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भदोही जिले में आयोजित कॉर्पेट एक्सपो में इस बार श्रीनगर की कालीन का जलवा देखने को मिला. श्रीनगर के द्वारा सबसे महंगे कालीन एक्सपो में लाई गई थीं. श्रीनगर के जय सी एक्सपोर्ट्स के द्वारा करीब एक करोड़ 72 लाख रुपये की कालीन एक्सपो में लाई गई थी, जो लोगों में कौतूहल का विषय बना रहा. लोग देखने के लिए दूर-दूर से बोलते रहे, जहां बॉयर्स को भी यह कालीन काफी पसंद आई. श्रीनगर में सिल्क से कालीन तैयार की जाती है.
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में आयोजित कॉर्पेट एक्सपो में इस बार श्रीनगर की कालीन का जलवा देखने को मिला. श्रीनगर के द्वारा सबसे महंगे कालीन एक्सपो में लाई गई थीं. श्रीनगर के जय सी एक्सपोर्ट्स के द्वारा करीब एक करोड़ 72 लाख रुपये की कालीन एक्सपो में लाई गई थी, जो लोगों में कौतूहल का विषय बना रहा. लोग देखने के लिए दूर-दूर से बोलते रहे, जहां बॉयर्स को भी यह कालीन काफी पसंद आई. श्रीनगर में सिल्क से कालीन तैयार की जाती है. हस्तनिर्मित कालीन होने की वजह से उनकी मांग खूब रहती है.
एक कालीन की कीमत 1 करोड़ 72 लाख
फर्म से जुड़े वसीम ने बताया कि हम जम्मू कश्मीर से आए हैं. हम लोग श्रीनगर के रहने वाले हैं. हमारे फर्म का नाम जय सी एक्सपोर्ट्स है. ये सारे कारपेट्स हैं. यह सिर्फ कश्मीर में ही बनते हैं. इसकी जो प्रोडक्शन है और जो इसकी वीवर्स हैं. स्पेशल वीवर्स हैं, जो एक्सपर्ट वीवर्स रहते हैं, वो कश्मीर में ही मिलेंगे. हमारे पास सबसे महंगी कालीन 1 करोड़ 72 लाख की है, बायर्स के द्वारा हमारे लगभग सारे कारपेट्स ही पसंद किए जा रहे हैं. सबसे ज्यादा इस कालीन की खासियत इसकी क्वालिटी की है, क्योंकि ये क्वालिटी आपको दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी. इसे तैयार करने में कई दिनों तक बुनकर मेहनत करते हैं. महीन कम होने की वजह से बुनाई का भी खर्चा ज्यादा लगता है.
6 से 9 महीने का समय
वसीम ने बताया कि ये क्वालिटी हम ही बनाते हैं. जो बायर्स को पसंद आ रहे हैं वो पेस्टल टोन्स है. सी-ग्रीन की भी मांग है. सबसे बड़ा कारपेट जो फेयर में है, वो मेरे पास है. अलग-अलग रंग की कालीन अभी क्लाइंट्स को बहुत अच्छा लग रहा है. हमारे कालीन का ब्रांच दिल्ली में निज़ामुद्दीन ईस्ट में है है. जांसंस के नाम से कंपनी है. श्रीनगर में ही सारी मैन्युफैक्चरिंग होती है, फिर हमारा वेयरहाउस दिल्ली में है, वहां से डिमांड के अनुसार सप्लाई की जाती है. अगर बॉयर्स ऐसी कालीनों का आर्डर देते हैं तो इसे बनाकर एक्सपोर्ट करने में करीब 6 से 9 महीने का वक्त चला जाता है. क्योंकि, यह साइज के ऊपर निर्भर करता है.