिन उस दवा की सही बनावट, केमिकल कॉम्बिनेशन और उसकी पूरी केमिस्ट्री को समझने का काम फार्मासिस्ट ही करता है. कोरोना काल के बाद से फार्मा सेक्टर की अहमियत पूरी दुनिया ने समझ ली है. तब से इस क्षेत्र की तरफ युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है.

कई स्टूडेंट्स उलझन में रहते हैं कि 12वीं के बाद फार्मेसी में करियर बनाने के लिए बीफार्मा (बैचलर इन फार्मेसी) करें या डीफार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी). दोनों ही फार्मेसी कोर्स दवाइयों की दुनिया से जुड़े हैं. लेकिन इनकी अवधि, पढ़ाई का स्तर, करियर के अवसर और सैलरी में जमीन-आसमान का फर्क है. अगर आप भी बीफार्मा और डीफार्मा कोर्स के बीच में फंसे हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या बेहतर रहेगा तो जानिए दोनों के बीच का अंतर.

B.Pharma vs D.Pharma: बीफार्मा और डीफार्मा के बीच क्या अंतर है?

दोनों फार्मेसी कोर्स अपनी जगह बेहतरीन हैं. लेकिन इनका दायरा और पढ़ाई का तरीका बिल्कुल अलग है:

डीफार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी): यह डिप्लोमा कोर्स सिर्फ 2 साल का होता है. इसमें मुख्य रूप से मेडिकल स्टोर चलाने, दवाइयों की बेसिक जानकारी, उनकी खुराक (Dosage) और रिटेल या होलसेल फार्मेसी से जुड़ी प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस किया जाता है.

बीफार्मा (बैचलर इन फार्मेसी): यह 4 साल का फुल-fledged डिग्री कोर्स है. इसमें दवाइयों के निर्माण (Manufacturing), रिसर्च, लैबोरेट्री टेस्टिंग, केमिकल फॉर्मूलेशन और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के तकनीकी पहलुओं की गहराई से पढ़ाई कराई जाती है.

पात्रता, योग्यता और एडमिशन का प्रोसेस

  • शैक्षणिक योग्यता: दोनों ही कोर्स के लिए स्टूडेंट का 12वीं कक्षा में पीसीएम (Physics, Chemistry, Maths) या पीसीबी (Physics, Chemistry, Biology) विषयों से पास होना अनिवार्य है. कुछ संस्थानों में एडमिशन के लिए मेरिट या एंट्रेंस एग्जाम (जैसे GPAT या राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाएं) पास करने होते हैं.

किसे कौन सा कोर्स चुनना चाहिए?

  • अगर पढ़ाई जल्दी खत्म करके तुरंत मेडिकल स्टोर (केमिकल शॉप) खोलना चाहते हैं या किसी हॉस्पिटल में फार्मासिस्ट की नौकरी पाना चाहते हैं तो D.Pharma शॉर्टकट और बेहतरीन विकल्प है.
  • अगर फार्मास्यूटिकल कंपनियों में बड़ी रिसर्च करना चाहते हैं, ड्रग इंस्पेक्टर बनना चाहते हैं या विदेश में करियर की लंबी छलांग लगाना चाहते हैं तो B.Pharma ही चुनना चाहिए.

नौकरी के अवसर और सैलरी का गणित

फार्मेसी मेडिकल फील्ड का ऐसा सेक्टर है, जहां मंदी का असर बहुत कम देखने को मिलता है.

  • नौकरी के विकल्प: डीफार्मा करने के बाद खुद का मेडिकल स्टोर (केमिस्ट शॉप) खोल सकते हैं, हॉस्पिटल में डिस्पेंसर बन सकते हैं या फार्मा कंपनियों में सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम कर सकते हैं. वहीं बीफार्मा करने वालों के लिए इंडस्ट्री के दरवाजे बहुत बड़े पैमाने पर खुलते हैं. वे क्वॉलिटी कंट्रोल, ड्रग इंस्पेक्टर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), मेडिकल कोडिंग और क्लीनिकल रिसर्च जैसे हाई-लेवल पदों पर जा सकते हैं.
  • सैलरी पैकेज: शुरुआती दौर में डीफार्मा के बाद सैलरी आमतौर पर 15,000 से 25,000 रुपये प्रति महीने तक होती है. दूसरी तरफ, बीफार्मा और उसके बाद एम.फार्मा या एमबीए करने वाले प्रोफेशनल्स को शुरुआती पैकेज ही 3 से 6 लाख रुपये सालाना या उससे अधिक का मिल जाता है.



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